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यूपी में लगा स्मार्ट मीटर पर ब्रेक: विरोध के बीच UPPCL ने लगाई रोक, जनता को फिलहाल राहत

लखनऊ, 19 अप्रैल। उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल एक अच्छी खबर है। स्मार्ट मीटर लगाने और प्रीपेड सिस्टम पर भारी विरोध के बाद उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने इस प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी है। यह फैसला तब तक लागू रहेगा, जब तक एक चार सदस्यीय तकनीकी कमेटी अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप देती।

पिछले कई दिनों से प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे लखनऊ, गाजियाबाद, अलीगढ़, कानपुर आदि में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उपभोक्ताओं का गुस्सा बढ़ता जा रहा था। लोगों की मुख्य शिकायत थी कि बिना सहमति के मीटर बदले जा रहे हैं, बिल पहले से ज्यादा आ रहे हैं, और बैलेंस खत्म होते ही बिजली अचानक कट जाती है। इससे घरेलू कामकाज, दुकानदारों का रोजगार और छोटे उद्योग प्रभावित हो रहे थे। कई जगहों पर महिलाओं समेत आम जनता ने विरोध प्रदर्शन किए। कुछ जगहों पर उपभोक्ता परिषद और स्थानीय संगठनों ने भी आवाज उठाई।

UPPCL ने अब स्मार्ट मीटर बदलने की प्रक्रिया रोकने का फैसला लिया है। कमेटी में IIT और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के विशेषज्ञ शामिल हैं। यह कमेटी ओवरबिलिंग, मीटर की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की समस्याओं की जांच करेगी। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।

 

विरोध के मुख्य कई कारण रहे जैसे,प्रीपेड सिस्टम की समस्या और बैलेंस खत्म होने पर बिना सूचना के बिजली कट जाना।

बिल में बढ़ोतरी में कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिल पहले से ज्यादा आ रहे हैं। यही नहीं उपभोक्ताओं की मर्जी के बिना पोस्टपेड से प्रीपेड में बदलाव। साथ ही तकनीकी दिक्कतें जैसे OTP, रिचार्ज और मीटर की विश्वसनीयता पर सवाल।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की हालिया अधिसूचना में प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। इसके बावजूद यूपी में इस पर विवाद जारी था। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने भी स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता हटाने और पुराने मीटर वापस लगाने की मांग की है।

 

अब क्या होगा?

 

UPPCL ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट आने तक नए स्मार्ट मीटर लगाने और पुराने मीटर को प्रीपेड में बदलने का काम रोका जाएगा। रिपोर्ट में अगर उपभोक्ताओं के पक्ष में सिफारिशें आईं तो प्लान में बदलाव या कुछ शर्तों के साथ लागू किया जा सकता है।

ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव (अतिरिक्त प्रभार) और UPPCL के चेयरमैन डॉ. आशीष कुमार गोयल, के स्तर पर भी इस मुद्दे पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को उपभोक्ताओं की शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।

ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा के नेतृत्व में विभाग पूरे मामले पर नजर रखे हुए है। सरकार का रुख है कि बिजली चोरी रोकना और पारदर्शी बिलिंग जरूरी है, लेकिन यह जनता की सुविधा और सहमति के साथ होना चाहिए।

 

उपभोक्ताओं के लिए सलाह

 

फिलहाल नया स्मार्ट मीटर लगाने से इनकार कर सकते हैं।

अगर जबरन लगाया जा रहा हो तो विद्युत नियामक आयोग या स्थानीय बिजली कार्यालय में शिकायत करें।

पुराने मीटर वाले उपभोक्ता नियमित बिल जमा करते रहें।

किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें, आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें।

यह फैसला उन लाखों घरेलू, व्यापारिक और छोटे उद्योगपतियों के लिए राहत की खबर है, जिनकी रोजी-रोटी बिजली पर निर्भर है। विशेष रूप से गर्मियों के मौसम में अचानक बिजली कटने का डर फिलहाल टल गया है।

उपभोक्ता संगठनों ने UPPCL के इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने तक सतर्क रहेंगे। अगर रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी नजर आई तो फिर से विरोध किया जाएगा।

अभी पूरा फोकस तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि स्मार्ट मीटर का भविष्य यूपी में कैसा होगा – पूरी तरह रोका जाएगा, संशोधित होगा या कुछ शर्तों के साथ आगे बढ़ेगा।

यह खबर उन करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए सकारात्मक संकेत है जो हर महीने बिल से जूझते हैं। फिलहाल जनता की आवाज सुनी गई है, लेकिन अंतिम फैसला रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।

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