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श्रीराम जन्मभूमि चढ़ावा प्रकरण में बढ़ी हलचल, जांच के घेरे में कई कर्मचारी; हाईकोर्ट में सुनवाई की तैयारी
लखनऊ/अयोध्या, 22 जून।अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला लगातार नया मोड़ ले रहा है। करोड़ों रुपये के चढ़ावे की गिनती और उसके प्रबंधन को लेकर उठे सवालों के बीच जांच का दायरा और विस्तृत कर दिया गया है। अब केवल दान पेटिकाओं की गणना प्रक्रिया ही नहीं बल्कि मंदिर से जुड़े कुछ कर्मचारियों की संपत्तियों, बैंक खातों और आर्थिक गतिविधियों की भी गहन पड़ताल की जा रही है। सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियों ने हाल के दिनों में कई कर्मचारियों से पूछताछ की है। इनमें कुछ ऐसे कर्मचारी भी शामिल हैं जिनकी हालिया संपत्ति खरीद और निर्माण कार्य जांचकर्ताओं के रडार पर हैं। बताया जा रहा है कि एक कर्मचारी द्वारा करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि खरीदने तथा दूसरे द्वारा लाखों रुपये का भूखंड लेकर उस पर मकान निर्माण कराने की जानकारी सामने आने के बाद उनके आय के स्रोतों की जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान दानराशि की गिनती व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बैंक खातों, लेनदेन और संपत्ति संबंधी दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं चढ़ावे की राशि में किसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं हुई।
सीसीटीवी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
मामले में एक नया पहलू उस समय सामने आया जब यह जानकारी मिली कि दानराशि गणना कक्ष में सीसीटीवी कैमरे लगाने के प्रस्ताव का कथित तौर पर विरोध किया गया था। करोड़ों रुपये की नगदी की गिनती होने वाले इस संवेदनशील क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था का विरोध क्यों किया गया, यह अब जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है। संगठित नेटवर्क की आशंका गहराई जांच में सामने आए अधिकांश नाम किसी न किसी रूप में चढ़ावा गणना प्रक्रिया से जुड़े बताए जा रहे हैं। इसी आधार पर जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि मामला केवल व्यक्तिगत स्तर की कथित गड़बड़ी का है या फिर इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था।
हाईकोर्ट में पहुंचा मामला
उधर, पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में दायर जनहित याचिका पर भी निगाहें टिकी हुई हैं। याचिका में सीबीआई जांच और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से विशेष ऑडिट कराने की मांग की गई है। केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, सीबीआई, सीएजी और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पक्षकार बनाया गया है।
एफआईआर नहीं होने पर उठ रहे सवाल
मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि कथित वित्तीय अनियमितताओं और संपत्ति अर्जन के आरोपों के बावजूद अब तक किसी प्रकार की औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील प्रकरण में जांच की दिशा और उसके निष्कर्षों पर पूरे देश की नजर बनी हुई है। राजनीतिक और सामाजिक संगठनों द्वारा भी मामले में पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और न्यायालय की कार्यवाही इस पूरे प्रकरण की दिशा तय कर सकती है।
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