लखनऊ, 12 जून । ईद-ए-ग़दीर, जिसे इस्लाम में ईद-ए-अकबर (सबसे बड़ी ईद) के रूप में जाना जाता है, का जश्न लखनऊ में पूरे धूमधाम और आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा। यह पवित्र अवसर पैगंबर हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही व सल्लम द्वारा ग़दीर-ए-ख़ुम के मैदान में हजरत अली अलैहिस्सलाम को ईश्वरीय आदेश के तहत अपना उत्तराधिकारी (जानशीन) नियुक्त करने की याद में मनाया जाता है। इस ऐतिहासिक घटना में पैगंबर ने लाखों हाजियों के बीच हजरत अली को दोनों हाथों पर उठाकर घोषणा की, “जिसका मैं मौला, उसका अली मौला।” इस ऐलान का अर्थ था कि पैगंबर जिनके नेता हैं, उनके लिए हजरत अली भी नेता हैं।इस घोषणा के बाद उस समय शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति रहा हो जिसने हजरत अली की विलायत (नेतृत्व) का इनकार किया। सभी ने हजरत अली को पैगंबर का उत्तराधिकारी स्वीकार करते हुए मुबारकबाद दी। हालांकि, समय के साथ कुछ लोग इस घोषणा के असल अर्थ से मुकर गए और ‘मौला’ शब्द को केवल ‘दोस्त’ के अर्थ तक सीमित कर दिया। इसी विलायत की बका के कारण इमाम हुसैन ने यज़ीद की गलत शर्तों पर समझौता करने से इनकार किया, क्योंकि वे जानते थे कि यह इस्लाम के सिद्धांतों और हजरत अली की विलायत के खिलाफ है। अपनी शहादत के माध्यम से उन्होंने हजरत अली की विलायत और पैगंबर के दीन की रक्षा की। यही कारण है कि ईद-ए-ग़दीर को इस्लाम में सबसे महत्वपूर्ण ईद माना जाता है।लखनऊ में इस अवसर पर 14 जून 2025 से ऑल इंडिया जश्न-ए-ग़दीर का भव्य आयोजन शुरू हो रहा है। यह जश्न ग़दीर अकादमी, काज़मैन रोड, लखनऊ में रात 9 बजे से शुरू होगा। जबकि 14 जून को सुबह इस मौके पर नमाज़-ए-ग़दीर अदा की जाएगी, जो लखनऊ की 110 मस्जिदों में पढ़ी जाएगी।
विशेष रूप से मस्जिद-ए-कूफा, काज़मैन रोड पर नमाज़-ए-जमाअत का आयोजन होगा।
जश्न के कन्वीनर जनाब एजाज़ ज़ैदी साहब ने बताया कि इस महफिल में देशभर के प्रख्यात शायर, विद्वान और धर्मगुरु हिस्सा लेंगे। महफिल की सदारत जनाब शेर अली साहब, सेक्रेटरी शिया पर्सनल लॉ बोर्ड, मुंबई करेंगे। मेहमान-ए-खुसूसी के रूप में जनाब सैयद मुजाहिद हुसैन नकवी साहब, अध्यक्ष इमाम-ए-सज्जाद वेलफेयर सोसाइटी और अध्यक्ष करबला कमेटी, सिविल लाइंस, बाराबंकी उपस्थित रहेंगे। महफिल की इब्तिदाई तकरीर मौलाना यासूब अब्बास साहब करेंगे और महफिल ए फ़ज़ाएल को मौलाना मीसम ज़ैदी साहब संबोधित करेंगे। निज़ामत के फ़राएज़ जनाब नय्यर मजीदी साहब अंजाम देंगे, जबकि महफिल का आग़ाज़ क़ारी नदीम नजफी पवित्र ग्रंथ कुरआन के श्लोको से करेंगे।
इस महफिल में शिरकत करने वाले मक़ामी शायरों में जनाब हसन फ़राज़ फिदवी नक़वी, जनाब फरीद मुस्तफा, जनाब ज़की भारती, शमूम आरफी,जनाब खुशनुद मुस्तफा, जनाब तय्यब अब्बास, जनाब सरवर दबीरी, जनाब फुरकान लखनवी, जनाब अंबर नक़वी, जनाब फैज़ान जाफर के नाम शामिल हैं।
जबकि बेरुनी शोअरा में जनाब बेताब हल्लौरी, जनाब फखरी मेरठी, जनाब गौहर सुल्तानपुरी, जनाब चंदन फैज़ाबादी, जनाब फैय्याज़ रायबरेलवी, जनाब वकार सुल्तानपुरी, जनाब इफहाम उतरौलवी, जनाब फरहान बनारसी और जनाब जुगनू औरंगाबादी शामिल हैं।
जश्न के कन्वीनर जनाब एजाज़ ज़ैदी साहब ने बताया कि जश्न की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बेरुनी शोअराए कराम ने आयोजन में शामिल होने की सहमति दे दी है। महफिल में कुरआंदाज़ी के ज़रिए पुरस्कार वितरित किए जाएंगे, जिनमें फ्रिज, वाशिंग मशीन, मिक्सर ग्राइंडर, सीलिंग फैन, प्रेस आदि शामिल हैं।आयोजकों ने लखनऊ के तमाम मोमिनीन से अपील की है कि वे इस महफिल में अधिक से अधिक संख्या में शिरकत करें और इस पवित्र अवसर को उत्साह के साथ मनाएं। यह जश्न न केवल हजरत अली की विलायत का उत्सव है, बल्कि एकता, भाईचारे और इस्लाम के सच्चे मूल्यों को बढ़ावा देने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर है।



