लखनऊ, 6 मई । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 7 मई 2025 को होने वाली सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। यह मॉक ड्रिल केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर देश के 244 जिलों में आयोजित की जा रही है, जिसमें लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के 19 जिले शामिल हैं। हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले और भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर यह अभ्यास आपातकालीन स्थितियों, विशेष रूप से हवाई हमले जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए नागरिकों और प्रशासन को तैयार करने पर केंद्रित है। 1971 के बाद यह पहला अवसर है जब इतने बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय स्तर की मॉक ड्रिल आयोजित हो रही है।लखनऊ में मॉक ड्रिल की तैयारियों का नेतृत्व सिविल डिफेंस के चीफ। वॉर्डन अमरनाथ मिश्र कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 18 डिविजन हेड्स और 1500 सिविल डिफेंस सदस्यों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। मंगलवार को पुलिस लाइन में संयुक्त अभ्यास किया गया, जिसमें हवाई हमले के सायरन, ब्लैकआउट, और निकासी योजनाओं का पूर्वाभ्यास हुआ। यह ड्रिल आम नागरिकों को सिखाएगी कि हमले की स्थिति में सुरक्षित स्थान कैसे लेना है, आग बुझानी है, और घायलों को प्राथमिक उपचार देना है।उत्तर प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि लखनऊ को बी श्रेणी में रखा गया है। यह ड्रिल सिविल प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन सेवाओं, और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल के समन्वय से होगी। इसका उद्देश्य आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ड्रिल के दौरान एयर रेड सायरन की जांच, बंकरों की सफाई, और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाएगा। मॉक ड्रिल न केवल सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों का मूल्यांकन करेगी, बल्कि स्कूल-कॉलेज के छात्रों और आम नागरिकों को भी प्रशिक्षित करेगी। नागरिकों से अपील की गई है कि वे सायरन सुनकर घबराएं नहीं और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। हालांकि, कुछ लोग इस ड्रिल को भारत-पाकिस्तान तनाव के संदर्भ में देख रहे हैं, और सोशल मीडिया पर चर्चा है कि क्या यह युद्ध की आशंका का संकेत हो सकता है। प्रशासन ने इसे केवल सावधानी और जागरूकता का कदम बताया है। यह अभ्यास लखनऊ में सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने और आपातकालीन प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।



