अंजुमन दस्त-ए-हुसैनी द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी एक भव्य मजलिस का आयोजन
लखनऊ, 20 मई । शिया समुदाय के आठवें इमाम, इमाम रजा अलैहिस्सलाम की शहादत के सिलसिले में लखनऊ में कल, 21 मई से मजलिसों और मातम का दौर शुरू हो रहा है। इस मौके पर मस्जिद लाल कोठी मंसूर नगर, लखनऊ में अंजुमन दस्त-ए-हुसैनी द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी एक भव्य मजलिस का आयोजन किया जाएगा। आयोजन 21 मई , बरोज बुध,8 बजे शब में होगा।
मजलिस का आगाज़ जनाब कारी गुलरेज नकी करेंगे ओर जबकि पेशख्वानी में युनूस अब्बास, अली हैदर और वसी मोहनी के नाम शामिल हैं। मजलिस को मौलाना ग़ुलाम हुसैन सदफ जौनपुरी साहब खिताब करेंगे।
मजलिस के बाद ताबूत बरामद होगा जो मैदान एल एच खा, टापे वाली गली होता हुआ रौजा ए काज़मैंन जाएगा।
इमाम रजा अलैहिस्सलाम, जिन्हें आठवें इमाम के रूप में जाना जाता है, का जन्म मदीना, सऊदी अरब में हुआ था। उनके पिता इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम और माता का नाम उम्मुल बनिन नजमा था। इमाम रजा अपनी जिंदगी में ज्ञान, करुणा और नेकी के प्रतीक रहे। उन्होंने इस्लाम की शिक्षाओं को फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और अपने अनुयायियों को हमेशा धैर्य और सच्चाई का रास्ता दिखाया।इमाम रजा की जिंदगी का अंत बेहद दुखद रहा। 203 हिजरी (818 ईस्वी) में, 55 वर्ष की आयु में, उन्हें ममलूक खलीफा ममून रशीद ने जहर देकर शहीद कर दिया। उनकी शहादत मशहद, ईरान में हुई, जहां आज उनकी दरगाह एक पवित्र तीर्थस्थल के रूप में मौजूद है। उनकी शहादत की याद में हर साल शिया समुदाय मजलिसों और मातम का आयोजन करता है। अंजुमन ने अक़ीदत मंदो से कसीर तादाद में शिरकत की गुजारिश की है।



