लखनऊ, 9 जून। लखनऊ विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर माधुरी को पहलगाम हमले से जुड़े एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में लखनऊ हाई कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी है। इस मामले ने पिछले कुछ समय से शहर में खासी चर्चा बटोरी थी, क्योंकि प्रोफेसर के पोस्ट को सामाजिक सौहार्द के लिए हानिकारक माना गया था। कोर्ट की सुनवाई के दौरान माधुरी के वकील ने दलील दी कि पोस्ट को गलत संदर्भ में पेश किया गया और उनकी मंशा किसी समुदाय को ठेस पहुंचाने की नहीं थी।अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि पोस्ट ने सामाजिक तनाव को बढ़ाने का काम किया, जिसके आधार पर उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माधुरी को अंतरिम जमानत देने का फैसला किया, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। उन्हें जांच में सहयोग करने और भविष्य में ऐसी गतिविधियों से दूर रहने का निर्देश दिया गया है। इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की जीत बताया, जबकि अन्य ने कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए।माधुरी ने कोर्ट के बाहर मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया, लेकिन उनके वकील ने कहा कि वह जल्द ही इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करेंगी। इस बीच, सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मुद्दा मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर संवेदनशील मुद्दों पर टिप्पणी करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट इस पर अंतिम फैसला ले सकता है।



