HomeArticleईरान-इजराइल संबंध में कड़वाहट और युद्ध की आशंका,भारत-पाकिस्तान तनाव और आंतरिक चुनौतियां

ईरान-इजराइल संबंध में कड़वाहट और युद्ध की आशंका,भारत-पाकिस्तान तनाव और आंतरिक चुनौतियां

ज़की भारतीय

लखनऊ, 4 मई । इजराइल में हाल ही में यरुशलम के पश्चिमी इलाकों में लगी जंगल की आग ने देश को राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में ला दिया है। 1 मई 2025 को शुरू हुई इस आग ने बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र को प्रभावित किया, जिसके लिए इजराइल की अग्निशमन और बचाव सेवाओं ने 120 दमकल टीमें और 12 विमान तैनात किए। इस आग ने न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया, बल्कि स्थानीय समुदायों को भी विस्थापित किया। कई रिहायशी इलाकों को खाली करवाया गया, और सैकड़ों लोग प्रभावित हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्म मौसम, कम बारिश, और तेज हवाओं ने इस आग को और भड़काया।यह आग ऐसे समय में लगी है, जब इजराइल पहले से ही क्षेत्रीय तनावों से जूझ रहा है। आग ने इजराइल की सैन्य और नागरिक तैयारियों पर भी सवाल उठाए हैं, क्योंकि संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा आग बुझाने में लगाया जा रहा है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थिति इजराइल की आंतरिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को उजागर करती है, खासकर तब जब वह ईरान और उसके समर्थित संगठनों जैसे हिजबुल्लाह के साथ तनाव का सामना कर रहा है। आग पर काबू पाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता की मांग भी की जा रही है, जिसमें भारत जैसे मित्र देशों से तकनीकी सहयोग की उम्मीद जताई गई है।

ईरान-इजराइल संबंध: कड़वाहट और युद्ध की आशंका

ईरान और इजराइल के बीच तनाव हाल के वर्षों में चरम पर पहुंच गया है, और 2025 में यह और गहरा गया है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजराइल पर हमले, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए, ने इस क्षेत्र में एक नया युद्ध शुरू किया। ईरान द्वारा समर्थित हमास और हिजबुल्लाह ने इजराइल के खिलाफ कई हमले किए, जिसके जवाब में इजराइल ने सीरिया और लेबनान में ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया। 1 अप्रैल 2024 को दमिश्क में ईरानी वाणिज्य दूतावास पर इजराइली हमले, जिसमें कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारी मारे गए, ने दोनों देशों के बीच सीधे संघर्ष को जन्म दिया। इसके जवाब में ईरान ने 13 अप्रैल 2024 को इजराइल पर मिसाइल हमले शुरू किए, और 1 अक्टूबर 2024 को हिजबुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह की मौत के बाद 180 से अधिक मिसाइलें दागीं।

वर्तमान में, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध की आशंका बढ़ रही है। इजराइल ने सीरिया में ईरानी हथियारों के ठिकानों को नष्ट कर दिया और अब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाने की योजना पर विचार कर रहा है। टाइम्स ऑफ इजराइल की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजराइली सैन्य अधिकारी मानते हैं कि सीरिया में बशर अल-असद सरकार के पतन और हिजबुल्लाह की कमजोरी ने ईरान को अलग-थलग कर दिया है, जिससे इजराइल को ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करने का मौका मिल सकता है।  “हालांकि, कई विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थिति मध्य पूर्व में एक बड़े युद्ध का कारण बन सकती है, जिसमें वैश्विक शक्तियां भी शामिल हो सकती हैं।भारत के लिए यह स्थिति जटिल है।

भारत के इजराइल और ईरान दोनों के साथ हैं अच्छे संबंध

भारत के इजराइल और ईरान दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं। ईरान भारत को तेल आपूर्ति करता है, और चाबहार बंदरगाह भारत के लिए सामरिक महत्व रखता है। दूसरी ओर, इजराइल भारत का प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता है। अगर युद्ध छिड़ता है, तो भारत को कूटनीतिक संतुलन बनाना होगा, जो उसकी क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिति को प्रभावित कर सकता है।

 भारत-पाकिस्तान तनाव और आंतरिक चुनौतियां

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 2025 में हुआ आतंकवादी हमला भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक नया तनाव लेकर आया। इस हमले में 26 लोग मारे गए, जिसके बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए, जिसमें सिंधु जल संधि को स्थगित करना और पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। ईरान और यूएई जैसे देशों ने भी इस हमले की निंदा की, जबकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने निष्पक्ष जांच में सहयोग की बात कही।भारत में विपक्षी दलों, जैसे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और AIMIM, ने भी सरकार से पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने पाकिस्तान और PoK पर निर्णायक कदम उठाने की अपील की। हालांकि, सरकार ने अभी तक सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक और आर्थिक रणनीतियों पर ध्यान दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई उच्चस्तरीय बैठकें कीं, जिसमें सुरक्षा और कूटनीतिक रणनीतियों पर चर्चा हुई।आंतरिक रूप से, यह हमला भारत में कट्टरपंथी हिंदू संगठनों और धार्मिक तनाव को भी हवा दे रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति देश को गृहयुद्ध की ओर ले जा सकती है। दूसरी ओर, पाकिस्तान भी आतंकवाद से जूझ रहा है। वहां मस्जिदों, इमामबाड़ों, और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बम धमाके आम हो गए हैं, जिसमें सैकड़ों लोग मारे जा रहे हैं। पाकिस्तान की जनता भी आतंकवाद से त्रस्त है, लेकिन वहां की सरकार और सेना आतंकवादी संगठनों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगा पा रही।

इजराइल में लगी आग, ईरान-इजराइल तनाव, और पहलगाम हमला विश्व की जटिल भू-राजनीतिक स्थिति को दर्शाते हैं। इजराइल की आग ने उसकी आंतरिक कमजोरियों को उजागर किया, जबकि ईरान के साथ उसका तनाव मध्य पूर्व को युद्ध की कगार पर ला सकता है। भारत, जो दोनों देशों के साथ संबंध रखता है, को इस स्थिति में सावधानी से कदम उठाने होंगे। दूसरी ओर, पहलगाम हमला भारत-पाकिस्तान संबंधों को और खराब कर रहा है, और दोनों देशों में आतंकवाद एक साझा चुनौती बना हुआ है।नरेंद्र मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह कूटनीति, सैन्य कार्रवाई, और आंतरिक एकता के बीच संतुलन बनाए। पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की मांग बढ़ रही है, लेकिन यह दोनों देशों के लिए विनाशकारी हो सकती है। इसके बजाय, आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त रणनीति और क्षेत्रीय सहयोग पर ध्यान देना अधिक प्रभावी हो सकता है। वैश्विक स्तर पर, संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी, जो फिलहाल निष्क्रिय दिख रहे हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read