लखनऊ, 30 जुलाई । लखनऊ पुलिस ने आज सुबह एक बड़े साइबर अपराध रैकेट का पर्दाफाश करते हुए अंतरराज्यीय ऑनलाइन सट्टेबाजी गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई आशियाना थाना क्षेत्र में की गई, जब पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि ‘लोटस गेमिंग साइट’ के जरिए एक संगठित गिरोह लोगों को ठग रहा है। पुलिस ने छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकदी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं।
जानकारी के मुताबिक लखनऊ पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि आशियाना इलाके में एक किराए के मकान में कुछ संदिग्ध लोग ऑनलाइन सट्टेबाजी के जरिए अवैध गतिविधियाँ चला रहे हैं। इस सूचना के आधार पर आशियाना थाना पुलिस और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त टीम ने सुबह एक मकान में छापेमारी की। इस कार्रवाई में पुलिस ने तीन शातिर साइबर अपराधियों को हिरासत में लिया, जिनकी पहचान रमेश कुमार (32, छत्तीसगढ़), साजिद अली (28, गुजरात), और अंशुल शर्मा (27, उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। इनके पास से 50 लाख रुपये नकद, दो लैपटॉप, 15 मोबाइल फोन, 20 एटीएम कार्ड, 10 पासबुक, 5 चेकबुक, और 3 फर्जी आधार कार्ड बरामद किए गए।
लखनऊ पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह गिरोह ‘लोटस गेमिंग साइट’ नामक एक फर्जी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को सट्टेबाजी में शामिल होने का लालच देता था। यह गिरोह टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करके लोगों को अपने जाल में फंसाता था। गिरोह के सदस्य पहले लोगों को ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी में भारी मुनाफे का झांसा देते थे। इसके बाद, पीड़ितों से जमा की गई रकम को किराए पर लिए गए बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था, जिसे बाद में एटीएम के जरिए नकद निकाला जाता था। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, और गुजरात के अलावा अन्य राज्यों तक फैला हुआ था। पुलिस की प्रारंभिक जाँच में पता चला कि गिरोह का मास्टरमाइंड, जिसका नाम अभी तक उजागर नहीं किया गया है, विदेश में बैठकर इस पूरे ऑपरेशन को संचालित कर रहा था। वह टेलीग्राम के जरिए निर्देश देता था और ठगी की रकम को हवाला के माध्यम से विदेश भेजता था। गिरोह ने फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों का उपयोग करके सैकड़ों बैंक खाते खोले थे, जिनका इस्तेमाल अवैध लेनदेन के लिए किया जाता था। स्थानीय लोगों को कुछ पैसे का लालच देकर उनके बैंक खाते किराए पर लिए जाते थे, जिससे पुलिस की नजर में आने से बचा जा सके। पुलिस ने बताया कि गिरोह के सदस्य पिछले छह महीनों से लखनऊ में किराए के मकान में रह रहे थे और खुद को छात्र या छोटे-मोटे व्यवसायी बताकर अपनी पहचान छिपा रहे थे। स्थानीय लोगों को इनके संदिग्ध व्यवहार और लगातार बदलते मोबाइल फोनों पर शक हुआ, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। इस सूचना के आधार पर साइबर सेल ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए इनकी गतिविधियों पर नजर रखी और आज सुबह छापेमारी की।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि इस गिरोह ने अब तक अनुमानित रूप से 50 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है। बरामद उपकरणों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जाँच शुरू कर दी गई है, ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क का पता लगाया जा सके। पुलिस ने उन बैंक खातों को सीज कर दिया है, जिनका उपयोग इस ठगी में किया गया था, और संबंधित बैंकों से खातों का ब्योरा माँगा गया है। इसके अलावा, साइबर सेल अब उन मोबाइल नंबरों और टेलीग्राम ग्रुप्स की जाँच कर रही है, जिनके जरिए यह गिरोह लोगों से संपर्क करता था। पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी ऑनलाइन गेमिंग या सट्टेबाजी के लालच में न आएँ और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत सूचना पुलिस को दें। इस कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम को एक लाख रुपये के इनाम की घोषणा की गई है।



