ज़की भारतीय ✍🏼
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में हाल ही में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों की गिरफ्तारी ने भारत समेत दुनिया भर में रहने वाले भारतीय समुदाय के बीच चिंता बढ़ा दी है। यूएई अधिकारियों ने क्षेत्रीय तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच सोशल मीडिया पर कथित भ्रामक, एआई निर्मित और विवादित वीडियो साझा करने के आरोप में विभिन्न देशों के 35 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें सबसे अधिक 17 भारतीय नागरिक शामिल हैं। यूएई की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘वाम’ के अनुसार इन लोगों को त्वरित सुनवाई के लिए अदालत भेजा गया है। इससे पहले भी 10 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी, जिनमें दो भारतीय शामिल थे। यूएई के अटॉर्नी जनरल डॉ. हमद सैफ अल शम्सी ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की निगरानी के दौरान ऐसे वीडियो और सामग्री सामने आई, जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्थिरता के लिए खतरा माना गया। हालांकि अब इस पूरे मामले को लेकर कई सवाल भी उठने लगे हैं।

भारत में विशेष रूप से शिया समुदाय के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या वास्तव में ये सभी लोग गंभीर अपराध में शामिल थे, या फिर क्षेत्रीय युद्ध और राजनीतिक तनाव के माहौल में सोशल मीडिया गतिविधियों को जरूरत से ज्यादा कठोर तरीके से देखा गया। दरअसल, ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के दौरान दुनिया भर में रहने वाले कई लोग सोशल मीडिया पर युद्ध से जुड़ी खबरें साझा कर रहे थे। कहीं मिसाइल हमलों के वीडियो वायरल हुए, कहीं विरोध प्रदर्शन हुए, तो कहीं लोगों ने धार्मिक और वैचारिक समर्थन में पोस्ट साझा किए। भारत और पाकिस्तान समेत कई देशों में रहने वाले शिया समुदाय के लोगों ने भी अमेरिका और इजरायल के खिलाफ विरोध दर्ज कराया और ईरान के समर्थन में भावनात्मक पोस्ट किए। यही वह बिंदु है जहां से यह बहस शुरू होती है कि क्या सोशल मीडिया पर युद्ध से जुड़ी खबरें साझा करना, किसी हमले की वीडियो क्लिप भेजना या किसी देश के समर्थन में विचार व्यक्त करना सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ अपराध माना जा सकता है? कई परिवारों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अक्सर लोग बिना किसी दुर्भावना के वायरल वीडियो अपने दोस्तों और रिश्तेदारों तक पहुंचाते हैं। कई बार उन्हें यह भी पता नहीं होता कि वीडियो वास्तविक है या संपादित। यूएई अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार लोगों को तीन समूहों में बांटा गया है। पहले समूह पर आरोप है कि उन्होंने मिसाइलों के गुजरने और उन्हें रोकने से जुड़े वीडियो प्रसारित किए तथा ऐसी टिप्पणियां जोड़ीं जिससे लोगों में डर और भ्रम पैदा हो। इस समूह में पांच भारतीय शामिल बताए गए हैं। दूसरे समूह पर आरोप है कि उन्होंने एआई तकनीक का इस्तेमाल कर नकली वीडियो बनाए या दूसरे देशों की घटनाओं को यूएई का बताकर साझा किया। इनमें विस्फोट, मिसाइल हमले और आगजनी जैसे दृश्य शामिल थे। इस समूह में भी पांच भारतीयों के शामिल होने की बात कही गई है।

तीसरे समूह पर आरोप है कि उन्होंने एक ऐसे देश के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व का समर्थन किया जिसे यूएई “शत्रुतापूर्ण” मानता है। अधिकारियों का कहना है कि इन पोस्टों से राष्ट्रीय हित प्रभावित हो सकते थे। इस समूह में भी पांच भारतीय नागरिक शामिल बताए गए हैं। लेकिन इन तमाम आरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सभी गिरफ्तार लोग वास्तव में दोषी हैं? यह फैसला अदालत को करना है। केवल आरोप लग जाना किसी व्यक्ति को अपराधी साबित नहीं करता। कई मामलों में जांच के दौरान सच्चाई अलग निकलती है। ऐसे में भारत में यह मांग उठ रही है कि गिरफ्तार भारतीयों को निष्पक्ष कानूनी सहायता मिले और उनके साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। पुराने लखनऊ सहित कई इलाकों में इन गिरफ्तारियों को लेकर बेचैनी का माहौल है। कुछ सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने चिंता जताई है कि क्षेत्रीय राजनीति और धार्मिक भावनाओं के कारण भारतीय नागरिकों को कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पुराने लखनऊ के निवासी शबीह हैदर के लापता होने की खबर ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है। परिजन लगातार संपर्क और जानकारी की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अब तक स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ सकी है। लोगों का कहना है कि भारत सरकार को इस मामले में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। विदेश मंत्रालय को यूएई सरकार से बातचीत कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी भारतीय नागरिक के साथ अन्याय न हो। यदि किसी ने कानून तोड़ा है तो निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया हो, लेकिन यदि कोई केवल भावनात्मक या अनजाने में सोशल मीडिया सामग्री साझा करने के कारण कठोर कार्रवाई का शिकार हुआ है तो उसे कानूनी सहायता और राहत मिलनी चाहिए। विशेषज्ञों का भी मानना है कि आज सोशल मीडिया का दौर बेहद संवेदनशील हो चुका है। युद्ध, मिसाइल हमले और राजनीतिक तनाव से जुड़े वीडियो कुछ ही मिनटों में दुनिया भर में फैल जाते हैं। ऐसे में आम लोग कई बार बिना पुष्टि किए सामग्री साझा कर देते हैं। इसलिए जरूरी है कि जागरूकता बढ़ाई जाए, लेकिन साथ ही मानवाधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया का संतुलन भी बना रहे। भारत के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक चुनौती बनती जा रही है। बड़ी संख्या में भारतीय यूएई और खाड़ी देशों में रोजगार के लिए रहते हैं। वहां की स्थिरता और कानूनों का सम्मान करना जितना आवश्यक है, उतना ही जरूरी यह भी है कि संकट की स्थिति में भारत अपने नागरिकों के साथ मजबूती से खड़ा दिखाई दे। अब देशभर में यह मांग तेज हो रही है कि विदेश मंत्रालय इस पूरे मामले को गंभीरता से ले, गिरफ्तार भारतीयों की वास्तविक स्थिति की जानकारी सार्वजनिक करे और जिन लोगों पर आरोप साबित नहीं हुए हैं उन्हें जल्द राहत दिलाने की दिशा में कदम उठाए। क्योंकि विदेश में रहने वाला हर भारतीय सबसे पहले भारत का नागरिक है और उसकी सुरक्षा तथा सम्मान सुनिश्चित करना भारत सरकार की जिम्मेदारी भी है और नैतिक कर्तव्य भी।



