HomeUTTAR PRADESHअब परेड घुला देगी पुलिस कर्मचारियों के शरीर पर चढ़ी हुई चर्बी

अब परेड घुला देगी पुलिस कर्मचारियों के शरीर पर चढ़ी हुई चर्बी

 

लखनऊ, 27 मई ।उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) प्रशांत कुमार ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों में अनुशासनहीनता और शारीरिक अक्षमता को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने पुलिस बल की परेड में अनुपस्थिति को न केवल अनुशासन का उल्लंघन बताया, बल्कि इसे पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव से भी जोड़ा। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि नियमित परेड न करने से पुलिसकर्मियों की शारीरिक फिटनेस प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर कानून व्यवस्था बनाए रखने की उनकी क्षमता पर पड़ रहा है। इस संबंध में, उन्होंने अनुशासनहीनता के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान किया और सभी मातहतों को परिपत्र जारी कर बायोमेट्रिक उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

परेड की अनदेखी: अनुशासन और स्वास्थ्य पर सवाल

डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा कि पुलिस विभाग में परेड एक अनिवार्य गतिविधि है, जो न केवल अनुशासन को मजबूत करती है, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाती है। उन्होंने अफसोस जताया कि अधिकांश पुलिस अधिकारी और कर्मचारी, चाहे वे सिपाही हों, कांस्टेबल हों या इंस्पेक्टर, परेड में भाग लेने से कतराते हैं। इस अनदेखी का परिणाम यह है कि पुलिसकर्मियों की शारीरिक क्षमता कमजोर हो रही है। इस संबंध में सूत्रों का कहना है , इसी कारण अपराधियों का सामना करने या उनका पीछा करने में पुलिस असमर्थ हो रही हैं। डीजीपी ने इस बात पर जोर दिया कि शारीरिक रूप से अक्षम पुलिसकर्मी न केवल अपराधियों के सामने कमजोर पड़ते हैं, बल्कि इससे उनकी मानसिक दृढ़ता भी प्रभावित होती है, जो कानून व्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकता है।

शारीरिक अक्षमता: अपराधियों के सामने कमजोरी का कारण

पुलिसकर्मियों की शारीरिक अक्षमता का मुद्दा उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की चुनौतियों को और जटिल बना रहा है। कई मौकों पर देखा गया है कि पुलिसकर्मी अपराधियों का पीछा करने में असमर्थ रहते हैं। इसका कारण उनकी शारीरिक फिटनेस में कमी है। कुर्सी पर बैठे-बैठे, जीप या गाड़ियों में गश्त लगाने की आदत ने पुलिसकर्मियों का पैदल चलना और शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लेना लगभग बंद कर दिया है। नतीजतन, कई पुलिसकर्मी अतिरिक्त वजन और कमजोर स्टैमिना के शिकार हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार जब किसी मामले में मार्च पास्ट या त्वरित कार्रवाई की जरूरत पड़ती है, तो पुलिसकर्मी थकान या कमजोरी के कारण पीछे रह जाते हैं। इससे अपराधी मौके का फायदा उठाकर भाग निकलते हैं, और कई बार पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है।

सूत्रों की माने तो पुलिस भर्ती के दौरान उम्मीदवार पूरी मेहनत के साथ दौड़, हाई जंप, लॉन्ग जंप और अन्य शारीरिक परीक्षाओं में हिस्सा लेते हैं। इस दौरान उनका उत्साह और फिटनेस का स्तर काबिल-ए-तारीफ होता है। हालांकि, नौकरी में शामिल होने के कुछ समय बाद ही यह जज्बा धीरे-धीरे कम होने लगता है। डीजीपी के अनुसार, “पुलिसकर्मी शुरू में अपनी बॉडी को फिट रखने के लिए प्रयास करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे उनकी दिनचर्या में व्यायाम और शारीरिक गतिविधियां गायब हो जाती हैं। कुर्सी पर लंबे समय तक बैठने, गाड़ियों में गश्त करने और अनियमित जीवनशैली के कारण उनकी शारीरिक क्षमता कमजोर पड़ जाती है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्थिति न केवल पुलिसकर्मियों के लिए, बल्कि पूरे पुलिस विभाग और प्रदेश की कानून व्यवस्था के लिए हानिकारक है।

बायोमेट्रिक उपस्थिति: अनुशासन की पहल

अनुशासन को और मजबूत करने के लिए डीजीपी ने बायोमेट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि यह कदम पुलिसकर्मियों की जवाबदेही बढ़ाने और उनकी उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। बायोमेट्रिक सिस्टम से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन से पुलिसकर्मी परेड और अन्य अनिवार्य गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं और कौन इनसे बच रहे हैं। डीजीपी ने जोर देकर कहा कि बायोमेट्रिक उपस्थिति लागू होने से अनुशासनहीनता पर अंकुश लगेगा और पुलिसकर्मियों को नियमित रूप से परेड में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

फिट पुलिस, चुस्त कानून व्यवस्था

डीजीपी प्रशांत कुमार ने इस बात पर बल दिया कि एक फिट और अनुशासित पुलिस बल ही प्रदेश में कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रख सकता है। उन्होंने कहा, “जब पुलिसकर्मी शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होंगे, तभी वे अपराधियों का डटकर मुकाबला कर सकेंगे। एक फिट पुलिसकर्मी न केवल अपराधी को पकड़ने में सक्षम होगा, बल्कि उसका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा, जो उसे बेहतर निर्णय लेने में मदद करेगा।” डीजीपी ने यह भी कहा कि परेड के नियमित आयोजन से पुलिसकर्मियों में एकजुटता और सामूहिक अनुशासन की भावना भी विकसित होगी, जो पुलिस विभाग की कार्यक्षमता को और बढ़ाएगी।

हालांकि लोगों का कहना है कि इस मामले में पहले कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया ?डीजीपी के इस आदेश को कई लोग देर से उठाया गया कदम मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिसकर्मियों की शारीरिक अक्षमता और अनुशासनहीनता का मुद्दा लंबे समय से चला आ रहा है। कई बार अपराधियों के सामने पुलिस की निष्क्रियता की खबरें सुर्खियां बनती रही हैं। डीजीपी ने कर्मचारियों से अपील की कि वे इस आदेश को गंभीरता से लें और परेड को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

डीजीपी प्रशांत कुमार के इस आदेश से पुलिस विभाग में एक सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। परेड के नियमित आयोजन और बायोमेट्रिक उपस्थिति लागू होने से पुलिसकर्मियों में अनुशासन और शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा मिलेगा। इससे न केवल पुलिस बल की कार्यक्षमता में सुधार होगा, बल्कि प्रदेश की कानून व्यवस्था भी मजबूत होगी। डीजीपी प्रशांत कुमार का यह आदेश उत्तर प्रदेश पुलिस को चुस्त-दुरुस्त और अनुशासित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नियमित परेड और बायोमेट्रिक उपस्थिति जैसे उपायों से पुलिसकर्मियों की शारीरिक और मानसिक क्षमता में सुधार होगा, जिसका सीधा लाभ प्रदेश की कानून व्यवस्था को मिलेगा। यह कदम न केवल पुलिसकर्मियों को अपराधियों से बेहतर ढंग से निपटने में सक्षम बनाएगा, बल्कि जनता के बीच पुलिस की छवि को भी मजबूत करेगा।

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