लखनऊ,27 मई । लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के साथ व्यवस्थागत भेदभाव कर रही है। राहुल गांधी ने दावा किया कि योग्य उम्मीदवारों को जानबूझकर “नोट फाउंड सूटेबल” (NFS – योग्य नहीं पाया गया) कहकर खारिज किया जा रहा है, जिसे उन्होंने “नया मनुवाद” करार दिया। यह बयान दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के छात्रों और दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के प्रतिनिधियों के साथ उनकी मुलाकात के दौरान आया।
मुख्य आरोप और बयान’नोट फाउंड सूटेबल’ को मनुवाद से जोड़ा
राहुल गांधी ने कहा कि “नोट फाउंड सूटेबल” का इस्तेमाल SC/ST/OBC उम्मीदवारों को शिक्षा, नेतृत्व, और सरकारी नौकरियों में अवसरों से वंचित करने का एक हथियार बन गया है। उन्होंने इसे “De-Dalit-ification” और “De-OBC-fication” का हिस्सा बताया, जिसका अर्थ है दलितों और पिछड़े वर्गों को व्यवस्थित रूप से हाशिए पर धकेलना। उनके अनुसार, यह संविधान पर हमला है, क्योंकि यह बाबासाहेब अंबेडकर के शिक्षा को बराबरी का सबसे बड़ा हथियार मानने वाले सिद्धांत के खिलाफ है।शिक्षा और आरक्षण पर खतरा
राहुल ने दिल्ली विश्वविद्यालय में SC/ST/OBC छात्रों के साथ ‘शिक्षा न्याय संवाद’ के दौरान कहा कि मोदी सरकार शिक्षा के अधिकार और आरक्षण को कमजोर कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर आरक्षित पदों को खाली छोड़ रही है, जिससे दलित, आदिवासी, और पिछड़े वर्गों को उनका हक नहीं मिल रहा। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि उनकी और कांग्रेस पार्टी की लगातार मांग के कारण ही केंद्र सरकार को जाति आधारित जनगणना की घोषणा करनी पड़ी। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ी जीत बताया, खासकर OBC, दलित, और आदिवासी समुदायों के लिए।
लखनऊ में कार्यक्रम और संदर्भ
हालांकि राहुल गांधी का यह बयान दिल्ली में दिया गया, लेकिन खबरों के अनुसार, उनके इस अभियान की शुरुआत लखनऊ से होने की संभावना है। लखनऊ, उत्तर प्रदेश की राजधानी होने के नाते, सामाजिक न्याय और आरक्षण जैसे मुद्दों पर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। राहुल गांधी ने बिहार, दिल्ली, और अन्य राज्यों में SC/ST/OBC समुदायों के साथ लगातार संवाद किया है, और लखनऊ में 27 मई 2025 से इस मुद्दे को और तेज करने की योजना है।
लखनऊ का महत्व: उत्तर प्रदेश में दलित और OBC आबादी का बड़ा हिस्सा है, और यह राज्य विधानसभा चुनावों के लिए भी महत्वपूर्ण है। राहुल गांधी की यह रणनीति 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है, जहां कांग्रेस अपने पारंपरिक वोट बैंक को फिर से मजबूत करना चाहती है।
‘शिक्षा न्याय संवाद’ अभियान: इस अभियान के तहत राहुल गांधी छात्रों और युवाओं के साथ मिलकर शिक्षा और रोजगार में भेदभाव के मुद्दों को उठा रहे हैं। लखनऊ में इस अभियान को और विस्तार देने की योजना है।
सोशल मीडिया और प्रतिक्रियाएं
राहुल गांधी के इस बयान को कांग्रेस और इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) ने सोशल मीडिया पर जोर-शोर से प्रचारित किया। कई X पोस्ट्स में इसे संविधान और सामाजिक न्याय की रक्षा की लड़ाई बताया गया।
उदाहरण के लिए:@RahulGandhi ने लिखा, “‘Not Found Suitable’ अब नया मनुवाद है। SC/ST/OBC के योग्य उम्मीदवारों को जानबूझकर ‘अयोग्य’ ठहराया जा रहा है – ताकि वे शिक्षा और नेतृत्व से दूर रहें।”@IYC और @Bhopalinc ने इसे “De-Dalit-ification” और “De-OBC-fication” के रूप में प्रचारित किया, इसे संविधान पर हमला बताया।
राहुल गांधी पिछले कुछ वर्षों से जाति जनगणना, आरक्षण, और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में उनकी भारत जोड़ो यात्रा और जाति जनगणना की मांग ने कांग्रेस को मजबूती दी थी। केंद्र सरकार द्वारा 2024 में जाति जनगणना की घोषणा को राहुल और कांग्रेस ने अपनी जीत के रूप में पेश किया।
बिहार में सक्रियता: राहुल गांधी ने हाल ही में बिहार में कई दौरे किए, जहां उन्होंने SC/ST/OBC समुदायों के साथ संवाद किया। बिहार में दलितों की आबादी लगभग 19% है, और कांग्रेस इस वोट बैंक को वापस पाने की कोशिश कर रही है।
2023 में राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता एक मानहानि मामले में रद्द कर दी गई थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से इसे बहाल किया गया। इस घटना ने उनकी छवि को एक मजबूत विपक्षी नेता के रूप में उभारा।
कुछ X पोस्ट्स और समाचारों में बीजेपी समर्थकों ने राहुल के बयानों को राजनीतिक स्टंट बताया। उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने जाति जनगणना की घोषणा करके सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। हालांकि, राहुल गांधी और कांग्रेस का दावा है कि यह उनकी मांग का परिणाम है।
आगे की रणनीति
राहुल गांधी का यह बयान और लखनऊ से अभियान की शुरुआत कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह SC/ST/OBC समुदायों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में यह मुद्दा आगामी विधानसभा चुनावों में निर्णायक हो सकता है।



