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लखनऊ में गंदगी और सफाई व्यवस्था पर उठ रहे सवाल: सड़कों पर कूड़ा, बदबू में जीते लोग

लखनऊ,2 मई । उत्तर प्रदेश की राजधानी, जो अपनी गंगा-जमुनी तहजीब और ऐतिहासिक धरोहर के लिए जानी जाती है, आजकल गंदगी और सफाई व्यवस्था की बदहाली के कारण चर्चा में है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों जैसे हजरतगंज, इंदिरा नगर, आलमनगर, आलमबाग, गोमती नगर, मुफ्तीगंज, हुसैनाबाद, बालागंज, दुबग्गा, कश्मीरी मोहल्ला, अकबरी गेट, पुल गुलाम हुसैन, बिल्लौचपुरा, राजाजीपुरम, हैदरगंज, पुराना हैदरगंज और सहादतगंज में सड़कों पर कूड़े के ढेर और बदबू ने निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। नगर निगम की लचर व्यवस्था और ठेके पर दी गई सफाई सेवाओं की नाकामी ने शहरवासियों के सामने गंभीर समस्याएँ खड़ी कर दी हैं।

सड़कें चलने के लिए या कूड़े के ढेर के लिए?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक बयान, जिसे लोग अब “जुमला” कहकर तंज कस रहे हैं, कि “सड़कें चलने के लिए हैं,” आज लखनऊ की सड़कों पर कटाक्ष बनकर गूँज रहा है। शहर के कई हिस्सों में सड़कों पर 2-3 दिन तक कूड़ा जमा रहता है, जिससे बदबू के कारण लोगों को नाक बंद करके चलना पड़ता है। खासकर मोटरसाइकिल सवारों के लिए यह और भी मुश्किल है, क्योंकि वे सवारी के दौरान नाक नहीं ढक सकते और साँस लेने में परेशानी होती है।उदाहरण के तौर पर, दरगाह रोड पर तोप दरवाजे के पास सड़क पर बना कूड़ाघर इस समस्या का जीता-जागता सबूत है। यहाँ घरों के का कूड़ा सफाईकर्मी इकट्ठा कर देते हैं, जिसे कई कई दिनों तक नहीं उठाया जाता, जिससे सड़क कूड़े के ढेर में तब्दील हो जाती है। सवाल यह है कि क्या सड़कों को कूड़ाघर बनाना उचित है? नगर निगम ने शहर में कई जगह सड़कों पर ही कूड़ाघर बना रखे हैं, लेकिन इनका समय पर निस्तारण न होने से गंदगी सड़कों पर फैल रही है।

घरों के बाहर कूड़ाघर: सफाई व्यवस्था की नाकामी

लखनऊ में डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण की व्यवस्था कई क्षेत्रों में पूरी तरह ठप है। जब सफाई कर्मचारी समय पर कूड़ा नहीं उठाते, तो लोग मजबूरी में कूड़ा सड़कों पर या किसी के घर के बाहर फेंक देते हैं। इससे हर गली-मोहल्ले में सड़क किनारे कूड़ाघर बनते जा रहे हैं। उदाहरण के लिए, इंदिरा नगर, आलमबाग, गोमती नगर, अलीगंज, विकासनगर, और डालीगंज जैसे पॉश इलाकों में भी सड़कों पर कूड़े का अंबार देखा जा सकता है।लालबहादुर शास्त्री वार्ड-2 के पार्षद भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि चेन्नई की रैमकी कंपनी को कूड़ा निस्तारण का ठेका मिलने के बाद से व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है। बैरल नं-3, शक्तिनगर, नीलगिरी, कन्वेंशन सेंटर, मीना मार्केट, और सर्वोदय नगर जैसे क्षेत्रों में कूड़ा उठान पूरी तरह बंद है। लोग कूड़े को बोरी में भरकर रात में इधर-उधर फेंक रहे हैं, जिससे सड़कों पर गंदगी फैल रही है।

सफाई कर्मचारियों की ठेकेदारी: एक गहरा घोटाला

लखनऊ की सफाई व्यवस्था में एक और गंभीर कमी सामने आई है। कई मुख्य सफाई कर्मचारी अपनी नौकरी को ठेके पर दे रहे हैं। वे कम पैसे में अन्य लोगों से काम करवाते हैं, जिससे सफाई की गुणवत्ता प्रभावित होती है। यह एक तरह का “अवैध ठेका” है, जिसमें मुख्य कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी दूसरों को सौंपकर मुनाफा कमा रहे हैं।पिछले दिनों नगर निगम ने 12 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवा समाप्त की थी, जो स्वच्छता सर्वेक्षण में फर्जीवाड़ा और अवैध वसूली में शामिल थे। यह कार्रवाई सही दिशा में एक कदम है, लेकिन यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

नालियों की सफाई और पार्षदों की नाराजगी

शहर की नालियाँ भी गंदगी का शिकार हैं। पार्षदों ने बार-बार नालियों की सफाई, सिल्ट हटाने और कूड़ा फैलाने वालों के खिलाफ चालान की माँग की है। मई 2025 में हुई नगर निगम की बैठक में पार्षदों ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया था। महात्मा गांधी वार्ड के पार्षद अमित चौधरी ने जियामऊ क्षेत्र में डस्टबिन से कूड़ा न उठाए जाने की शिकायत की, जिससे गंदगी सड़कों पर फैल रही है।मेयर और नगर आयुक्त पर सवाललखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल ने अलीगंज क्षेत्र में गंदगी देखकर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई थी। उन्होंने जोनल अधिकारी और सफाई इंस्पेक्टर को चेतावनी दी थी कि यदि सफाई नहीं हुई तो वे इस्तीफा दे दें। लेकिन यह सख्ती केवल कागजी लगती है, क्योंकि जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं दिख रहा। दूसरी ओर, नगर आयुक्त की खामोशी पर भी सवाल उठ रहे हैं। खराब कॉम्पैक्टर मशीनों के कारण कूड़ा सड़कों पर फेंका जा रहा है, जिससे लाखों रुपये की मशीनें बेकार पड़ी हैं।

जनता की पीड़ा और स्वच्छता का जुमला

लखनऊ में स्वच्छ भारत मिशन केवल विज्ञापनों तक सीमित लगता है। पुराने लखनऊ के क्षेत्रों जैसे मुफ्तीगंज, हुसैनाबाद, और बालागंज में गंदगी और गोबर सड़कों पर बिखरा पड़ा है, जिससे मलेरिया सहित अन्य कईबीमारियाँ फैलने का खतरा बढ़ गया है। आम लोग गंदगी और बदबू के बीच जीने को मजबूर हैं। सड़कों पर कूड़े के ढेर और भरी हुई नालियाँ शहर की स्मार्ट सिटी की छवि को धूमिल कर रही हैं।

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