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मोतीझील में अवैध शराब ठेके से जनता त्रस्त, लाइसेंस खत्म होने पर भी धड़ल्ले से बिक्री जारी, मंदिर के सामने खुला ठेका, छात्राओं और महिलाओं पर बढ़ रहा अत्याचार

ज़की भारतीय ✍🏼 

लखनऊ, 3 मई । बाजार खाला थाना क्षेत्र के मोतीझील इलाके में एक सरकारी देसी शराब (कंट्री लिकर) की दुकान नियम-कानून को ताक पर रखकर लगातार चल रही है। मार्च 2026 में इस दुकान का लाइसेंस समाप्त हो चुका था, लेकिन आबकारी विभाग ने 14 दिन का इस शराब व्यवसाई को अस्थाई लाइसेंस दे दिया था जो 1 मई को समाप्त भी हो चुका है। 18 अप्रैल 2026 को जब अस्थाई लाइसेंस लिया गया था,उस समय से पूर्व भी अवैध रूप से दुकान का संचालन किया जा रहा था।यानी 31 मार्च 2026 तक ही पहले लाइसेंस की वैधता थी।

 स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से यहां शराब की बिक्री बिना किसी रुकावट के जारी रही। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दुकान का मूल पता कहीं और का है, लेकिन इसे मोतीझील में खोल दिया गया। सबसे गंभीर बात यह है कि दुकान के ठीक सामने एक मंदिर स्थित है। शराब पीने वाले लोग राहगीरों से बदतमीजी करते हैं, अश्लील टिप्पणियां करते हैं और मंदिर आने वाली महिलाओं तथा लड़कियों को परेशान करते हैं।

आबकारी विभाग की शर्तें क्या कहती हैं?

उत्तर प्रदेश आबकारी नीति और यूनाइटेड प्रोविंसेज एक्साइज एक्ट, 1910 के अनुसार देसी शराब की दुकानें इन स्थानों पर नहीं खोली जा सकतीं। किसी भी धार्मिक स्थल (मंदिर, मस्जिद आदि) के निकट (सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार आमतौर पर 150-500 मीटर की दूरी का प्रतिबंध), स्कूल, कॉलेज या शैक्षणिक संस्थानों के आसपास,अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र के निकट, घनी आबादी वाले आवासीय इलाकों में, जहां इससे सार्वजनिक शांति भंग हो।

दुकान का लाइसेंस एक विशिष्ट पते के लिए जारी होता है। लाइसेंस समाप्त होने के बाद बिना नवीनीकरण के संचालन पूर्णतः अवैध है। लाइसेंस में अनुमोदित स्थान से दुकान को कहीं और शिफ्ट करना भी नियमों का उल्लंघन है।

कानूनी उल्लंघन और लागू धाराएं

यूनाइटेड प्रोविंसेज एक्साइज एक्ट, 1910 की धारा 60: लाइसेंस के बिना या नियमों का उल्लंघन कर शराब बेचना, भंडारण या बिक्री — कैद और भारी जुर्माना। धारा 21 एवं 64: लाइसेंस की शर्तों (जैसे स्थान और वैधता) का उल्लंघन करने पर दंड। लाइसेंस समाप्त होने के बाद भी बिक्री जारी रखना धारा 60(1) के अंतर्गत गंभीर अपराध माना जाता है।

इलाके में आयुर्वेदिक अस्पताल का छात्रावास भी ठेके के पास ही है। छात्राओं ने पहले ही इसका विरोध किया था। उनका कहना है कि रोज शराब पीकर लोग अभद्रता करते हैं, जिससे लड़कियों का आना-जाना मुश्किल हो गया है। मंदिर में आरती-दर्शन करने वाली महिलाओं को भी शराबियों के अश्लील व्यंग्यों का सामना करना पड़ रहा है।

पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका पर सवाल

स्थानीय लोगों ने कई बार बाजार खाला थाने में शिकायत की, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। सूत्रों का कहना है कि आबकारी विभाग की मिलीभगत और पुलिस की “लंबी कमाई” के कारण यह दुकान चल रही है।क्षेत्रीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि आबकारी विभाग और पुलिस तुरंत कार्रवाई नहीं करती, तो इलाके में महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक शांति गंभीर रूप से प्रभावित होगी। उन्होंने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि दुकान को तत्काल सील किया जाए, दोषियों पर मुकदमा दर्ज किया जाए और मिलीभगत की जांच हो।यह मामला न सिर्फ आबकारी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और धार्मिक स्थलों की गरिमा से जुड़ा गंभीर मुद्दा भी है।

क्या कहते हैं स्थानीय लोग?

“मंदिर के सामने शराब का ठेका चल रहा है। लड़कियां और महिलाएं डर के मारे घर से बाहर निकलने में हिचकिचाती हैं। पुलिस ने अभी कल ही इस मामले पर कार्रवाई करते हुए कई शराबियों को गिरफ्तार करने में सफलता तो प्राप्त की लिकिन इन जैसे अवैध ठेकों पर कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई।जिसकी मार्किट में ये शराब की दुकान है वो एक महिला स्वामी है जिसने हमारे संवाददाता अज़मी अल्वी को खबर करने से रोका और कहा कि मैं खुद नगर निगम में हूं।हालांकि सूत्रों का कहना है कि ये मार्किट नुज़ूल की भूमि पर बनी हुई है। जल्द ही नुज़ूल भूमि की सत्यता पर भी खबर लिखी जाएगी।

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