HomeArticleनेहा सिंह राठौड़ के खिलाफ अब तक 400 से अधिक मुकदमे दर्ज
नेहा सिंह राठौड़ के खिलाफ अब तक 400 से अधिक मुकदमे दर्ज
एनएस लाइव न्यूज़ पोर्टल , यूट्यूब चैनल और हिंदी वीकली समाचार पत्र न्याय स्रोत में विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें….
8177048110
मेरे पोर्टल की सहायता हेतु Q R CODE

ज़की भारतीय
भोजपुरी लोक गायिका नेहा सिंह राठौड़ ने अभिव्यक्ति की आजादी के तहत हर गलत और अनुचित बात का डटकर विरोध किया है। उन्होंने सच्चाई के लिए अपनी लड़ाई जारी रखी और कभी हार नहीं मानी। उनके खिलाफ अब तक 400 से अधिक मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, फिर भी उनके चेहरे पर आज भी वही सुकून और दृढ़ता दिखती है। उनकी आत्मकथा इस बात का जीवंत प्रमाण है। मैंने सोचा, क्यों न इस साहसी भोजपुरी गायिका के लिए एक लेख लिखा जाए। मैंने विभिन्न स्रोतों से सामग्री जुटाई, और यह लेख भले ही लंबा हो, लेकिन यह एक ऐसी महिला की कहानी है जो पुरुषों से कहीं अधिक सत्य के लिए आवाज उठा रही है। वे सरकार के खिलाफ न केवल खड़ी हैं, बल्कि उसका डटकर मुकाबला भी कर रही हैं। यह कोई छोटी बात नहीं है। नेहा सिंह राठौड़ जैसी शख्सियत के पक्ष, विपक्ष या संतुलित दृष्टिकोण से एक लेख लिखना हमारा कर्तव्य है। तो, आइए शुरू करते हैं नेहा सिंह राठौड़ के परिचय से।

नेहा सिंह राठौर, एक भोजपुरी लोक गायिका, जिन्होंने अपनी गायकी को सामाजिक और राजनीतिक बदलाव का हथियार बनाया, आज न केवल बिहार और उत्तर प्रदेश में, बल्कि पूरे भारत में एक प्रेरणादायक शख्सियत के रूप में उभरी हैं। उनके गीत, जैसे यूपी में का बा, बिहार में का बा, और एमपी में का बा, भोजपुरी भाषा की सरलता और व्यंग्य की तीक्ष्णता के साथ सरकार की नीतियों, सामाजिक बुराइयों, और जनता की समस्याओं पर सवाल उठाते हैं। नेहा की निष्पक्षता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति उनकी निष्ठा, और समाजवादी सोच ने उन्हें आम जनता की आवाज बना दिया है। यह लेख नेहा के जीवन, उनकी निष्पक्षता, समाज के लिए उनकी लड़ाई, और उनके खिलाफ दर्ज सैकड़ों शिकायतों के बावजूद उनकी अटल हिम्मत की कहानी है।
नेहा का बैकग्राउंड और शुरुआती जीवन
नेहा सिंह राठौर का जन्म 1997 में बिहार के कैमूर जिले में हुआ। उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई कानपुर विश्वविद्यालय से पूरी की और बाद में दिल्ली में सिविल सर्विस की तैयारी के दौरान अपनी गायकी को नया आयाम दिया। 2022 में उन्होंने अंबेडकरनगर, उत्तर प्रदेश के हिमांशु सिंह से शादी की, जो एक लेखक और पूर्व में दिल्ली के दृष्टि IAS कोचिंग इंस्टीट्यूट में शिक्षक थे। नेहा का परिवार और उनकी पृष्ठभूमि मध्यमवर्गीय रही है, जिसने उन्हें जमीन से जुड़े मुद्दों को समझने और उन पर गीत लिखने की प्रेरणा दी।नेहा ने भोजपुरी लोकगीतों को चुना, क्योंकि यह भाषा न केवल उनकी जड़ों से जुड़ी थी, बल्कि यह ग्रामीण और आम जनता के बीच सीधे संवाद का माध्यम भी थी। उनके गीतों ने यूट्यूब पर लाखों व्यूज बटोरे, खासकर यूपी में का बा ने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया। उनके गीतों में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई, और सामाजिक अन्याय जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए, जो आम जनता की रोजमर्रा की समस्याओं को दर्शाते हैं।
निष्पक्षता और समाजवादी सोच
नेहा सिंह राठौर की सबसे बड़ी खासियत उनकी निष्पक्षता है। वह किसी भी राजनीतिक दल से औपचारिक रूप से जुड़ी नहीं हैं, फिर भी उनकी सोच समाजवादी विचारधारा से प्रेरित है। वह बाबासाहेब अंबेडकर और बुद्ध के विचारों को अपने गीतों में जगह देती हैं और सामाजिक समानता, जातिवाद विरोध, और सांप्रदायिक सद्भाव की वकालत करती हैं। उनके गीत और सोशल मीडिया पोस्ट्स में वह हिंदू-मुस्लिम भेदभाव, धार्मिक आधार पर राजनीति, और सामाजिक अन्याय के खिलाफ खुलकर बोलती हैं।उनका यह रुख उन्हें एक अनूठी शख्सियत बनाता है, क्योंकि एक लोकगायिका के रूप में उन्हें इन मुद्दों पर बोलने की जरूरत नहीं थी। एक गायिका अपनी कला के जरिए मनोरंजन कर सकती थी, फिल्मों में गा सकती थी, या केवल व्यावसायिक सफलता पर ध्यान दे सकती थी। लेकिन नेहा ने अपनी आवाज को आम जनता की पीड़ा और समाज में हो रहे अन्याय के खिलाफ उठाया। उनके गीत न केवल मनोरंजन करते हैं, बल्कि समाज को आलोचनात्मक सोच की ओर प्रेरित करते हैं।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सत्ता से सवाल
