लखनऊ, 27 मई । लखनऊ विकास प्राधिकरण की बसंतकुंज योजना में अवैध कब्जे हटाने के लिए शुरू किया गया आज सुबह का अभियान पहले ही दिन धराशायी हो गया, जिसने LDA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुबह 7:00 बजे शुरू हुआ यह अभियान पुलिस सहायता के अभाव में नाकाम रहा, और स्थानीय किसानों के विरोध ने इसे और जटिल बना दिया। यह विफलता न केवल LDA की लचर योजना को उजागर करती है, बल्कि नगर निगम की अव्यवस्था और समन्वय की कमी को भी सामने लाती है।LDA ने बसंतकुंज योजना में 272 आवंटियों को प्लॉट देने की योजना बनाई थी, लेकिन अवैध कब्जों ने इस प्रक्रिया को बाधित कर दिया। सुबह के अभियान में LDA की टीमें बुलडोजर लेकर मौके पर पहुँचीं, लेकिन पुलिस बल की अनुपस्थिति ने उनकी हिम्मत पस्त कर दी। स्थानीय किसानों ने आरोप लगाया कि LDA ने उनकी ज़मीन को बिना उचित मुआवजे के अधिग्रहित किया, जिसके कारण वे कब्जा छोड़ने को तैयार नहीं हैं। एक किसान, राम प्रसाद, ने कहा, “हमारी ज़मीन छीनकर बड़े-बड़े बिल्डरों को दी जा रही है, और हमें कुछ नहीं मिल रहा।”नगर निगम की भूमिका इस मामले में और भी शर्मनाक रही। अभियान के दौरान सड़कों पर गंदगी, टूटी सड़कें, और अव्यवस्थित ट्रैफिक ने LDA की टीमों को और परेशान किया। नगर निगम ने न तो क्षेत्र की सफाई सुनिश्चित की और न ही ट्रैफिक प्रबंधन में कोई सहायता प्रदान की। स्थानीय निवासियों ने शिकायत की कि बसंतकुंज क्षेत्र में जलभराव और कूड़े का ढेर आम बात है, जिसे नगर निगम नज़रअंदाज़ करता रहा है। एक निवासी ने कहा, “LDA और नगर निगम में कोई तालमेल नहीं है। एक कब्जा हटाने की बात करता है, दूसरा सड़क-सफाई तक नहीं कर पाता।”LDA के उपाध्यक्ष ने स्वीकार किया कि पुलिस सहायता के बिना अभियान संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि अब किसानों के साथ बातचीत की जाएगी, लेकिन यह बयान उनकी नाकामी को छिपाने का प्रयास मात्र है। इस असफलता ने LDA की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि पहले भी कई अभियान बिना तैयारी के विफल हो चुके हैं। नगर निगम की लापरवाही ने इस मामले को और बिगाड़ दिया, क्योंकि क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी पहले से ही लोगों का गुस्सा भड़का रही थी।
इस घटना ने लखनऊ की प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी है, और जनता अब ठोस कार्रवाई की माँग कर रही है।



