लखनऊ, 24 अगस्त। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर क्राइम का एक नया मामला सामने आया है, जिसमें सीनियर सिटिजंस को निशाना बनाकर ठगी की गई। यह घटना आज सुबह के समय हुई । इस घटना की जानकारी x पर साझा करते हुए साइबर सेल इंडिया, फोनपे, पंजाब नेशनल बैंक, और अन्य संबंधित अधिकारियों को टैग कर कार्रवाई की मांग की। इस पोस्ट में कुछ दस्तावेजों या स्क्रीनशॉट्स के साथ ठगी की जानकारी साझा की गई, जिससे इस मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
साइबर ठगी का विवरण
सूत्रों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर, यह घटना लखनऊ के गोमती नगर क्षेत्र में हुई, जहां साइबर ठगों ने सीनियर सिटिजंस को फोन कॉल के जरिए निशाना बनाया। ठगों ने खुद को बैंक कर्मचारी या सरकारी अधिकारी बताकर पीड़ितों को उनके बैंक खातों से संबंधित फर्जी जानकारी दी। एक पीड़ित, जिनका नाम गोपनीय रखा गया है, ने बताया कि उन्हें सुबह 7:30 बजे के आसपास एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने दावा किया कि उनके बैंक खाते में संदिग्ध गतिविधियां देखी गई हैं और इसे सुरक्षित करने के लिए तुरंत कार्रवाई की जरूरत है।
कॉलर ने पीड़ित को एक फर्जी लिंक भेजा, जो कथित तौर पर उनके बैंक की आधिकारिक वेबसाइट जैसा दिखता था। इस लिंक पर क्लिक करने के बाद पीड़ित से उनका ओटीपी (वन-टाइम पासवर्ड) और बैंक खाते की जानकारी मांगी गई। जैसे ही पीड़ित ने यह जानकारी साझा की, उनके खाते से 2.5 लाख रुपये की राशि निकाल ली गई। एक अन्य पीड़ित, एक 68 वर्षीय सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी, ने बताया कि उनके साथ भी इसी तरह की ठगी हुई, जिसमें ठगों ने उनके आधार कार्ड के दुरुपयोग का डर दिखाकर 1.8 लाख रुपये की ठगी की।
साइबर ठगों ने इस मामले में इन तरीकों का किया इस्तेमाल
फर्जी कॉल्स: ठगों ने पीड़ितों को फोन कॉल के जरिए डराने की रणनीति अपनाई। वे खुद को बैंक अधिकारी, साइबर सेल कर्मचारी, या कस्टम अधिकारी बताते थे।
फिशिंग लिंक्स: पीड़ितों को फर्जी वेबसाइट्स के लिंक भेजे गए, जो असली बैंकिंग साइट्स की तरह दिखते थे। इन लिंक्स पर क्लिक करने से पीड़ितों की गोपनीय जानकारी, जैसे ओटीपी और पासवर्ड, चुरा लिए गए।
डिजिटल अरेस्ट का डर: कुछ मामलों में, ठगों ने पीड़ितों को “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी दी, जिसमें दावा किया गया कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस डर से पीड़ितों ने जल्दबाजी में जानकारी साझा कर दी।
लालच और धमकी का मिश्रण: ठगों ने कुछ पीड़ितों को रिवॉर्ड पॉइंट्स या सरकारी योजनाओं का लालच दिया, जबकि दूसरों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया।
ठगी की राशि
हालांकि सटीक आंकड़े अभी तक पुलिस द्वारा पुष्ट नहीं किए गए हैं, लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट और स्थानीय सूत्रों के आधार पर अनुमानित तौर पर इस घटना में कम से कम 5 लाख रुपये की ठगी की गई है। इसमें कई सीनियर सिटिजंस के खातों से छोटी-छोटी राशियां (50,000 रुपये से 2.5 लाख रुपये तक) निकाली गई हैं। यह राशि और बढ़ सकती है, क्योंकि पुलिस को अन्य पीड़ितों से भी शिकायतें मिल रही हैं।
पुलिस ने की कार्रवाई
लखनऊ साइबर क्राइम थाने में इस मामले की शिकायत दर्ज की गई है। साइबर क्राइम थाना प्रभारी ने बताया कि वे इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं। बैंक खातों की जांच: ठगों द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है। अब तक दो खातों को फ्रीज किया गया है, जिनमें लगभग 1.5 लाख रुपये की राशि रोकी गई है।
मोबाइल नंबर की ट्रैकिंग: कॉलर के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकाली जा रही है ताकि उनकी लोकेशन और नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
साइबर सेल की सक्रियता: साइबर सेल ने पीड़ितों से अपील की है कि वे तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
पुलिस ने यह भी बताया कि यह गिरोह संभवतः लखनऊ के बाहर से संचालित हो रहा है, और इसमें विदेशी कनेक्शन की भी संभावना है, जैसा कि जून 2025 में लखनऊ के पीजीआई थाना क्षेत्र में एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट के पर्दाफाश के दौरान देखा गया था।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
X पर इस घटना को लेकर लोगों में गुस्सा और चिंता देखी जा रही है। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, “सीनियर सिटिजंस को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? सरकार और पुलिस को सख्त कदम उठाने चाहिए।” एक अन्य यूजर ने सुझाव दिया कि बुजुर्गों को साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाए जाने चाहिए। कुछ लोगों ने इस घटना को लखनऊ में बढ़ते साइबर क्राइम के ट्रेंड से जोड़ा, जहां हाल के महीनों में डिजिटल अरेस्ट और फिशिंग जैसे मामले बढ़े हैं।
पुलिस और विशेषज्ञों की सलाह:
लखनऊ पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने जनता से सावधानियां बरतने की अपील की है:
किसी भी अनजान कॉलर को ओटीपी, बैंक खाता विवरण, या आधार कार्ड की जानकारी न दें।
फोन पर सरकारी अधिकारी बनकर कॉल करने वालों से सावधान रहें।
किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी प्रामाणिकता जांच लें।
साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
अपने बैंक खाते में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) और एसएमएस अलर्ट्स सक्रिय रखें।
निष्कर्ष
लखनऊ में सीनियर सिटिजंस को निशाना बनाने वाली यह साइबर ठगी की घटना शहर में बढ़ते डिजिटल अपराधों की गंभीरता को दर्शाती है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, और पीड़ितों को उम्मीद है कि उनकी राशि वापस मिलेगी। यह मामला उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो अनजान कॉल्स या लिंक्स पर भरोसा करते हैं। साइबर जागरूकता और त्वरित कार्रवाई ही इस तरह के अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।



