लखनऊ, 28 मई।मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह द्वारा भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने विशेष जांच दल (SIT) को जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय दे दिया है।
कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई और कार्रवाई के लिए जुलाई 2025 की तारीख तय की है। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब शाह के एक विवादित बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था।सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित SIT, जिसमें तीन वरिष्ठ IPS अधिकारी शामिल हैं, ने मई 2025 में अपनी प्रारंभिक स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में जमा की थी।
सूत्रों के मुताबिक, SIT ने अपनी जांच में अब तक सात गवाहों के बयान दर्ज किए हैं और इंदौर के मानपुर थाने से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की है। हालांकि, यह भी चर्चा का विषय रहा है कि जांच के दौरान विजय शाह से कोई बयान नहीं लिया गया। SIT ने कोर्ट से अतिरिक्त समय की मांग की थी, क्योंकि कुछ वीडियो फुटेज की फॉरेंसिक जांच अभी पूरी नहीं हो सकी है। भोपाल FSL में संसाधनों की कमी के कारण वीडियो विश्लेषण में देरी हुई है।सुप्रीम कोर्ट ने SIT की इस मांग को स्वीकार करते हुए जांच को और गहराई से करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। इस बीच, विजय शाह की गिरफ्तारी पर रोक बरकरार है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर कई सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोग इसे मंत्री को दी गई राहत के रूप में देख रहे हैं, जबकि अन्य का मानना है कि यह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।यह मामला 12 मई 2025 को इंदौर के रायकुंडा गांव में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ, जहां विजय शाह ने कथित तौर पर कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। इसके बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 14 मई को मानपुर थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 152, 196(1)(b), और 197(1)(c) के तहत FIR दर्ज करने का आदेश दिया। शाह ने इस FIR को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जहां उनकी माफी को कोर्ट ने “मगरमच्छ के आंसू” करार देते हुए खारिज कर दिया।
SIT की जांच और सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख इस मामले को और संवेदनशील बना रहा है। जुलाई 2025 में होने वाली अगली सुनवाई में SIT की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट कोई बड़ा फैसला सुना सकता है, जिसमें शाह के खिलाफ कार्रवाई या FIR को रद्द करने जैसे निर्देश शामिल हो सकते हैं। इस मामले पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।



