HomeArticleतथाकथित पत्रकारिता: सोशल मीडिया पर दलाली और ब्लैकमेलिंग का नया रूप

तथाकथित पत्रकारिता: सोशल मीडिया पर दलाली और ब्लैकमेलिंग का नया रूप

ज़की भारतीय ✍🏼 

लखनऊ, 4 मई। पत्रकारिता के नाम पर अवैध वसूली, ब्लैकमेलिंग, भ्रष्टाचारियों के पक्ष में खबरों की बिक्री, अपराधियों को शरीफ और शरीफ को अपराधी बताने की होड़, सब जानने के बाद भी झूठ की पैरवी करना, जिन प्रश्नों से किसी भ्रष्टाचारी को धराशाई किया जाए वो प्रश्न न पूछना और ऐसे सवाल करना जो खुद साक्षात्कार देने वाले ने आपको रटाए हों। यह आजकल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और यूट्यूब चैनल के लोगों द्वारा आम हो चुका है।किसी भी खबर को व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी सोशल मीडिया पर बनाकर लिखना और उसे तब तक इंतजार करना जब तक ऑपोजिट पार्टी इस तथाकथित पत्रकार से मिलकर इसकी जेब गर्म न कर दे। जब मामले का ऊंट किसी करवट बैठ जाता है तो इस तरह की खबरों का आना बंद हो जाता है, और किसी को यह पता भी नहीं चलता है कि इस संबंध में चलाई गई खबर का अंत क्या हुआ? दरअसल यह खबरें चलाई ही इसलिए जाती हैं ताकि विरोधी पार्टी इस खबर से डर जाए, दहल जाए और यह खबर न चले इसलिए इस खबर को मैनेज किया जाए। इस तरह की पत्रकारिता आजकल देखने को इसलिए ज्यादा मिल रही है क्योंकि ऐसे लोग न तो किसी डेली समाचार पत्रों या साप्ताहिक समाचार पत्रों में कार्यरत हैं और न ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और पोर्टल मीडिया में किसी पद पर हैं।यूट्यूब चैनल बनाना आजकल कोई बड़ी बात नहीं होती है जो भी व्यक्ति चाहे वह यूट्यूब चैनल बना ले और एक माइक ले और साथ में एक कैमरा या मोबाइल लेकर खड़ा हो जाए, बस इतना करने से ही आप जहां तथाकथित पत्रकार बन गए वहीं एक दलाली का बेहतरीन माध्यम भी तैयार हो गया। जो अपराधी पुलिस से दूर-दूर रहते हों वो अब थानों, चौकियों, कोतवालियों और कमिश्नरेट की पीसी में भौकाल के साथ बैठते हैं। यही नहीं वो नगर निगम, बिजली विभाग, लखनऊ विकास प्राधिकरण सहित अन्य विभागों में दलाली के दम पर जल्दी पैठ भी बना लेते हैं।किसी को भी हाइलाइट करने के लिए 500-1000 रुपए में बिक जाते हैं। क्योंकि ऐसे पत्रकार सुबह अपने घर से जब निकलते हैं तो शाम तक घर वापसी पर 1000 से 2000 रुपए के कमाने का लक्ष्य प्राप्त करके लौटते हैं। ऐसे तथाकथित पत्रकारों का एक डायलॉग है, “वर मरे या कन्या पंडित को दक्षिण चाहिए” जब इस मानसिकता के लोग पत्रकारिता के क्षेत्र में आएंगे तो समाज के लोगों को न्याय कहां मिलेगा? इस संबंध में सूचना विभाग को संज्ञान लेने की आवश्यकता है। इस मामले में कुछ अधिकारियों ने इन तथाकथित पत्रकारों पर सख्ती दिखाई और कई तथाकथित पत्रकारों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल की राह भी दिखाई। धन उगाही, जबरन काम का दबाव बनाने, फर्जी आईडी कार्ड रखने जैसे मामलों में कई तथाकथित