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अयोध्या दौरे को लेकर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने की SIT जांच की मांग
लखनऊ, 20 जून। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर अयोध्या को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अयोध्या से जुड़े एक भ्रष्टाचार मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग उठाकर प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे दी है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है और जनता के सामने वास्तविक तथ्य आने चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल के दिनों में अयोध्या से जुड़े एक प्रकरण को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में अखिलेश यादव ने कहा कि मामले में कई ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर अभी तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को अपनी कार्यप्रणाली और तथ्यों पर विश्वास है तो उसे एसआईटी जांच से परहेज नहीं होना चाहिए। समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण तत्व है और किसी भी विवादास्पद मामले की निष्पक्ष जांच से जनता का विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में कई मामलों में तथ्यों को सामने आने से रोका जाता है, जिससे संदेह की स्थिति उत्पन्न होती है। अखिलेश यादव ने कहा कि अयोध्या जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण धार्मिक नगर से जुड़े मामलों में सरकार को और अधिक जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी समीकरणों को देखते हुए अयोध्या एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बनती दिखाई दे रही है। राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या राष्ट्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण विषय बन चुका है और यहां से जुड़ा कोई भी मुद्दा व्यापक राजनीतिक प्रभाव रखता है। ऐसे में अखिलेश यादव द्वारा एसआईटी जांच की मांग को विपक्ष की एक बड़ी राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि प्रदेश सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य कर रही है और विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से अनावश्यक विवाद पैदा कर रहा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जनता विकास कार्यों को देख रही है और विपक्ष मुद्दाविहीन होकर केवल बयानबाजी कर रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अयोध्या से जुड़े मुद्दे हमेशा से उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार का विवाद या आरोप तत्काल राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन जाता है। यही कारण है कि अखिलेश यादव के बयान को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समाजवादी पार्टी के कई नेताओं ने भी अपने अध्यक्ष की मांग का समर्थन किया है। उनका कहना है कि यदि जांच कराई जाती है तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी और जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी। वहीं भाजपा समर्थक नेताओं का कहना है कि विपक्ष बिना तथ्यों के केवल राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है। प्रदेश की जनता की निगाहें अब सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं। यदि सरकार इस मांग पर कोई निर्णय लेती है तो मामला और अधिक चर्चा में आ सकता है। फिलहाल राजनीतिक बयानबाजी का दौर जारी है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों को सही ठहराने में जुटे हुए हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक गर्मा सकता है। विपक्ष जहां इसे जवाबदेही और पारदर्शिता का प्रश्न बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक नाटक करार दे रहा है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और आगे की राजनीतिक परिस्थितियां किस दिशा में बढ़ती हैं। फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि अयोध्या से जुड़ा यह नया विवाद आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना रहेगा और इसके राजनीतिक प्रभाव दूरगामी हो सकते हैं।
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