HomeCITYKGMU में अतिक्रमण हटाने के मामले में डॉक्टरों की भूमिका पर सवाल

KGMU में अतिक्रमण हटाने के मामले में डॉक्टरों की भूमिका पर सवाल

लखनऊ, 27 अप्रैल । किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में 26 अप्रैल को अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई के दौरान हुए पथराव और हिंसा ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस घटना में एक डॉक्टर के घायल होने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि अतिक्रमण हटाने का कार्य प्रशासन की जिम्मेदारी है या डॉक्टरों की। यदि यह प्रशासन का काम है, तो डॉक्टरों ने कानून अपने हाथ में क्यों लिया? इस मामले में कानूनी जिम्मेदारी और संभावित संशोधनों (अमेंडमेंट) की मांग भी तेज हो रही है।

26 अप्रैल को KGMU प्रशासन ने कोर्ट के आदेश के आधार पर मेडिकल कॉलेज परिसर में नेत्र विभाग के पीछे बनी मजार और दुकानों सहित अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई शुरू की। इस दौरान वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. दुर्गेश द्विवेदी और उनकी टीम मौके पर मौजूद थी। अतिक्रमणकारियों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए पुलिस, प्रशासनिक टीम, और डॉक्टरों पर पत्थरबाजी की, जिसमें डॉ. द्विवेदी घायल हो गए। इस घटना ने परिसर में तनाव पैदा कर दिया, और डॉक्टरों ने 27 अप्रैल को प्रदर्शन कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

कानूनी जिम्मेदारी: प्रशासन की या डॉक्टरों की?

भारतीय कानून के तहत, अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन, नगर निगम, और पुलिस की होती है। उत्तर प्रदेश में अतिक्रमण हटाने के लिए उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 और उत्तर प्रदेश पब्लिक प्रीमाइसेस (एविक्शन ऑफ अनऑथराइज्ड ऑक्यूपेंट्स) एक्ट, 1972 जैसे कानून लागू हैं। इनके अनुसार, अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में नोटिस जारी करना, कोर्ट के आदेश प्राप्त करना, और कार्रवाई के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन का दायित्व है।इस मामले में, KGMU प्रशासन ने दावा किया कि कार्रवाई कोर्ट के आदेश और नगर निगम के सहयोग से की गई थी। हालांकि, डॉक्टरों की मौजूदगी और उनकी सक्रिय भागीदारी ने सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टरों का कार्य चिकित्सा सेवाएं प्रदान करना है, न कि अतिक्रमण हटाने जैसी प्रशासनिक कार्रवाइयों में हिस्सा लेना। यदि डॉक्टरों ने कार्रवाई में सक्रिय भूमिका निभाई, तो यह कानून को अपने हाथ में लेने के समान हो सकता है, जो भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 441 (आपराधिक अतिक्रमण) और संबंधित कानूनों के तहत आपत्तिजनक हो सकता है।

डॉक्टरों की भूमिका पर सवाल

सूत्रों के अनुसार, KGMU के कुछ डॉक्टरों ने परिसर में अवैध कब्जे से होने वाली असुविधाओं के कारण इस कार्रवाई का समर्थन किया और मौके पर मौजूद रहे। लेकिन उनकी उपस्थिति को अतिक्रमणकारियों ने उकसावे के रूप में लिया, जिससे हिंसा भड़क गई। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टरों को ऐसी कार्रवाइयों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि इससे न केवल उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ती है, बल्कि कानूनी जटिलताएं भी बढ़ती हैं।

कानूनी संशोधन की मांग

इस घटना ने अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में स्पष्ट जिम्मेदारियों और सुरक्षा उपायों की कमी को उजागर किया है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों ने निम्नलिखित संशोधनों की मांग की है।

अतिक्रमण हटाने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश
अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में केवल प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की भूमिका हो, और गैर-प्रशासनिक व्यक्तियों (जैसे डॉक्टरों) की भागीदारी पर रोक लगे।

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