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अयोध्या में विवादित बयान पर बवाल, विनय कटियार के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज
ज़की भारतीय
अयोध्या, 29 सितंबर। भारत, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए जाना जाता है, आजकल सांप्रदायिक और भड़काऊ बयानों की वजह से लगातार विवादों में फंसता जा रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बयान समाज में गहरी खाई खड़ी कर रहे हैं। ताज़ा मामला अयोध्या में 25 सितंबर को प्रकाश में आया था , जिसमें विनय कटियार ने मुसलमानों को शहर से निकल जाने की बात कहकर एक बार फिर विवाद खड़ा कर दिया।लेकिन गौरतलब बात यह है की ऐसा आपत्तिजनक बयान देने वाले विनय कटियार भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं और अब तक उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई।
पढ़िए विनय कटिहार का पूरा बयान
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक विनय कटियार ने 24 सितंबर 2025 को अयोध्या में एक प्रेस वार्ता के दौरान विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को अयोध्या छोड़ देना चाहिए और इस पवित्र मंदिर नगरी में किसी भी मस्जिद के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह बयान धन्नीपुर मस्जिद के निर्माण को लेकर प्रशासन द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) न मिलने के संदर्भ में आया था ।
कटियार ने यह भी कहा कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद के बदले कोई मस्जिद या अन्य मस्जिद का निर्माण नहीं होगा। उनका यह बयान सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद की जमीन के बदले एक ऐसी जमीन दी थी ,जिस पर मस्जिद बनाने का प्रावधान था और आज भी वह मुसलमान के पास मौजूद है ।
उनका यह बयान इसलिए और विवादास्पद है, एक तरफ तो मुसलमान के खिलाफ उन्होंने जहर उगला है तो दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ बयान दिया है। लेकिन इसके बावजूद पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह दोहरा रवैया उत्तर प्रदेश सरकार में गलत संदेश दे रहा है।
बहरहाल उन्होंने मुसलमानों को अयोध्या से बाहर निकालने की बात की और कहा कि इसके बाद पूरे उत्साह से दिवाली मनाई जाएगी। उनका यह बयान अयोध्या में तनाव का कारण बना है ।
विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने कटियार के बयान की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि यह बयान न केवल मुसलमानों के खिलाफ जहर फैलाता है बल्कि संविधान की मूल भावना और देश की एकता व सद्भावना पर भी सीधा हमला है। आलोचकों का सवाल है कि यदि ऐसा बयान किसी अल्पसंख्यक समुदाय के नेता द्वारा दिया जाता, तो प्रशासन तुरंत एफआईआर दर्ज करता और बुलडोज़र तक चल पड़ते, लेकिन कटियार जैसे नेताओं पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
भाजपा नेताओं के विवादित बयानों की लिस्ट
यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा नेताओं ने मुसलमानों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ विवादित बयान दिए हों। इससे पहले भी कई नेता विवादों में रहे हैं—
साक्षी महाराज (भाजपा सांसद) ने सभा में कहा था कि “मुसलमानों की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है, अगर इसे नहीं रोका गया तो देश खतरे में पड़ जाएगा।”
प्रज्ञा ठाकुर (भाजपा सांसद) ने कहा था कि “नाथूराम गोडसे देशभक्त थे और जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं वे देशविरोधी हैं।”
योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश) के भाषणों में भी मुसलमानों को लेकर विभाजनकारी टिप्पणियाँ आई हैं।
अनंत कुमार हेगड़े (पूर्व केंद्रीय मंत्री) ने कहा था कि “हम संविधान बदलने आए हैं, मुसलमानों के लिए इसमें कोई विशेष जगह नहीं है।”
मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने भारतीय सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि “हमने आतंकवादियों पर हमला करने के लिए उनकी बहन भेज दी” — इस बयान को समाज में भड़काऊ और विवादास्पद माना गया। कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना की बहादुर अधिकारी हैं, जिन्होंने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी ठिकानों पर ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि “साम्प्रदायिक और भड़काऊ बयान किसी भी हाल में लोकतंत्र और कानून के अनुरूप नहीं हैं। ऐसे मामलों में मजबूती से कार्रवाई की जानी चाहिए।”
कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मामले में सख्त धाराओं के तहत तुरंत जांच और कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि लंबित मामले की वजह से किसी भी आरोपी को विशेष संरक्षण नहीं दिया जा सकता। बावजूद इसके, अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और मामला लंबित है।
कार्रवाई क्यों नहीं?
विपक्ष का आरोप है कि भाजपा नेताओं पर कार्रवाई करने में प्रशासन जानबूझकर लापरवाही बरतता है। आम नागरिक या अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़ा व्यक्ति ज़रा-सी गलती करता है तो पुलिस तुरंत गिरफ़्तारी करती है, बुलडोज़र चल पड़ते हैं। लेकिन भाजपा नेताओं के मामले में कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है।
विपक्ष और जनता की प्रतिक्रिया
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बसपा समेत कई विपक्षी दलों ने कहा है कि भाजपा नेताओं को विशेष छूट मिल रही है। उनका आरोप है कि यह माहौल जानबूझकर मुस्लिम विरोधी राजनीति तैयार करने के लिए बनाया जा रहा है। बुद्धिजीवी वर्ग का भी मानना है कि अगर ऐसे नेताओं पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होंगी और आने वाली पीढ़ियों में स्थायी नफरत पैदा होगी।
फिलहाल, विनय कटियार का बयान उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की राजनीति का गंभीर मुद्दा बन गया है। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि क्या योगी सरकार और प्रशासन इस बार भी मूकदर्शक बने रहेंगे या वास्तव में कानून के सामने सबको बराबर मानकर कार्रवाई करेंगे।
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