नेहा की गायकी और सोशल मीडिया पोस्ट्स अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का जीवंत उदाहरण हैं। उन्होंने यूपी में का बा जैसे गीतों के जरिए उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों पर सवाल उठाए। इसके बाद, एमपी में का बा में मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार को निशाना बनाया।
2024 में सीधी पेशाब कांड पर उनके कार्टून और टिप्पणी ने RSS और BJP की विचारधारा पर तीखा प्रहार किया। 2025 में पहलगाम आतंकी हमले पर उनकी टिप्पणी, जिसमें उन्होंने सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए, ने उन्हें फिर से विवादों में ला दिया।नेहा ने बार-बार कहा है कि सवाल पूछना उनका संवैधानिक अधिकार है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मैं आपसे नहीं डरती, मोदी जी। आप 400 शिकायतें नहीं, चार लाख FIR करवा दीजिए, मैं सवाल पूछना बंद नहीं करूंगी।” यह बयान उनकी निडरता और सत्ता के सामने सच बोलने की हिम्मत को दर्शाता है। मुकदमों और शिकायतों का सिलसिला
नेहा के खिलाफ दर्ज मुकदमों और शिकायतों की संख्या उनकी बेबाकी का सबूत है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके खिलाफ निम्नलिखित प्रमुख मामले दर्ज हुए हैं।
2022-2023: यूपी में का बा और एमपी में का बा गीतों के लिए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में FIR दर्ज हुईं।
2024: सीधी पेशाब कांड पर RSS की खाकी निक्कर से संबंधित कार्टून के लिए भोपाल, छतरपुर, और इंदौर में तीन FIR दर्ज हुईं।
2025: पहलगाम आतंकी हमले पर टिप्पणी के लिए लखनऊ के हजरतगंज थाने में FIR दर्ज हुई, जिसमें देशद्रोह और IT एक्ट की धाराएं शामिल थीं।
2025: वाराणसी के लंका, भेलूपुर, और अन्य थानों में पीएम मोदी पर कथित अपमानजनक टिप्पणियों, जैसे “कायर” और “जनरल डायर” कहने के लिए 400 से अधिक शिकायतें और एक FIR दर्ज हुई।
2025: अयोध्या में मानहानि का एक मामला दर्ज हुआ, जो 6 मई 2025 को कोर्ट द्वारा खारिज कर दिया गया।कुल मिलाकर, नेहा के खिलाफ 4-5 FIR और 400 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं, जो मुख्य रूप से उनके गीतों और सोशल मीडिया पोस्ट्स से जुड़ी हैं। कुछ X पोस्ट्स में दावा किया गया है कि 15 थानों में 500 से अधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया कि केवल लंका थाने में FIR दर्ज हुई है।
जमानत की स्थिति
नेहा ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों को रद्द करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर की थी, मामले की सुनवाई 12 मई होनी थी, लेकिन नहीं हो सकी । उन्होंने दावा किया है कि उन्हें दुर्भावनावश फंसाया जा रहा है और उनकी आलोचना संवैधानिक अधिकार के तहत है। अभी तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है, और वह जमानत लेने के बजाय कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। उनकी याचिका में कहा गया है कि उनके खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता, और वह अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल कर रही हैं।
कांग्रेस और विपक्षी दलों का समर्थन
नेहा किसी भी राजनीतिक दल से औपचारिक रूप से नहीं जुड़ी हैं, लेकिन उनके बयानों और गीतों को विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के समर्थकों द्वारा सराहा जाता है। कुछ X पोस्ट्स में कांग्रेस समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने उनके पक्ष में आवाज उठाई है, इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है। उदाहरण के लिए, X पर @ShyamMeeraSingh ने कहा, “नेहा के खिलाफ FIR अब्सर्ड है। इंटेलिजेंस फेलियर पर सवाल पूछना अपराध नहीं है।” कांग्रेस ने अभी तक नेहा के लिए कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में विपक्षी नेताओं ने उनके समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट किए हैं। यह संभावना है कि नेहा की निष्पक्ष और सांप्रदायिकता विरोधी छवि के कारण विपक्षी दल उन्हें भविष्य में समर्थन दे सकते हैं, खासकर मध्य प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में।
