लखनऊ, 19 मई । लखनऊ में नशीले पदार्थों की बिक्री वैसे तो आम बात हो गई है, लेकिन यह नशा हमारी नस्लों को हमेशा के लिए बर्बाद कर देगा। क्योंकि किसे मालूम कि हमारे बच्चे कब सिगरेट पीते – पीते ब्राउन शुगर स्मैक के कश लेने लगेंगे । आने वाले टाइम में यह नस्ल बर्बाद होने की कगार पर आ जाएगी ,अगर अभी से जहर बेचने वालों के खिलाफ पुलिस ने सख़्त क़दम नहीं उठाया और अपनी संलिप्ता शामिल रखी और चंद पैसों की रिश्वत के नाम पर अगर कारवाइयां बिकती गई तो आम जनता ,आम जनमानस में इसका क्या प्रभाव पड़ेगा यह शायद अभी उनको भी नहीं पता ।
बहरहाल लखनऊ के अधिकतर कोनो और मोहल्ले में यह धंधा जोर-शोर पर फैला हुआ है लेकिन पुराना लखनऊ भी इससे अछूता नहीं रहा। पुराने लखनऊ के बीबीगंज, पुराना चबूतरा, चौपटिया, और पान दरीबा जैसे क्षेत्रों में भी केंद्रित है, जहां स्मैक, ब्राऊन शुगर, गांजा, और अन्य नशीले पदार्थ धड़ल्ले से बिक रहे हैं।
नशीले पदार्थों के धंधे की तस्करी का नेटवर्क पुराने शहर के घनी आबादी वाले इलाकों में फैला है। बीबीगंज में पान की दुकानों और छोटे ठेलों पर स्मैक और ब्राऊन शुगर जैसी नशीले पदार्थ खुलेआम बेचे जा रहे हैं। पुराना चबूतरा और चौपटिया में रात के समय खुले में इन मादक पदार्थों की बिक्री होती है। पान दरीबा और गुंटिया जैसे क्षेत्रों में पान के साथ नशीले पदार्थ मिलाकर बेचे जा रहे हैं। इन जगहों पर स्मैक, ब्राऊन शुगर (सिंथेटिक ड्रग) और गांजा आसानी से उपलब्ध है।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
X पर कई पोस्ट्स, स्थानीय लोगों और विश्वस्त सूत्रों ने आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मी तस्करों से मोटी रकम लेकर उनकी गतिविधियों को नजरअंदाज करते हैं। पुराने लखनऊ में तस्कर खुले तौर पर काम करते हैं, लेकिन पुलिस की कार्रवाई सीमित रहती है। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “पुलिस को मासिक रकम दी जाती है, जिसके बाद तस्कर बिना डर के काम करते हैं।” यह आरोप गंभीर हैं और पुलिस की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं।
अभियान का दायरा और कार्रवाई
हालांकि सूत्रों के अनुसार पुलिस ने होटलों, फार्महाउसों, और हॉस्टलों पर निगरानी बढ़ा दी है। लखनऊ के अलावा, कानपुर, वाराणसी, नोएडा, और गाजियाबाद में भी यह अभियान चल रहा है। X पर पोस्ट्स के अनुसार, पिछले हफ्ते गोमती नगर में एक फार्महाउस से भारी मात्रा में स्मैक बरामद हुई। पुलिस ने दावा किया कि विदेशी तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं। हालांकि, स्थानीय लोग शिकायत करते हैं कि छोटे तस्करों को छोड़कर बड़े माफिया अक्सर बच निकलते हैं।
पिछले रिकॉर्ड और चुनौतियां
लखनऊ में ड्रग तस्करी कोई नई समस्या नहीं है। 2023 में हजरतगंज में एक बड़े ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ हुआ था, जिसमें 50 किलो गांजा बरामद हुआ। इसके बावजूद,
सआदतगंज और बीबीगंज जैसे क्षेत्रों में तस्करी जारी है। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती विदेशी तस्करों का नेटवर्क और स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार है।
लखनऊ में नशे के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए जनता से अपील की गई है कि वे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को दें। हालांकि, पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लानी होगी ताकि भ्रष्टाचार के आरोपों को खत्म किया जा सके।



