HomeArticleछतर मंजिल को हेरिटेज होटल में बदलने की योजना

छतर मंजिल को हेरिटेज होटल में बदलने की योजना

ज़की भारतीय

लखनऊ की ऐतिहासिक छतर मंजिल, जो नवाबी दौर की सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत का प्रतीक है, अब एक नए स्वरूप में सामने आने की तैयारी में है। इसे हेरिटेज होटल में तब्दील करने की योजना तेजी से चल रही है, जिसका उद्देश्य न केवल इस स्मारक की ऐतिहासिक महत्ता को संरक्षित करना है, बल्कि इसे पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित करना भी है। यह परियोजना लखनऊ की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच पर ले जाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

छतर मंजिल का ऐतिहासिक महत्व

छतर मंजिल, जिसे “अम्ब्रेला पैलेस” के नाम से भी जाना जाता है, 19वीं शताब्दी में अवध के नवाबों द्वारा निर्मित एक शानदार इमारत है। गोमती नदी के किनारे स्थित इस इमारत का निर्माण नवाब गाजीउद्दीन हैदर ने शुरू करवाया था और इसे बाद में नवाब नसीरुद्दीन हैदर ने पूरा किया। इसकी अनूठी वास्तुकला, जो यूरोपीय और भारतीय शैलियों का मिश्रण है, इसे लखनऊ की सबसे खूबसूरत इमारतों में से एक बनाती है। इसका नाम छत पर बने छतरियों (गुंबदनुमा संरचनाओं) से पड़ा। यह इमारत कभी नवाबों का प्रशासनिक और आवासीय केंद्र थी और बाद में ब्रिटिश काल में भी इसका उपयोग हुआ।

हेरिटेज होटल परियोजना

हाल की खबरों के अनुसार, छतर मंजिल को हेरिटेज होटल में बदलने की योजना उत्तर प्रदेश सरकार और पुरातत्व विभाग के सहयोग से चल रही है। इस परियोजना के तहत इमारत के मूल स्वरूप और ऐतिहासिक तत्वों को संरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। होटल में नवाबी शैली के सुइट्स, रेस्तरां, और सांस्कृतिक प्रदर्शन स्थल होने की संभावना है। यह परियोजना न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय कारीगरों और कलाकारों को भी रोजगार प्रदान करेगी। लखनऊ के निवासियों का मानना है कि यह कदम शहर की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करेगा।

छतर मंजिल का ऐतिहासिक महत्व

छतर मंजिल के स्वामित्व को लेकर कुछ सवाल उठते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, यह इमारत मूल रूप से हुसैनाबाद ट्रस्ट की संपत्ति थी, जिसे अवध के नवाबों ने धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए स्थापित किया था। ट्रस्ट ने इसे संरक्षित स्मारक के रूप में बनाए रखने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के साथ समझौता किया था। इस प्रक्रिया में छतर मंजिल को संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया गया, और इसका प्रबंधन धीरे-धीरे सरकारी नियंत्रण में आ गया।हालांकि, यह सवाल बना हुआ है कि ट्रस्ट की संपत्ति होने के बावजूद इसका मालिकाना हक पूरी तरह सरकार के पास कैसे चला गया ? कुछ इतिहासकारों और स्थानीय लोगों का मानना है कि ब्रिटिश काल में और आजादी के बाद की प्रशासनिक व्यवस्थाओं के दौरान संपत्तियों के हस्तांतरण में अस्पष्टता रही। हुसैनाबाद ट्रस्ट के पास अब भी कई अन्य संपत्तियां हैं, लेकिन छतर मंजिल के मामले में सरकारी हस्तक्षेप और ASI की भूमिका ने इसे पूरी तरह सार्वजनिक नियंत्रण में ला दिया। इस मुद्दे पर स्पष्ट दस्तावेजीकरण की कमी के कारण विवाद बना हुआ है।

भविष्य की संभावनाएं

छतर मंजिल का हेरिटेज होटल के रूप में नया अवतार लखनऊ को पर्यटन के नक्शे पर और मजबूती देगा। यह परियोजना न केवल इस ऐतिहासिक इमारत को जीवंत रखेगी, बल्कि नवाबी संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी मदद करेगी। हालांकि, स्वामित्व के सवालों को हल करना और स्थानीय समुदाय को इस प्रक्रिया में शामिल करना महत्वपूर्ण होगा ताकि इस परियोजना को सभी का समर्थन मिले।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read