लखनऊ, 21 सितंबर । संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गाजा में तत्काल, बिना शर्त और स्थायी युद्धविराम की मांग वाले प्रस्ताव पर वोटिंग हुई। इस प्रस्ताव को 15 में से 14 सदस्य देशों का समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने अपने वीटो अधिकार का उपयोग कर इसे रोक दिया। यह प्रस्ताव गाजा में गहराते मानवीय संकट को देखते हुए लाया गया था, जिसमें इजरायल से 21 लाख फिलिस्तीनियों के लिए मानवीय सहायता पर लगे प्रतिबंध हटाने और सभी बंधकों की रिहाई की मांग की गई थी। यह छठी बार है जब अमेरिका ने गाजा युद्ध, जो 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुआ, से संबंधित युद्धविराम प्रस्ताव को वीटो किया है। उस हमले में 1200 इजरायली मारे गए थे और 250 लोग बंधक बनाए गए थे, जिनमें से 48 अभी भी हमास के कब्जे में हैं।
अमेरिका की कार्यवाहक राजदूत मॉर्गन ऑर्टागस ने वीटो का बचाव करते हुए कहा कि प्रस्ताव में हमास की पर्याप्त निंदा नहीं की गई और यह इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार को मान्यता नहीं देता।
चीन के राजदूत फू कांग ने अमेरिका की कड़ी निंदा की
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यह प्रस्ताव अमेरिका के नेतृत्व में चल रही युद्धविराम वार्ताओं को कमजोर करता है। दूसरी ओर, चीन के राजदूत फू कांग ने अमेरिका के इस कदम की कड़ी निंदा की और कहा कि यह वीटो गाजा के 21 लाख लोगों की उम्मीदों को कुचलता है, उन्हें भुखमरी, बमबारी और निराशा के बीच छोड़ देता है। फू ने तीन सवाल उठाए: “गाजा में युद्धविराम से पहले और कितने निर्दोष लोग मरेंगे? अमेरिका का वीटो अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आवाज को कब तक दबाएगा? और क्या यह शांति की दिशा में बाधा नहीं है?”
ब्रिटेन की राजदूत बारबरा वुडवर्ड ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट देते हुए कहा कि गाजा की स्थिति असहनीय है और इजरायल का सहायता पर प्रतिबंध अनुचित है। अल्जीरिया के राजदूत अमर बेंडजामा ने इसे पूरी दुनिया की सामूहिक इच्छा बताया, जो फिलिस्तीनियों के लिए एक संदेश था कि वे अकेले नहीं हैं। पाकिस्तान के राजदूत असीम इफ्तिखार अहमद ने इसे सुरक्षा परिषद के इतिहास में एक दुखद दिन बताया, जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजरायली हमलों में अब तक 65,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें ज्यादातर महिलाएँ और बच्चे हैं।
क्या है वीटो ?
वीटो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों—अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस—को दिया गया विशेष अधिकार है। इसके तहत कोई भी स्थायी सदस्य किसी प्रस्ताव को अस्वीकार कर सकता है, भले ही अन्य सभी सदस्य इसके पक्ष में हों। यह शक्ति संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 27 के तहत दी गई है। वीटो का उपयोग अक्सर भू-राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, गाजा मामले में अमेरिका ने इजरायल का समर्थन करने के लिए बार-बार वीटो का उपयोग किया है, जिसकी वैश्विक स्तर पर आलोचना हो रही है। इसका मतलब है कि कोई भी प्रस्ताव तब तक पारित नहीं हो सकता जब तक सभी स्थायी सदस्य सहमत न हों या कोई वीटो न करे। यह प्रणाली बड़े देशों को वैश्विक निर्णयों पर नियंत्रण देती है, लेकिन इसे अक्सर छोटे देशों के खिलाफ पक्षपातपूर्ण माना जाता है।
18 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने अपने ऐतिहासिक रुख को दोहराते हुए फिलिस्तीन के पक्ष में वोट किया। भारत का मानना है कि मध्य पूर्व में शांति के लिए दो-राष्ट्र समाधान आवश्यक है, जिसमें फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा मिले। ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में इजरायल को 6 अरब डॉलर की सैन्य सहायता, जिसमें 30 अपाचे हेलीकॉप्टर और 3,250 पैदल सेना वाहन शामिल हैं, के लिए कांग्रेस से मंजूरी मांगी है। इस कदम का भारत सहित कई देशों में विरोध हो रहा है। लखनऊ में विदेश नीति के जानकारों ने इस वीटो को भारत की शांति की अपील के खिलाफ एक झटका बताया। स्थानीय विश्वविद्यालयों और थिंक टैंकों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि गाजा में मानवीय संकट वैश्विक ध्यान का केंद्र बना हुआ है। यह खबर देर रात 20 सितंबर को सामने आई और आज दोपहर तक वैश्विक प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।