आगामी मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव और नेहा की भूमिका
मध्य प्रदेश में 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में नेहा की लोकप्रियता और निष्पक्ष छवि उन्हें एक प्रभावशाली शख्सियत बना सकती है। हालांकि वह किसी राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं हैं, उनकी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर टिप्पणियां उन्हें युवाओं और ग्रामीण मतदाताओं के बीच लोकप्रिय बनाती हैं। उनकी गायकी और सोशल मीडिया उपस्थिति विपक्षी दलों के लिए एक प्रचार उपकरण बन सकती है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर नेहा किसी दल, जैसे कांग्रेस या सपा, के साथ गठजोड़ करती हैं, तो उनकी लोकप्रियता और समाजवादी सोच मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में मतदाताओं को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, नेहा ने अभी तक राजनीति में सक्रिय होने की कोई इच्छा नहीं जताई है
सांप्रदायिकता विरोध और निष्पक्षता
ऐसे समय में जब देश में हिंदू-मुस्लिम भेदभाव, जातिवाद, और धार्मिक आधार पर राजनीति अपने चरम पर है, नेहा की निष्पक्षता और सांप्रदायिकता विरोधी रुख उन्हें अलग बनाता है। वह हिंदू होने के बावजूद किसी भी धर्म या समुदाय के खिलाफ भेदभाव की आलोचना करती हैं। उदाहरण के लिए, सीधी पेशाब कांड पर उनकी टिप्पणी में उन्होंने आदिवासियों के उत्पीड़न पर सवाल उठाया और RSS की विचारधारा पर तंज कसा। पहलगाम हमले पर उनकी पोस्ट में उन्होंने सरकार की जवाब देही पर सवाल उठाए, बिना किसी धार्मिक समुदाय को निशाना बनाए। उनके गीतों में बुद्ध और अंबेडकर के विचारों का समावेश उनकी समावेशी सोच को दर्शाता है। वह कहती हैं, “भारत बुद्ध और अंबेडकर का देश है।” यह बयान उनकी सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक समानता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
नेहा की गायकी और फिल्मों में योगदान
नेहा ने अभी तक भोजपुरी फिल्मों में गायन की ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया है। उनकी गायकी मुख्य रूप से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर केंद्रित रही है, और उनके यूट्यूब गीतों ने ही उन्हें प्रसिद्धि दिलाई है। यूपी में का बा के पहले पार्ट को यूट्यूब पर 8 मिलियन से अधिक व्यूज मिल चुके हैं। हालांकि, उनकी विवादास्पद छवि के कारण फिल्म इंडस्ट्री में उनके लिए अवसर सीमित रहे हैं। फिर भी, उनकी लोकप्रियता और सामाजिक मुद्दों पर प्रभाव के कारण भविष्य में फिल्मों या अन्य मंचों पर उनकी भागीदारी बढ़ सकती है।
नेहा सिंह राठौर एक ऐसी लोकगायिका हैं, जिन्होंने अपनी कला को समाज के लिए एक हथियार बनाया। उनकी निष्पक्षता, सांप्रदायिकता विरोधी रुख, और समाजवादी सोच उन्हें एक अनूठी शख्सियत बनाती हैं। 400 से अधिक शिकायतों और कई FIR के बावजूद, वह न डरीं, न झुकीं, बल्कि अपनी आवाज को और बुलंद किया। उनकी गायकी और बयान न केवल सत्ता से सवाल पूछते हैं, बल्कि समाज में बदलाव की उम्मीद भी जगाते हैं।वह किसी राजनीतिक दल की सदस्य नहीं हैं, फिर भी उनकी समाजवादी सोच और जनता के लिए लड़ाई उन्हें विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और सपा, के समर्थकों के बीच लोकप्रिय बनाती है। मध्य प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका प्रभावशाली हो सकती है, भले ही वह केवल एक प्रचारक के रूप में शामिल हों। नेहा की कहानी यह सिखाती है कि एक आम इंसान, एक गायिका, अपनी आवाज के जरिए समाज में बदलाव ला सकती है, भले ही इसके लिए उसे कितनी ही कीमत क्यों न चुकानी पड़े। उनकी हिम्मत और निष्पक्षता आज के दौर में, जहां सांप्रदायिकता और भेदभाव का बोलबाला है, एक मिसाल है।
Post Views: 578