लखनऊ, 29 मई । लखनऊ के आशियाना थाने के तत्कालीन सिपाही विनोद यादव को एक दुकानदार को फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर 4,000 रुपये की रिश्वत लेने के मामले में कोर्ट ने 5 साल की कैद की सजा सुनाई है। यह फैसला लखनऊ की विशेष भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट ने सुनाया, जो पुलिसकर्मियों के बीच भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस मामले ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। घटना 2022 की है, जब विनोद यादव ने आशियाना क्षेत्र के एक दुकानदार को फर्जी चोरी के मामले में फंसाने की धमकी दी थी। दुकानदार ने पुलिस को शिकायत की, और भ्रष्टाचार निवारण इकाई ने जाल बिछाकर विनोद को रंगे हाथों पकड़ा। जांच में पाया गया कि विनोद ने कई अन्य लोगों से भी रिश्वत ली थी। कोर्ट ने सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर उसे दोषी करार दिया।विशेष कोर्ट के जज ने फैसले में कहा कि पुलिस जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति का इस तरह का आचरण समाज के लिए हानिकारक है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि भ्रष्टाचार न केवल कानून-व्यवस्था को कमजोर करता है, बल्कि आम लोगों का पुलिस पर भरोसा भी तोड़ता है। विनोद को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया, और उसे 5 साल की सजा के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया गया।स्थानीय लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन कई ने मांग की है कि पुलिस विभाग में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और सख्त कदम उठाए जाएं। लखनऊ पुलिस आयुक्त ने इस फैसले के बाद कहा कि विभाग भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त नीति अपनाएगा और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की जाएगी।इस सजा ने पुलिसकर्मियों के लिए एक चेतावनी के रूप में काम किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले भ्रष्टाचार को कम करने में मदद करेंगे, लेकिन इसके लिए नियमित निगरानी और पारदर्शिता जरूरी है।



