लखनऊ, 2 जून । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में प्रदेश भर से आए हजारों शिक्षामित्र चिलचिलाती धूप में “2 जून की रोटी” के नारे के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। शिक्षामित्रों की मांग है कि उन्हें स्थायी नौकरी दी जाए और उनके वेतन को नियमित किया जाए। प्रदर्शनकारी शिक्षामित्रों का कहना है कि उन्हें साल में केवल 11 महीने का वेतन मिलता है, वह भी महज 10,000 रुपये, जो उनके परिवार के भरण-पोषण के लिए नकाफी है।प्रदर्शन में शामिल शिक्षामित्रों ने हाथों में रोटी लेकर अपनी व्यथा को प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त किया।
“2 जून की रोटी” का नारा उनकी आर्थिक तंगी और रोजगार की अनिश्चितता को दर्शाता है, जो अवधी भाषा में दो वक्त के भोजन की कठिनाई को व्यक्त करने वाला मुहावरा है।
शिक्षामित्रों का कहना है कि उन्होंने प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसकी सराहना विश्व बैंक तक ने की है। इसके बावजूद, उनकी सेवाओं को नियमित करने और उचित वेतन देने की मांग को सरकार अनदेखा कर रही है।
लखनऊ के इको गार्डन में 40 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी में भी शिक्षामित्रों का जज्बा कम नहीं हुआ। प्रदेश के 75 जिलों से आए लगभग 50,000 से अधिक शिक्षामित्र इस आंदोलन में शामिल हैं।
शिक्षामित्रों ने सरकार पर लगाया वादा खिलाफी का आरोप
उनका कहना है कि भाजपा सरकार ने उनके लिए “राम राज्य” का वादा किया था, लेकिन उनकी स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।शिक्षामित्रों की मांगें:शिक्षामित्रों को स्थायी शिक्षक के रूप में नियमित किया जाए।
12 महीने का वेतन सुनिश्चित किया जाए, जो वर्तमान में केवल 11 महीने मिलता है।वेतन को 10,000 रुपये से बढ़ाकर सम्मानजनक राशि की जाए।सेवा शर्तों में सुधार और पेंशन जैसे लाभ प्रदान किए जाएं।
समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिक्षामित्रों के इस प्रदर्शन को समर्थन देते हुए इसे चिंतनीय बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “प्रयागराज में शिक्षा चयन बोर्ड के सामने बेसिक शिक्षक के अभ्यर्थियों और लखनऊ के इको गार्डन में प्रदेश भर के शिक्षामित्रों के ‘2 जून को 2 जून की रोटी के संघर्ष’ का प्रदर्शन सच में चिंतनीय है।” उन्होंने सरकार से सात साल से रुकी हुई बेसिक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को शुरू करने की भी मांग की।
अब तक सरकार की ओर से इस प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। शिक्षामित्रों का कहना है कि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा, जिसके कारण उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार उनकी मांगों को अनसुना कर रही है और उनकी मेहनत को नजरअंदाज किया जा रहा है।
प्रदर्शन की तस्वीरें और प्रभाव
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में शिक्षामित्र हाथों में रोटी लिए अपनी मांगों को लेकर नारे लगाते दिख रहे हैं। यह प्रदर्शन न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को उजागर कर रहा है, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में उनकी अनदेखी को भी सामने ला रहा है। प्रदर्शनकारी शिक्षामित्रों का कहना है कि वे तब तक आंदोलन जारी रखेंगे, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।
शिक्षामित्रों का यह आंदोलन उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के मुद्दों पर गंभीर सवाल उठा रहा है। “2 जून की रोटी” का यह संघर्ष न केवल उनकी आर्थिक तंगी को दर्शाता है, बल्कि सरकार से उनके योगदान को सम्मान देने की मांग भी करता है। इस प्रदर्शन का असर आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है, अगर सरकार ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया।



