लखनऊ, 19 मई । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बीबीडी थाना क्षेत्र में एक दलित परिवार के घर पर हुए हमले ने स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आज दोपहर बाद कुछ असामाजिक तत्वों ने दलित परिवार के घर की छत को उखाड़ दिया, जिसके बाद यह घटना सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर वायरल हो गई। परिवार का आरोप है कि हमलावरों को स्थानीय स्तर पर संरक्षण प्राप्त था, और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। यह घटना न केवल सामाजिक भेदभाव को उजागर करती है, बल्कि राज्य में दलित उत्पीड़न के बढ़ते मामलों पर भी प्रकाश डालती है।
घटना के अनुसार, बीबीडी थाना क्षेत्र के एक गांव में दलित परिवार अपना घर बना रहा था। परिवार के सदस्यों ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान कुछ स्थानीय दबंगों ने उनसे जबरन वसूली की कोशिश की थी, जिसका परिवार ने विरोध किया। इसके बाद आज दोपहर करीब 3:30 बजे, एक समूह लाठी-डंडों और औजारों के साथ उनके घर पहुंचा और छत को तोड़ना शुरू कर दिया। परिवार की महिलाओं और बच्चों ने विरोध किया, लेकिन हमलावरों ने उनकी एक न सुनी। परिवार का आरोप है कि पुलिस को सूचना देने के बावजूद कोई तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचकर केवल तमाशा देखते रहे।
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में हमलावरों को छत तोड़ते और परिवार को धमकाते देखा जा सकता है। इस घटना ने दलित समुदाय के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और स्थानीय दलित संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। सपा नेता अमित यादव ने अपने एक्स पोस्ट में कहा, “योगी जी के रामराज्य में दलित अपना घर भी नहीं बना सकता?
यह है उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था?
पुलिस ने देर शाम को मामला दर्ज कर जांच शुरू की, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। बीबीडी थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। हालांकि, परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद कम है, क्योंकि हमलावरों का स्थानीय स्तर पर प्रभाव है।
यह घटना उत्तर प्रदेश में दलितों पर बढ़ते अत्याचारों का एक और उदाहरण है। हाल के महीनों में, गोरखपुर, मैनपुरी, और भदोही जैसे जिलों में भी दलितों पर हमले की खबरें सामने आई हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसी घटनाएं सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचा रही हैं और सरकार को कठोर कदम उठाने की जरूरत है। इस मामले में अब विपक्षी दलों ने सरकार पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।



