“हमारे घर बमों से तबाह हो रहे हैं, और दुनिया चुप है।”
लखनऊ,20 मई। गाजा पट्टी में इजराइली सेना ने एक नया सैन्य अभियान शुरू किया, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया। इस अभियान का उद्देश्य हमास पर बंधकों को रिहा करने का दबाव बनाना बताया गया, लेकिन इसने गाजा में बेगुनाह नागरिकों पर भारी संकट ला दिया।
दोपहर 3:00 बजे के बाद यह खबर वैश्विक मीडिया में छा गई, जिसमें इजराइल की कार्रवाइयों को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया जा रहा है।इजराइली सेना ने गाजा के घनी आबादी वाले इलाकों में हवाई हमले और जमीनी कार्रवाई शुरू की। इन हमलों में दर्जनों नागरिकों के हताहत होने की खबरें हैं, जिनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। स्थानीय अस्पतालों ने बताया कि उनके पास घायलों के इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। एक गाजा निवासी ने X पर लिखा, “हमारे घर बमों से तबाह हो रहे हैं, और दुनिया चुप है।”
इजराइल ने दावा किया कि यह कार्रवाई हमास के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए है, लेकिन मानवाधिकार संगठनों ने इसे “अनुपातहीन” और “क्रूर” करार दिया।इस बीच, अमेरिका जैसे देशों ने इजराइल का खुलकर समर्थन किया, जिसने वैश्विक स्तर पर आलोचना को जन्म दिया। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि “इजराइल को अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई का अधिकार है।” लेकिन यह समर्थन उन लाखों मासूमों की अनदेखी करता है, जो गाजा में भय और विनाश के साये में जी रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इस अभियान की निंदा की और तत्काल युद्धविराम की मांग की, लेकिन इजराइल ने इसे ठुकरा दिया।
X पर #GazaUnderAttack ट्रेंड कर रहा था, जहाँ लोगों ने इजराइली कार्रवाइयों को “नरसंहार” तक करार दिया। एक यूजर ने लिखा, “अमेरिका और उसके सहयोगी इजराइल के अत्याचारों को देखकर भी चुप हैं। क्या मासूमों का खून इतना सस्ता है?” यह स्थिति वैश्विक शक्तियों की दोहरी नीति को उजागर करती है, जो मानवता के नाम पर चुप्पी साधे हुए हैं। गाजा के लोग इस अभियान के बीच जीवित रहने की जद्दोजहद कर रहे हैं, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निष्क्रियता उनकी पीड़ा को और गहरा रही है।



