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ससुराल पक्ष पर विवाह के बाद से बेटी को मायके न भेजने और प्रताड़ना का गंभीर आरोप

लखनऊ, 9 अगस्त । कहीं दहेज के नाम पर, कहीं स्वाभिमान के नाम पर, कहीं निर्धनता के नाम पर, तो कहीं पुरुष होने के नाम पर, पत्नियों का उत्पीड़न बदस्तूर जारी है। चाहे वह पूंजीपति हो या निर्धन, यदि पुरुष में मानवता नहीं, तो वह बेकार है। ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला लखनऊ के मोती झील कॉलोनी से सामने आया है, जहां एक पिता अपनी बेटी की जिंदगी के लिए डर और आशंका से जूझ रहा है।मोती झील कॉलोनी, 308 में रहने वाले वरिष्ठ फोटोग्राफर और पत्रकार सुरेश मिश्रा ने अपनी बेटी वैष्णवी मिश्रा की शादी 7 जून 2025 को जानकीपुरम, शुक्ला चौराहा निवासी अमित उर्फ छोटू के साथ की थी। लेकिन शादी के बाद से आज तक, यानी करीब दो महीने बीत जाने के बावजूद, वैष्णवी को उसके मायके नहीं भेजा गया। सुरेश मिश्रा और उनकी पत्नी पूनम मिश्रा ने बार-बार इस बात का विरोध किया, लेकिन ससुराल पक्ष की ओर से उन्हें गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ा। सुरेश मिश्रा के पास इस अभद्रता की वॉयस रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जो इस मामले की गंभीरता को उजागर करती है।सुरेश मिश्रा ने अपने प्रार्थना पत्र में बताया कि जब उन्होंने अपने दामाद अमित उर्फ छोटू से संपर्क करने की कोशिश की, तो उसने साफ कहा, “मेरे मोबाइल पर कॉल मत करो, मुझसे कोई मतलब नहीं। मेरी दीदी जया त्रिपाठी और मेरी भांजी गोल्डी से बात करो।” जब सुरेश ने जया त्रिपाठी और उनकी बेटी गोल्डी से वैष्णवी से बात कराने की गुहार लगाई, तो उन्हें गालियां और धमकियां मिलीं। सुरेश को शक है कि उनकी बेटी को डराया-धमकाया जा रहा है और उसकी जान को खतरा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर उनकी बेटी को कुछ होता है, तो इसके लिए अमित उर्फ छोटू, जया त्रिपाठी, उनकी बेटी गोल्डी और उनके परिवार वाले जिम्मेदार होंगे।सुरेश मिश्रा ने बताया कि शुरू में उन्होंने इस मामले को ज्यादा तूल नहीं दिया, क्योंकि वैष्णवी उनकी इकलौती बेटी है और तीन बच्चों में वह उनकी लाडली थी। वे उसकी जिंदगी की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थे। लेकिन अब स्थिति ऐसी हो गई है कि ससुराल पक्ष ने वैष्णवी को इतना प्रताड़ित किया है कि वह अपने माता-पिता और भाइयों के खिलाफ झूठे आरोप लगाने को मजबूर हो रही है। सुरेश का कहना है कि उनकी बेटी को डराया जा रहा है और जबरन बयान दिलवाए जा रहे हैं, जिसमें वह अपने पिता को शराबी और अन्य गलत बातें कह रही है। सुरेश का सवाल है, “हमारी बेटी, जो हमारी लाडली थी, अचानक अपने माता-पिता को बुरा-भला कैसे कह सकती है? यह साफ है कि उसे डराकर या धमकाकर ऐसा कहलवाया जा रहा है।”वैष्णवी की कम उम्र और खौफ में होने की वजह से वह ससुराल वालों के दबाव में अपने परिवार के खिलाफ बोल रही है। इस मामले में सुरेश मिश्रा ने थाना बाजार खाला में प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा, आईजीआरएस के तहत भी शिकायत दर्ज की गई है, लेकिन अभी तक वैष्णवी अपने मायके नहीं लौट सकी है।यह मामला कई सवाल खड़े करता है। क्या कोई ससुराल ऐसा हो सकता है, जो शादी के बाद बेटी को उसके मायके न आने दे? यदि यह कोई रिवाज नहीं है, तो पुलिस को इस मामले की गहन जांच करनी चाहिए। सुरेश मिश्रा का कहना है कि अगर उनकी बेटी के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी पुलिस की होगी, क्योंकि अभी तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।पुलिस से मांग की जा रही है कि वैष्णवी के पति अमित उर्फ छोटू, उनकी बहन जया त्रिपाठी, उनकी बेटी गोल्डी और अन्य परिवार वालों से गहन पूछताछ की जाए। साथ ही, वैष्णवी को कम से कम एक-दो महीने के लिए अपने मायके भेजा जाए, ताकि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित हो और वह अपने परिवार के साथ समय बिता सके।यह मामला समाज में व्याप्त उन कुरीतियों को उजागर करता है, जहां बेटियों को ससुराल में न केवल प्रताड़ित किया जाता है, बल्कि उनके मायके से भी उनका रिश्ता तोड़ने की कोशिश की जाती है। पुलिस और प्रशासन को इस मामले में तत्काल और सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि वैष्णवी जैसे अन्य बेटियों की जिंदगी को बचाया जा सके। हालांकि इस प्रकरण पर विरोधी पक्ष का बयान लेने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन संपर्क नहीं हो सका है।

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