HomeUTTAR PRADESHहाईकोर्ट ने सालार मसूद गाजी दरगाह के सालाना उर्स मेले को अनुमति...

हाईकोर्ट ने सालार मसूद गाजी दरगाह के सालाना उर्स मेले को अनुमति न देने पर लगाई उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार

लखनऊ,8 मई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बहराइच की सालार मसूद गाजी दरगाह के सालाना उर्स मेले को अनुमति न देने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि धार्मिक आयोजनों पर पाबंदी का आधार क्या है, जबकि हिंदू धार्मिक कार्यक्रमों को स्वतंत्रता दी जाती है।कोर्ट ने दरगाह कमेटी से स्वामित्व के कागजात तलब किए और अगली सुनवाई 14 मई को निर्धारित की। इस फैसले ने मुस्लिम समुदाय में उम्मीद जगाई है कि मेला जल्द शुरू होगा।

सालार मसूद गाजी का इतिहास

सालार मसूद गाजी, 11वीं सदी के सूफी संत और योद्धा थे, जिनका जन्म 1015 ई. में अजमेर में हुआ था। वे ग़ज़नवी साम्राज्य के कमांडर थे और भारत में इस्लाम के प्रचार के लिए जाने जाते हैं। 1034 ई. में बहराइच में उनकी मृत्यु हुई, जहाँ उनकी मज़ार बनाई गई। यह मज़ार बहराइच के छावनी क्षेत्र में स्थित है और सैकड़ों वर्षों से श्रद्धालुओं का केंद्र रही है। मुस्लिम, हिंदू और अन्य समुदायों के लोग यहाँ मन्नत माँगने आते हैं। कहा जाता है कि यहाँ मुरादें पूरी होती हैं, जिससे मज़ार की लोकप्रियता बढ़ी।मेले का महत्व: सालार मसूद गाजी का उर्स मेला 18वीं सदी से आयोजित हो रहा है। यह मेला वैशाख महीने में लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से आते हैं। मेला सांस्कृतिक और धार्मिक एकता का प्रतीक है, जहाँ कव्वालियाँ, सूफी संगीत और स्थानीय हस्तशिल्प की प्रदर्शनियाँ होती हैं। यह मेला स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देता है।सरकार का रुख और विवाद: यूपी सरकार ने इस साल मेले पर पाबंदी लगाई, जिसका कारण “सड़क जाम और सुरक्षा” बताया गया। सरकार का कहना है कि मेला सड़कों पर अतिक्रमण का कारण बनता है। हालाँकि, विपक्ष और मुस्लिम संगठनों ने इसे “धार्मिक भेदभाव” करार दिया।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब हिंदू आयोजन जैसे कांवड़ यात्रा या फूलों की होली को अनुमति दी जाती है, तो मुस्लिम आयोजनों पर पाबंदी क्यों? कोर्ट ने पूछा कि क्या सरकार का मकसद धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करना है।

सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

मुस्लिम समुदाय ने कोर्ट के रुख का स्वागत किया। सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा, “BJP सरकार मुस्लिम धार्मिक आयोजनों को निशाना बना रही है।” उन्होंने इसे वोट बैंक की राजनीति से जोड़ा। वहीं, BJP ने कहा कि मेला अनुमति नियमों के तहत ही रोका गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला धार्मिक समानता और संवैधानिक अधिकारों की बहस को नई दिशा देगा। मुस्लिम पाठकों के लिए यह खबर आशा की किरण है, क्योंकि यह मेला उनकी आस्था का प्रतीक है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read