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बिजली विभाग के मीटर रीडर का अजब कारनामा,7 दिन में डबल बिल, 97 यूनिट का 3195 रुपया

ज़की भारतीय ✍🏼 

लखनऊ,11 मई । स्मार्ट मीटर विवाद अभी ठीक से थमा भी नहीं था कि उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार के एक और मामले ने उपभोक्ताओं में आक्रोश पैदा कर दिया है। पुराने लखनऊ के सादातगंज क्षेत्र में एक मीटर रीडर समीर पर गंभीर आरोप लगे हैं। समीर पर आरोप है कि वह मीटर रीडिंग में छेड़छाड़ कर उपभोक्ताओं को मनमाने बिल भेजता है, सील तोड़ता है और फिर घूस लेकर बिल “सेट” कर देता है। यही नहीं,ये व्यक्ति किसे के कम बिल की फोटो लेकर ,अधिक बिल वाले उपभोक्ताओं को राहत देकर इससे वसूली करता है और कभी किसी का बिल अधिक भेजकर कम करवाने के नाम पर वसूली के निरंतर खेल खेलता है। इस बार इसने सआदातगंज के कजमैन रोड पर एक गेमिंग शॉप के स्वामी को निशाना बनाने की कोशिश की है।
26 अप्रैल 2026 को दुकान स्वामी हमदान ने 25 अप्रैल का बिल ₹3392 जमा किया। बिल में रिकॉर्डेड डिमांड मात्र 1.28 kW थी और नेट बिल्ड यूनिट 331 थी। बिल जमा करने के मात्र 7 दिन बाद 2 मई 2026 को अचानक दूसरा बिल ₹3212 का आ गया। इस बिल में डिमांड को अचानक 3 kW कर दिया गया और नेट बिल्ड यूनिट 97 रखी गई।सबसे गंभीर बात यह कि मीटर की सील तोड़ी हुई पाई गई। हमदान ने तुरंत मीटर की तस्वीरें खींच लीं और शिकायत दर्ज कराई। हालांकि इस मामले की तहरीर 2 मई को जहां प्रभारी निरीक्षक कोतवाली सआदात गंज को दी गई है वहीं इस मामले की लिखित शिकायत बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों से भी की गई है।

“पहले घूस मांगी ,फिर बदला लिया”

हमदान के अनुसार, समीर नामक ये मीटर रीडर उनकी दुकान में गेम खेलने आता था। वह गेमिंग शॉप में गेम खेलता और फिर कभी कभी उधार रुपए मांगता था। हमदान उसे कभी ऑनलाइन, कभी कैश रुपए दे देता था।जब हमदान ने उसे बार बार रुपए देने से मना किया तो मीटर रीडर ने कहा, “हम मीटर रीडर हैं, आप हमें कोई काम बता दो, हम आपको समझ लेंगे।”जब हमदान ने इनकार कर दिया तो 24 अप्रैल को रीडर ने धमकी दी — “इस बार आपके यहां दो बिल आने वाले हैं। आप मुझे ₹1000 दे दो या पहले लिए पैसे एडजस्ट कर दो, तो मैं एक बिल सेट कर दूंगा। वरना दो बिल तीन तीन हजार के आएंगे।”हमदान ने सोचा कि एक महीने में दो बिल कैसे आ सकते हैं। उन्होंने मना कर दिया। रीडर नाराज होकर चला गया और बोला, “अब देख लेना अंजाम।”ठीक वैसा ही हुआ। 26 अप्रैल को ₹3392 का बिल जमा करने के बाद 2 मई को फिर ₹3212 का बिल आ गया।

बिल में घपला

पहले बिल में लोड 1.28 kW था। दूसरे बिल में अचानक 3 kW कर दिया गया। मात्र 7 दिनों में 97 यूनिट का बिल ₹3212 का भेजा गया, जबकि सामान्य गणना के अनुसार यह राशि ₹800-900 के आसपास होनी चाहिए थी। मीटर रीडर ने जानबूझकर ज्यादा यूनिट डालकर और डिमांड बढ़ाकर बिल में उलझाया। 

मीटर रीडर का धंधा

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक यह रीडर क्षेत्र में अपना गोरखधंधा चला रहा है। वह जहां चाहे कम रीडिंग दिखाता है, जहां नहीं चाहे ज्यादा बिल भेज देता है। अगर उपभोक्ता रिश्वत दे दे तो बिल “सेट” हो जाता है। नहीं दिया तो डबल-ट्रिपल बिल, बढ़ी हुई डिमांड और सील तोड़ने जैसी हरकतें शुरू हो जाती हैं।एक व्यक्ति जो बिजली विभाग की तरफ से ईमानदारी से रीडिंग लेने और बिल जमा कराने का काम करता है, वही उपभोक्ताओं को लूट रहा है। सूत्र बताते हैं कि वह दोहरा वेतन भी लेता है — एक मीटर रीडर का, दूसरा बिल जमा करने का।

उपभोक्ताओं की परेशानी

पुराने लखनऊ के सआदातगंज जैसे इलाकों में आम आदमी, महिलाएं, बुजुर्ग बिना गाड़ी के रतन स्क्वायर जैसे दूर के केंद्रों पर बिल सुधारने के लिए मजबूर होते हैं। विभाग की गलती पर भी उपभोक्ता को परेशान होना पड़ता है। इस खबर में पीड़ित के मीटर की टूटी सील, दोनों बिलों की फोटोकॉपी और रीडर की धमकी का ब्योरा दिया है। बिजली विभाग में भी 1912 हेल्पलाइन, ऑनलाइन पोर्टल और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इस मामले में धारा 138 (मीटर या सील से छेड़छाड़) ,आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) आईपीसी धारा 384 (ब्लैकमेल/धमकी देकर पैसा मांगना) आईपीसी धारा 406 और आईपीसी धारा 34 (साझा मंसूबा) के तहत मामला दर्ज हो सकता है। यही नहीं यदि विभाग के अन्य कर्मचारियों की मिलीभगत साबित होती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

विभाग पर सवाल

UPPCL प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं कि एक मीटर रीडर इतनी मनमानी कैसे कर सकता है? क्या विभाग की निगरानी पूरी तरह फेल हो गई है? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन” के सपने को ऐसे कर्मचारी चूर-चूर कर रहे हैं। पीड़ित ने अपील की है कि ऐसे भ्रष्ट तत्वों को तुरंत निलंबित किया जाए, मीटर की नई सील लगाई जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो ताकि अन्य उपभोक्ता भी राहत पा सकें।यह मामला केवल एक उपभोक्ता की शिकायत नहीं है, बल्कि पूरे बिजली विभाग में फैले भ्रष्टाचार का एक उदाहरण है। अब देखना होगा कि विभाग और पुलिस इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाती है।

 

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