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ईरान ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश क

लखनऊ,26 अप्रैल। पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर चर्चा लोगों की ज़बान पर है । इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया, और लखनऊ के बाजारों, चाय की दुकानों, और सोशल मीडिया पर लोग इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त कर रहे थे। इसी बीच, सुबह 10:00 बजे के आसपास, एक बड़ी खबर ने लखनऊ वासियों का ध्यान खींचा । ईरान ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है। यह खबर स्थानीय समाचार चैनलों और X पर तेजी से फैली, जिसने शहर में नई बहस छेड़ दी।

पहलगाम हमला और भारत-पाक तनाव

पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली, जिसे भारत पाकिस्तान समर्थित मानता है। इस हमले के बाद भारत ने सख्त कदम उठाए, जिसमें सिंधु जल संधि को निलंबित करना और पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना शामिल था। लखनऊ में लोग इस हमले को 2019 के पुलवामा हमले से जोड़कर देख रहे थे, और कईयों ने सरकार से कठोर जवाबी कार्रवाई की मांग की। इस बीच, पाकिस्तान ने भी सीमा पर निगरानी बढ़ा दी, जिससे युद्ध की आशंका और गहरा गई।

ईरान की मध्यस्थता की पेशकश

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सुबह 10:30 बजे (IST) के आसपास सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “भारत और पाकिस्तान ईरान के पड़ोसी हैं, जिनके साथ सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध हैं। हम उन्हें अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हैं।” उन्होंने तेहरान की ओर से इस्लामाबाद और नई दिल्ली में अपने दफ्तरों के जरिए दोनों देशों के बीच बेहतर समझ विकसित करने की पेशकश की।

अराघची ने 13वीं सदी के फारसी कवि सादी शिराजी की पंक्तियों का हवाला देते हुए शांति और एकता पर जोर दिया: “मानव एक पूरे के अंग हैं, एक सार और आत्मा की रचना है।”लखनऊ में इस पेशकश को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे शांति की दिशा में सकारात्मक कदम माना, जबकि अन्य ने इसे ईरान की अपनी कूटनीतिक स्थिति मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा। X पर एक यूजर ने लिखा, “ईरान की मध्यस्थता स्वागत योग्य है, शांति के लिए हर प्रयास जरूरी है।” वहीं, दूसरों ने तंज कसा, “ईरान खुद इजरायल-अमेरिका से जूझ रहा है, पहले अपना घर संभाले।

ईरान की अकेली नहीं ,सऊदी ने भी की है पेशकश

ईरान की पेशकश अकेली नहीं थी। सऊदी अरब ने भी भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को लेकर चिंता जताई और अपने विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पाकिस्तानी विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार से फोन पर बात की। यह दोनों मुस्लिम देशों की ओर से क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा गया। लखनऊ में कुछ विश्लेषकों ने इसे भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का संकेत माना, क्योंकि सऊदी अरब और ईरान जैसे देश अब इस तनाव को कम करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।ईरान की पिछली कोशिशें और लखनऊ में विश्लेषणयह पहली बार नहीं है जब ईरान ने भारत-पाक तनाव में मध्यस्थता की पेशकश की है। 2019 में पुलवामा हमले और बालाकोट हवाई हमले के बाद तत्कालीन ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने भी ऐसी पेशकश की थी। 2016 में भी ईरान ने कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की बात कही थी, बशर्ते दोनों देश सहमत हों। लखनऊ के राजनीतिक विश्लेषकों ने इस पेशकश को ईरान की उस रणनीति का हिस्सा माना, जिसके तहत वह दक्षिण एशिया में अपनी कूटनीतिक उपस्थिति बढ़ाना चाहता है, खासकर चाबहार बंदरगाह जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए, जिसमें भारत का बड़ा निवेश है।
लखनऊ में लोग इस खबर को लेकर चिंतित भी थे। पहलगाम हमले के बाद शहर में पहले से ही सुरक्षा बढ़ा दी गई थी, और सुबह गोमती नगर के वियाना होटल में ओमान के पांच नागरिकों के पकड़े जाने की खबर ने लोगों के बीच बेचैनी बढ़ा दी थी। कई निवासियों ने कहा कि अगर भारत-पाक तनाव बढ़ा, तो इसका असर उत्तर प्रदेश जैसे संवेदनशील राज्यों पर भी पड़ सकता है। एक स्थानीय व्यापारी ने कहा, “हम शांति चाहते हैं, लेकिन पाकिस्तान को सबक सिखाना भी जरूरी है। ईरान की बात सुननी चाहिए, पर भरोसा मुश्किल है।

भविष्य की संभावनाएं

ईरान की पेशकश पर भारत और पाकिस्तान की आधिकारिक प्रतिक्रिया दोपहर 2:00 बजे तक सामने नहीं आई थी। लखनऊ में विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि भारत, जो पहले भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को खारिज करता रहा है, शायद इस पेशकश को विनम्रता से ठुकरा दे। हालांकि, सऊदी अरब और ईरान जैसे देशों की सक्रियता से यह साफ है कि पहलगाम हमले का प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है।

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