पत्रकारों के विरुद्ध कार्रवाई हुई है। इन सबके बाद भी आज एक तूफान सा आया हुआ है। जो लोग यूट्यूब पर अपनी खबरें भी नहीं डालते हैं, सिर्फ और सिर्फ एक खबर बना ली और उसको सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डाल दिया या कोई इंटरव्यू की रील बनाकर फेसबुक पर लोड करके राजा भईया पत्रकार हो गए। सवाल पूछने की तमीज नहीं, सवाल समझने की जानकारी नहीं, किसी गलत को कैसे गलत साबित किया जाए, इसकी जानकारी नहीं। होटल का धंधा है बने हैं पत्रकार, पान की दुकान किए हुए हैं लेकिन हाथ में आईडी है, मोबाइल के मैकेनिक हैं पत्रकार हैं, कंप्यूटर की दुकान है, बने हैं पत्रकार। अपना नाम लिखने की तमीज नहीं है लेकिन पत्रकार हो गए। ऐसे पत्रकारों की लाइन इस वक्त बहुत बड़ी होती जा रही है। जो पत्रकारिता जैसे पवित्र पेशे को कलंकित करने से पीछे नहीं हो रहे हैं। आम लोग इन्हें पत्रकार ही समझते हैं जबकि यह पत्रकार नहीं हैं, यह पत्रकार के नाम पर एक बदनुमा धब्बा हैं। इस तरह के बहुत से मामले पुलिस द्वारा भी ऐसे यूट्यूबर्स यानी फेक पत्रकारों के खिलाफ शिकायतें की जा रही हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अब तो हद यह है कि ऐसे पत्रकार फोन करके यह कहते हैं कि आपके क्षेत्र में अवैध शराब बिक रही है, मादक पदार्थों की बिक्री हो रही है, सट्टा चल रहा है, सड़क पर दुकानें अवैध रूप से लगाई जा रही हैं, जिससे जाम हो रहा है। जरा देखिए लोगों से बात करके हमारी भी कुछ सेटिंग करवाइए। हमें भी कुछ महीना दिया करें, तो इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं। यूट्यूब चैनल बुरा नहीं है, यूट्यूब चैनल भी सेकुलर पत्रकारिता कर रहे हैं आज लोगों के लाखों और करोड़ों सब्सक्राइबर हैं लेकिन सवाल यह है कि सत्य के प्रति कौन गंभीर है? बहुत से यूट्यूबर्स सेकुलर पत्रकारिता कर रहे हैं और सत्यता परोस रहे हैं। जबकि तथाकथित पत्रकार भ्रष्टाचारियों के फायदे नजर में रखकर खबरें चलाते हैं।आजकल चार तरह के पत्रकार पत्रकारिता कर रहे हैं, एक गोदी मीडिया, एक दलाल मीडिया, एक सेकुलर/निष्पक्ष मीडिया और चौथा तथाकथित पत्रकार। ये तथाकथित पत्रकार वो हैं जो साक्षात्कार देने वालों द्वारा रटाए गए प्रश्नों को याद करके ही प्रश्न पूछते हैं। कहीं कोई भी ऐसा प्रश्न नहीं पूछते कि जिससे सामने वाले की कमियां उजागर हो। और इनकी इसी प्रक्रिया से साबित हो जाता है कि ये किस श्रेणी के पत्रकार हैं?दरअसल ये तथाकथित पत्रकार ही बिकाऊ लोग हैं जो सच और झूठ के साथ नहीं बल्कि थोड़ा सा स्वार्थ के लिए चोर को शाह और शाह को चोर साबित करने की नाकाम कोशिश करते हैं। ऐसे तथाकथित पत्रकार न तो किसी समाचार पत्र में कार्यरत हैं न सोशल मीडिया के यूट्यूब चैनल प्लेटफॉर्म पर खबर दिखाते हैं बल्कि एक क्लिप बनाई और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी और बन गए पत्रकार।

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