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किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी परिसर में अतिक्रमण हटाने के दौरान विवाद,पुलिस और प्रशासनिक टीम पर पत्थराव में एक डॉक्टर घायल

लखनऊ ,26अप्रैल । लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) परिसर में अतिक्रमण हटाने के दौरान बड़ा विवाद हो गया। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान अतिक्रमणकारियों ने पथराव शुरू कर दिया, जिसमें एक डॉक्टर घायल हो गया। यह घटना सुबह 11:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे के बीच की है और नेत्र रोग विभाग के पीछे अवैध कब्जे को हटाने से जुड़ी थी। इस हंगामे ने न केवल KGMU परिसर में तनाव पैदा किया, बल्कि डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के बीच गुस्सा और हड़ताल की चेतावनी भी सामने आई है ।

घटना का विवरण

KGMU प्रशासन पिछले छह महीनों से परिसर के नेत्र रोग विभाग के पीछे अवैध रूप से कब्जाई गई जमीन को खाली करवाने की कोशिश कर रहा था। इस क्षेत्र में कई झुग्गी-झोपड़ियां और अवैध निर्माण थे, जिन्हें हटाने के लिए अतिक्रमणकारियों को बार-बार नोटिस जारी किए गए थे। 26 अप्रैल को, प्रशासन ने लखनऊ पुलिस के साथ मिलकर एक बड़ी कार्रवाई शुरू की। सुबह के समय, बुलडोजर और भारी पुलिस बल के साथ अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई।हालांकि, जैसे ही प्रशासन ने अवैध निर्माण तोड़ना शुरू किया, अतिक्रमणकारियों ने इसका विरोध किया। स्थिति तब बिगड़ गई जब कुछ लोगों ने पुलिस और प्रशासनिक टीम पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। इस पथराव में एक डॉक्टर, जो उस समय पास में मौजूद था, गंभीर रूप से घायल हो गया। डॉक्टर के सिर पर पत्थर लगने की खबर ने KGMU के मेडिकल समुदाय में तुरंत आक्रोश फैला दिया। घटना की खबर दोपहर 12:11 बजे तक सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर वायरल हो चुकी थी।

पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

पथराव शुरू होने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए KGMU परिसर में कई थानों की पुलिस बुलाई गई। भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ, प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों को तितर-बितर करने की कोशिश की। कुछ संदिग्ध पथराव करने वालों को हिरासत में लिया गया, और पुलिस ने FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की। दोपहर 1:00 बजे तक, परिसर में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में थी।लखनऊ पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी थी और नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद ही शुरू की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि पथराव करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, और घायल डॉक्टर को तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।

डॉक्टरों का गुस्सा और हड़ताल की चेतावनी 

घायल डॉक्टर को तुरंत KGMU के ही ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई। हालांकि, इस घटना ने KGMU के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के बीच भारी नाराजगी पैदा कर दी। कई डॉक्टरों ने इसे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था में कमी का परिणाम बताया। डॉक्टरों के एक समूह ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो वे हड़ताल पर जा सकते हैं। यह चेतावनी दोपहर 12:30 बजे तक सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गई।KGMU के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधि ने कहा, “यह पहली बार नहीं है जब परिसर में ऐसी घटनाएं हुई हैं। प्रशासन को सुरक्षा बढ़ानी होगी, खासकर जब ऐसी संवेदनशील कार्रवाइयां हो रही हों। हम अपने सहयोगी के साथ हुए इस हमले को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

kGMU का नेत्र रोग विभाग परिसर के एक संवेदनशील हिस्से में स्थित है, और इसके पीछे की जमीन पर कई सालों से अवैध कब्जा था। यह जमीन न केवल परिसर की सुंदरता को प्रभावित कर रही थी, बल्कि सुरक्षा और स्वच्छता के लिए भी खतरा बन चुकी थी। प्रशासन ने पिछले छह महीनों में कई बार अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए, लेकिन अधिकांश ने इसे नजरअंदाज किया।26 अप्रैल की कार्रवाई को प्रशासन ने अंतिम चरण के रूप में शुरू किया था, जिसमें बुलडोजर और भारी मशीनरी का उपयोग किया गया। हालांकि, अतिक्रमणकारियों का दावा था कि उन्हें पर्याप्त समय या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं दी गई, जिसके चलते उन्होंने हिंसक विरोध का रास्ता चुना।

KGMU में हाल के महीनों में सुरक्षा से जुड़ी कई घटनाओं में से एक है। जनवरी 2025 में, एक छात्रा की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत ने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। इसके बाद, प्रशासन ने AI-आधारित सुरक्षा प्रणाली और रात में गश्त बढ़ाने की घोषणा की थी। हालांकि, इस नवीनतम घटना ने इन उपायों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।KGMU की वाइस चांसलर प्रो. सोनिया नित्यानंद ने घटना पर दुख जताया और कहा कि घायल डॉक्टर को हर संभव सहायता दी जा रही है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि परिसर में सुरक्षा को और सख्त किया जाएगा, और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को पूरी तरह से कानूनी और व्यवस्थित ढंग से पूरा किया जाएगा

 KGMU प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया है, लेकिन यह स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई जल्द ही पूरी की जाएगी।यह घटना KGMU के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन गई है, क्योंकि यह न केवल परिसर की सुरक्षा और प्रबंधन पर सवाल उठाती है, बल्कि डॉक्टरों और स्टाफ के मनोबल को भी प्रभावित कर सकती है। यदि डॉक्टर हड़ताल पर जाते हैं, तो यह उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान की सेवाओं पर गंभीर असर डाल सकता है।

 

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