लखनऊ, 9 अक्टूबर । दो साल पहले, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले ने मध्य पूर्व को आग के गोले में बदल दिया था। इजरायल की जवाबी कार्रवाई ने गाजा पट्टी को तबाही के कगार पर ला खड़ा किया, जहां हजारों निर्दोष जानें गईं, लाखों बेघर हुए और मानवीय संकट चरम पर पहुंच गया। लेकिन आज, 9 अक्टूबर 2025 को, इतिहास एक नया मोड़ ले रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में मध्यस्थता से इजरायल और हमास के बीच पहले चरण का युद्धविराम समझौता हो गया है। इजरायली कैबिनेट की बैठक के 24 घंटे के अंदर गाजा में गोलीबारी रुक जाएगी, बंधकों की अदला-बदली शुरू होगी और मानवीय सहायता का द्वार खुल जाएगा। लखनऊ की सड़कों पर फिलिस्तीनी समुदाय ने जश्न मनाया, जो इस वैश्विक खुशी का प्रतीक बन गया।
यह समझौता ट्रंप के 20-सूत्री ‘गाजा पीस प्लान’ का हिस्सा है, जो शर्म अल-शेख (मिस्र) में बुधवार को हस्ताक्षरित हुआ। पहले चरण में इजरायली सेना गाजा के 53 प्रतिशत हिस्से से पीछे हटेगी, हमास 48 बंधकों (जिनमें 20 जीवित) को रिहा करेगा, बदले में इजरायल 369 फिलिस्तीनी कैदियों को आजाद करेगा। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे ‘रक्तपात का अंत’ बताते हुए फिलिस्तीन की स्व-निर्णय की राह बताया। लेकिन यह शांति रातोंरात नहीं आई; यह दर्दनाक इतिहास की देन है।
पुराना इतिहास: 2023 की आग से 2025 की उम्मीद तक
गाजा संघर्ष की जड़ें 1948 के अरब-इजरायल युद्ध में हैं, जब इजरायल की स्थापना के बाद फिलिस्तीनी भूमि पर विवाद पैदा हुआ। 1967 के छह दिवसीय युद्ध ने गाजा को इजरायली कब्जे में डाल दिया, लेकिन 2005 में इजरायल ने एकतरफा वापसी की। हमास ने 2007 में सत्ता हथिया ली, जिसके बाद इजरायल की नाकाबंदी ने गाजा को ‘बड़ी जेल’ बना दिया। 2014 और 2021 के संघर्षों ने हिंसा को बढ़ावा दिया, लेकिन 7 अक्टूबर 2023 का हमास हमला – जिसमें 1,200 इजरायली मारे गए और 250 बंधक बनाए गए – ने युद्ध को अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दिया।
इजरायल की जवाबी कार्रवाई में 64,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए, गाजा के 80 प्रतिशत हिस्से तबाह हो गए। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2.3 मिलियन आबादी का 90 प्रतिशत विस्थापित हुआ, भुखमरी और बीमारियां फैलीं। 2024 में दो अस्थायी युद्धविराम हुए – नवंबर 2023 और जनवरी 2025 – लेकिन दोनों टूट गए। जनवरी 2025 का समझौता आठ चरणों की अदला-बदली पर आधारित था, जो मार्च तक चला, लेकिन इजरायली हवाई हमलों ने इसे तोड़ दिया। इन असफलताओं ने दुनिया को झकझोर दिया। अमेरिका, कतर, मिस्र और तुर्की की कूटनीति ने ट्रंप को मैदान में उतारा, जिन्होंने सितंबर 2025 में 20-सूत्री योजना पेश की: हमास का निरस्त्रीकरण, इजरायली वापसी, पुनर्निर्माण और फिलिस्तीनी शासन।
