लखनऊ, 29 मई।लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में गोमती नगर विस्तार योजना के तहत करोड़ों रुपये के जमीन घोटाले की खबर ने शहर में हलचल मचा दी है। लखनऊ हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए एलडीए से 2020 से 2024 तक की पूरी जांच रिपोर्ट तलब की है। इस घोटाले में एलडीए के कई वरिष्ठ अधिकारियों और उनके रिश्तेदारों के नाम सामने आए हैं, जिन्होंने कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर प्लॉट आवंटन किए। इस मामले में 20 से ज्यादा अधिकारियों पर कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है।जांच में पता चला कि गोमती नगर विस्तार योजना में कई प्लॉट गलत तरीके से आवंटित किए गए। कुछ मामलों में अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्लॉट दिलवाए, जबकि कई पात्र आवेदकों को जानबूझकर दरकिनार किया गया। हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एलडीए को निर्देश दिया कि वह सभी आवंटनों की विस्तृत जांच करे और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्या इन आवंटनों में भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग की जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित की गई है।स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घोटाले को लखनऊ के विकास पर एक बड़ा धब्बा बताया है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि यह घोटाला आम लोगों के विश्वास को तोड़ता है, जो अपने सपनों का घर बनाने के लिए प्राधिकरण पर भरोसा करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुछ अधिकारियों ने न केवल प्लॉट आवंटन में गड़बड़ी की, बल्कि अवैध निर्माण को भी मंजूरी दी। हाईकोर्ट ने इस मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए समय-सीमा तय की है और अगली सुनवाई में पूरी रिपोर्ट मांगी है।एलडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस घोटाले में शामिल कुछ लोग बड़े रसूख वाले हैं, जिसके कारण जांच में देरी हो रही थी। हालांकि, हाईकोर्ट के दबाव के बाद अब जांच तेज कर दी गई है। सरकार ने भी इस मामले में सख्ती दिखाने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराते हुए कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।यह घोटाला लखनऊ के नागरिकों के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है, और लोग मांग कर रहे हैं कि दोषी अधिकारियों को न केवल निलंबित किया जाए, बल्कि उनकी संपत्ति की भी जांच हो। इस मामले ने शहर में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नई बहस छेड़ दी है।



