HomeCITYलखनऊ में हजरत इमाम अली रजा (अ.स.) की शब-ए-शहादत पर मजलिस-ए-अजा और...

लखनऊ में हजरत इमाम अली रजा (अ.स.) की शब-ए-शहादत पर मजलिस-ए-अजा और मातम का आयोजन

लखनऊ, 20 मई । हर साल की तरह इस साल भी 22 ज़िकादा को हजरत इमाम अली रजा (अ.स.) की शब-ए-शहादत के मौके पर लखनऊ में विभिन्न स्थानों पर मजलिस-ए-अजा, मातम, और शबीह-ए-ताबूत के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। शहर में इमाम रजा (अ.स.) की शहादत को याद करने के लिए मोमिनीन कसीर तादात में शिरकत करेंगे। इस मौके पर मेहदीगंज और अन्य धार्मिक स्थलों मे विशेष कार्यक्रमों का आयोजन होगा, जिसमें शायरी, नौहाख्वानी, और मजलिस का सिलसिला शामिल है।

मेहदीगंज करबला में इदारा- ए – गुलदस्ता-ए-कासिम के तत्वावधान में कार्यक्रम

मेहदीगंज स्थित वक्फ करबला अजमतुद्दौला बहादर में इदारा-ए- गुलदस्ता-ए-कासिम (अ.स.) की ओर से 22 ज़िकादा की शब-ए-शहादत पर मजलिस-ए-अजा का आयोजन किया जाएगा। इस मजलिस को खतीब-ए-इंकलाब आली जनाब मौलाना सैय्यद अब्बास इरशाद नकवी साहब किब्ला खिताब फरमाएंगे। मजलिस के बाद शबीह-ए-ताबूत बरामद होगा, जो इमाम अली रजा (अ.स.) की शहादत की याद में मोमिनीन के लिए एक मार्मिक अवसर होगा। इदारा-ए-गुलदस्ता-ए-कासिम ने सभी मोमिनीन से कसीर तादात में शिरकत की गुजारिश की है। साथ ही, मोमिनीन के लिए नजर-ए-मौला का इंतजाम भी किया गया है। यह कार्यक्रम मेहदीगंज करबला में रात 8 बजे से शुरू होगा।

शायर ए अहलेबैत नय्यर मजीदी के अजाखाने में होगा 21 मई को मुसालमा 

अन्य इबादत गाहों में भी इमाम अली रजा (अ.स.) की शहादत को याद करने के लिए विशेष कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहेगा।शायर ए अहलेबैत नय्यर मजीदी के अजाखाने में 22 ज़िकादा मुताबिक़ 21 मई 2025 की शाम 8 बजे एक मुसालमा आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर लखनऊ के मशहूर शायर अपनी शायरी के जरिए अपने इमाम को नजराना-ए-अकीदत पेश करेंगे। मजलिस को मौलाना मुत्तकी ज़ैदी साहब खिताब करेंगे। इस कार्यक्रम में भी मोमिनीन से भारी संख्या में शामिल होने की अपील की गई है।

लखनऊ में ग़म का माहौल

लखनऊ में इमाम अली रजा (अ.स.) की शहादत की याद में विभिन्न स्थानों पर मजलिसों और मातम का माहौल है। जहां मेहदीगंज में इदारा-ए-गुलदस्ता-ए-कासिम के तत्वावधान में करबला में कार्यक्रम आयोजित हो रहा है, वहीं कई विभिन्न इबादत गांहों में शायरी और मजलिस के जरिए इमाम की शहादत का जिक्र किया जाएगा। हजरत इमाम अली रजा (अ.स.) की शहादत इस्लामी तारीख का एक बड़ा खसारा मानी जाती है, और उनकी याद में आयोजित ये कार्यक्रम मोमिनीन के लिए इमाम से अपनी अकीदत जाहिर करने का एक महत्वपूर्ण अवसर हैं।

इमाम अली रजा (अ.स.) की शहादत का महत्व

हजरत इमाम अली रजा (अ.स.), जो सुलतान-ए-खुरासान के नाम से मशहूर हैं, इस्लाम के आठवें इमाम हैं। उनकी शहादत 22 ज़िकादा को हुई, जिसे दुनिया भर के शिया मुसलमान गम और इबादत के साथ याद करते हैं। लखनऊ, जो अपनी गंगा-जमुनी तहजीब और अजादारी की परंपराओं के लिए जाना जाता है, इन आयोजनों का विशेष महत्व है।

आयोजित होने वाली मजलिसें और शबीह-ए-ताबूत के जुलूस न केवल इमाम की शहादत को याद करने का जरिया हैं, बल्कि यह मोमिनीन को उनके पैगाम और शिक्षाओं पर अमल करने की प्रेरणा भी देते हैं।

आमंत्रण और अपील

इदारा-ए-गुलदस्ता-ए-कासिम (मेहदीगंज, लखनऊ) और अन्य आयोजकों ने सभी मोमिनीन से अपील की है कि वे इन मजलिसों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। मेहदीगंज में आयोजित होने वाली मजलिस और शबीह-ए-ताबूत का कार्यक्रम इदारा-ए-गुलदस्ता-ए-कासिम के तत्वावधान में होगा ।मोमिनीन के लिए नजर-ए-मौला और अन्य इंतजामात किए गए हैं।लखनऊ की यह परंपरा न केवल धार्मिक एकता को दर्शाती है, बल्कि इमाम अली रजा (अ.स.) के पैगाम को जन-जन तक पहुंचाने का एक जरिया भी है।
सभी मोमिनीन से गुजारिश है कि वे 22 ज़िकादा की रात को इन कार्यक्रमों में शिरकत करें और इमाम की शहादत को गम के साथ याद करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read