ट्रंप की योजना ने इजरायल पर दबाव डाला, जहां प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को आंतरिक विरोध झेलना पड़ा। हमास ने सशर्त सहमति दी, लेकिन नेतन्याहू ने इसे ‘महान दिन’ कहा। भारत ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूटनीति पर जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र महासभा में जून 2025 का प्रस्ताव (149 वोटों से पारित) तत्काल युद्धविराम की मांग करता रहा, लेकिन भारत ने तटस्थता अपनाई।
कैसे हुई शांति? दबाव और कूटनीति का कमाल
शांति की राह कठिन थी। 2025 की शुरुआत में गाजा में हवाई हमलों से 59 मौतें हुईं, जिसने बंधक परिवारों को सड़कों पर उतार दिया। ट्रंप ने मध्यस्थों (मिस्र, कतर) को निर्देश दिए: हमास को बंधक रिहाई का लालच, इजरायल को हमास के बिना गाजा का वादा। तुर्की ने चरमपंथी समूहों पर दबाव डाला, जबकि यूएई और जॉर्डन ने मानवीय सहायता का वादा किया। 3 अक्टूबर को हमास ने सशर्त स्वीकृति दी, 8 अक्टूबर को शर्म अल-शेख में अंतिम वार्ता हुई। ट्रंप ने कहा, “यह सौदा काम करेगा अगर हमास पालन करे।” इजरायल ने 60-दिन के युद्धविराम को स्वीकार किया, लेकिन हमास का निरस्त्रीकरण विवादास्पद रहा।
खुशियों का माहौल: गाजा से लखनऊ तक जश्न
समझौते की खबर ने गाजा और इजरायल में खुशी की लहर दौड़ा दी। खान यूनिस में फिलिस्तीनी सड़कों पर उतर आए, डबके नृत्य और कविताओं से जश्न मनाया। तेल अवीव के ‘होस्टेज स्क्वायर’ में परिवारों ने आंसू बहाए। लेकिन लखनऊ में यह खुशी खास थी। हजरतगंज और अमीनाबाद में फिलिस्तीनी मूल के निवासियों ने मस्जिदों के बाहर जुलूस निकाला। “शुरूआत 9 अक्टूबर से ही होनी चाहिए थी,” कहा सादिक अली ने, जो फेसबुक पोस्ट में ट्रंप को नोबेल पुरस्कार का हकदार बता रहे थे। लैक आघा जैसे युवा, जो इंदौर यात्रा पर थे, ने वीडियो शेयर कर कहा, “लखनऊ से गाजा तक शांति की दुआ।”
लखनऊ की यह खुशी इसलिए खास क्योंकि शहर में बड़ी फिलिस्तीनी डायस्पोरा है। 9 अक्टूबर को नादवा ग्राउंड पर शांति सभा हुई, जहां वक्ताओं ने कहा, “यह युद्धविराम लखनऊ की तरह जोड़ देगा – विविधता में एकता।” सोशल मीडिया पर #GazaCeasefire ट्रेंड कर रहा, जहां लखनऊवासी वायरल वीडियो शेयर कर रहे। इतिहास की माने तो हमास के ‘अंतिम क्षण’ खेल समझौते तोड़ सकते हैं।
इजरायल पर दबाव किसने डाला?
इजरायल पर दबाव ट्रंप ने डाला, जिन्होंने कहा, “मैं मध्य पूर्व जाऊंगा अगर जरूरी हो।” लेकिन यूएन, यूरोपीय संघ और अरब देशों ने भी भूमिका निभाई। बाइडेन प्रशासन के बाद ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति ने इजरायल को चेतावनी दी: “युद्ध न रुका तो नीति बदलेगी।” फिलिस्तीनी प्राधिकरण के महमूद अब्बास ने इसे ‘फिलिस्तीन की संप्रभुता’ का कदम कहा। भारत ने कूटनीति से समर्थन दिया, जो वैश्विक शांति में योगदान है। यह युद्धविराम न केवल गाजा, बल्कि पूरी दुनिया के लिए संदेश है। लखनऊ से उठी यह खुशी साबित करती है कि शांति सीमाओं लांघती है। आशा है, 9 अक्टूबर 2025 इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बनेगा



