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लखनऊ के बालागंज में 2 जुलाई से 7 जुलाई तक जारी रहेगा, खम्स-ए- मजालिस का सिलसिला,जुलूस-ए- अज़ा का भी होगा आयोजन
लखनऊ, 30 जून। हज़रत इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) और उनके वफ़ादार साथियों पर हुए अत्याचार के विरुद्ध आवाज़ बुलंद करने तथा इंसानियत को हक़ और बातिल की पहचान कराने के उद्देश्य से हर वर्ष मुहर्रम की मजलिसों और जुलूस-ए- अज़ा का आयोजन किया जाता है। कर्बला का यह पैगाम दुनिया को बताता है कि इमाम हुसैन (अ.स.) ने अपने नाना हज़रत मुहम्मद (स.अ.व.) के दीन-ए-इस्लाम की हिफाज़त के लिए ज़ालिम और अन्यायी शासक यज़ीद की बैअत स्वीकार नहीं की। यज़ीद इस्लाम को अपनी इच्छा के अनुसार चलाना चाहता था, लेकिन इमाम हुसैन (अ.स.) ने सत्य और न्याय के मार्ग से समझौता करने के बजाय अपने परिवार और 72 वफ़ादार साथियों सहित शहादत को स्वीकार किया। कर्बला की मजलिसें, जुलूस-ए- अज़ा, ताबूत और अन्य प्रतीकात्मक मंजर उसी महान कुर्बानी की याद ताज़ा करते हैं, ताकि नई पीढ़ी जान सके कि इमाम हुसैन (अ.स.) कौन थे, कर्बला की जंग क्यों हुई और सत्य की रक्षा के लिए कैसी मिसाल पेश की गई। इसी सिलसिले में बज़्म ए अज़ाए हुसैन (अंजुमन हैदरिया) विलग्राम,जिला हरदोई वा अहले मोहल्ला पुराना तोपदरवाजा बालागंज लखनऊ की ओर से खम्स-ए-मजलिस व जुलूस-ए- अज़ा का आयोजन किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार मजलिस का सिलसिला 2 जुलाई 2026 से 7 जुलाई 2026 तक जारी रहेगा, जबकि 21 मोहर्रम 1448 हिजरी, 7 जुलाई 2026 (मंगलवार) को जुलूस-ए-अज़ा बरामद होगा। मजलिस को प्रसिद्ध ख़तीब सैय्यद फिरोज़ हुसैन जैदी साहब, सय्यद शबाब रज़ा जैदी और तालिब ज़ैदी साहब ख़िताब करेंगे। आयोजकों के अनुसार जुलूस शाम लगभग 8:30 बजे बरामद होगा तथा रात 9:00 बजे मजलिस आयोजित की जाएगी। यह आयोजन मकान संख्या 441/98, अक्ब मस्जिद, पुराना टोप खाना रोड, बरी रोड बालागंज, लखनऊ में होगा। आयोजकों ने तमाम अज़ादारान-ए-अहलेबैत से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर शोहदाए कर्बला को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करने और इमाम हुसैन (अ.स.) के पैगाम को आम करने की अपील की है।
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