लखनऊ, 28 मई। मणिपुर में लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक अस्थिरता के बीच बुधवार (28 मई 2025) को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सरकार बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया। बीजेपी नेता थोकचोम राधेश्याम सिंह के नेतृत्व में 10 विधायकों ने इंफाल के राजभवन में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात की और 44 विधायकों के समर्थन का दावा पेश किया। मणिपुर विधानसभा में कुल 60 सीटें हैं, और सरकार बनाने के लिए 31 विधायकों का समर्थन आवश्यक है। बीजेपी का यह दावा राज्य में राष्ट्रपति शासन को समाप्त करने और नई सरकार के गठन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
क्या है पृष्ठभूमि?
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच जातीय हिंसा के कारण अशांति का माहौल रहा है। इस हिंसा के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने फरवरी 2025 में इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है। बीजेपी के इस ताजा कदम को हिंसा के बाद स्थिरता लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या बोले बीजेपी नेता?
थोकचोम राधेश्याम सिंह ने मुलाकात के बाद कहा, “44 विधायक लोगों की इच्छा के मुताबिक सरकार बनाने के लिए तैयार हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि स्पीकर सत्यव्रत ने इन विधायकों से व्यक्तिगत और संयुक्त रूप से मुलाकात की है। हालांकि, सरकार गठन का अंतिम फैसला बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व लेगा।
कौन-कौन शामिल?
राज्यपाल से मिलने वाले 10 विधायकों में 8 बीजेपी के, 1 नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) का, और 1 निर्दलीय विधायक शामिल थे। निर्दलीय विधायक सपाम निशिकांत सिंह ने कहा, “हम एक लोकप्रिय सरकार चाहते हैं। हमने राज्यपाल को 22 विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र सौंपा है, और हमें उम्मीद है कि जल्द ही सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू होगी।
राज्यपाल की प्रतिक्रिया
राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने विधायकों की बात सुनी और आश्वासन दिया कि वह लोगों के हित में उचित कदम उठाएंगे। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार गठन की प्रक्रिया कब तक शुरू होगी।
राजनीतिक समीकरण
मणिपुर विधानसभा में बीजेपी के पास 32 विधायक हैं, जबकि सहयोगी नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के 5 और कुछ निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी है। एनपीपी, जो पहले बीजेपी की सहयोगी थी, ने नवंबर 2024 में समर्थन वापस ले लिया था। इसके बावजूद, बीजेपी का दावा है कि उनके पास बहुमत से अधिक विधायकों का समर्थन है।
मणिपुर में सरकार गठन की यह कवायद राज्य में स्थिरता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है। हालांकि, बीजेपी के भीतर गुटबाजी की खबरें भी सामने आई हैं, जहां कुछ विधायक पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह का समर्थन करते हैं, जबकि अन्य विधानसभा अध्यक्ष थोकचोम सत्यव्रत सिंह के नेतृत्व में हैं। बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व अब जल्द ही इस मामले पर फैसला ले सकता है।
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन के बीच बीजेपी का 44 विधायकों के समर्थन का दावा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है। राज्यपाल के अगले कदम और बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं। क्या मणिपुर में जल्द ही एक नई सरकार बनेगी, या यह कोशिश और जटिलताओं में उलझ जाएगी? यह देखना बाकी है।



