लखनऊ, 30 मई । भारतीय वायुसेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने रक्षा सौदों और परियोजनाओं में हो रही देरी को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया है। एक उच्चस्तरीय बैठक में, जहाँ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद थे, वायुसेना प्रमुख ने खुलकर कहा, “समयसीमा एक बड़ा मुद्दा है। एक भी रक्षा परियोजना समय पर पूरी नहीं हुई। हमें ऐसे वादे नहीं करने चाहिए, जो पूरे न हो सकें।” यह बयान हाल ही में भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद आया है, जिसने देश की रक्षा तैयारियों को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
वायुसेना प्रमुख की यह नाराजगी उस समय सामने आई, जब देश की सुरक्षा चुनौतियाँ चरम पर हैं। हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई ने दुनिया का ध्यान खींचा। लेकिन वायुसेना प्रमुख का कहना है कि रक्षा उपकरणों की आपूर्ति में देरी सशस्त्र बलों की ताकत को कमजोर कर रही है। लड़ाकू विमानों, मिसाइल सिस्टम, और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों की डिलीवरी में देरी ने सेना की युद्धक क्षमता पर सवाल उठाए हैं।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 55 में से 23 परियोजनाएँ समय पर पूरी नहीं हो सकीं। इसका कारण तकनीकी जटिलताएँ, पूंजीगत उपकरणों की बढ़ती कीमतें, और बार-बार बदलती गुणात्मक आवश्यकताएँ हैं। स्टैंडिंग कमिटी ऑन डिफेंस ने भी इस पर चिंता जताई और सुझाव दिया कि परियोजनाओं की समीक्षा प्रक्रिया को और सख्त करना होगा।
वायुसेना प्रमुख का साहसिक बयान
एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा, “जब देश युद्धरत होता है, तो यह सिर्फ सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं है। हर स्तर पर समयबद्धता जरूरी है।” उनका यह बयान न केवल रक्षा मंत्रालय बल्कि नौकरशाही और रक्षा उद्योगों के लिए भी एक चेतावनी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर भारत को वैश्विक स्तर पर रक्षा क्षेत्र में अग्रणी बनना है, तो स्वदेशीकरण और समयबद्ध डिलीवरी पर ध्यान देना होगा।प्रतिक्रिया और प्रभाव
सोशल मीडिया पर इस बयान ने तीव्र प्रतिक्रियाएँ उकसाई हैं। कुछ लोग वायुसेना प्रमुख की निष्पक्षता और साहस की तारीफ कर रहे हैं, तो कुछ इसे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल मान रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “यह सिर्फ कागजी देरी नहीं, बल्कि हमारे जवानों का मनोबल तोड़ने वाली लापरवाही है।” इस बीच, सरकार ने इस मुद्दे पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि रक्षा मंत्रालय जल्द ही एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुला सकता है।
वायुसेना प्रमुख का यह बयान रक्षा क्षेत्र में सुधारों की तत्काल जरूरत को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए न केवल बजट बढ़ाना होगा, बल्कि निजी क्षेत्र और डीआरडीओ के बीच बेहतर तालमेल भी जरूरी है। क्या यह बयान सरकार को जगा पाएगा, या यह सिर्फ एक और सुर्खी बनकर रह जाएगा? यह देखना बाकी है।



