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यूपी ने यात्री वाहन चेकिंग में मारी बाजी, सड़क सुरक्षा अभियान ने बनाया रिकॉर्ड

लखनऊ,25 मई।उत्तर प्रदेश ने यात्री वाहनों की चेकिंग और सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में देश में पहला स्थान हासिल कर लिया। उत्तर प्रदेश पुलिस और परिवहन विभाग ने संयुक्त रूप से 2025 में 10 लाख से अधिक यात्री वाहनों की जाँच की, जिसमें नियमों का उल्लंघन करने वाले 2 लाख वाहनों पर कार्रवाई की गई। इस अभियान ने न केवल सड़क दुर्घटनाओं में 15% की कमी लाई, बल्कि उत्तर प्रदेश को सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त नीतियों के तहत शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य ओवरलोडिंग, नशे में ड्राइविंग, बिना लाइसेंस वाहन चलाने, और अवैध परमिट वाली बसों पर लगाम लगाना था।

लखनऊ में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले 13,819 वाहनों का पंजीकरण निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसमें पाँच से अधिक चालान वाले वाहनों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया। लखनऊ के आरटीओ ने इन वाहन स्वामियों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। इस अभियान को पूरे प्रदेश में लागू किया गया, जिसमें गाजियाबाद, नोएडा, कानपुर, और वाराणसी जैसे शहरों में विशेष चेकिंग पॉइंट्स स्थापित किए गए।

नोएडा में ट्रैफिक पुलिस ने अनधिकृत बसों के खिलाफ अभियान शुरू किया, जो सेक्टर 37 और बॉटनिकल गार्डन जैसे व्यस्त क्षेत्रों में ओवरलोडिंग और गैर-निर्दिष्ट स्थानों से यात्री उठाने के लिए जानी जाती थीं। इस अभियान में दर्जनों बसों को जब्त किया गया और चालकों पर भारी जुर्माना लगाया गया। हापुड़ में “उत्तर प्रदेश सरकार” लिखी गाड़ियों और काली फिल्म लगे वाहनों पर विशेष कार्रवाई की गई, जिससे अवैध गतिविधियों में लिप्त वाहनों में हड़कंप मच गया।यह अभियान सड़क सुरक्षा के साथ-साथ अवैध गतिविधियों, जैसे मवेशी तस्करी और अवैध हथियारों की ढुलाई, पर भी नकेल कसने में सफल रहा। अलीगढ़ में मवेशी का मांस ले जा रहे एक वाहन को ग्रामीणों ने पकड़ा, जिसके बाद पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया। इस घटना ने चेकिंग की सख्ती को और उजागर किया।स्थानीय लोगों और ड्राइवर यूनियनों ने इस अभियान की सराहना की, लेकिन कुछ ने सख्ती को लेकर चिंता भी जताई। ट्रक ड्राइवर यूनियन के एक नेता ने कहा कि बार-बार चेकिंग से सामान्य व्यापार प्रभावित हो रहा है। इसके जवाब में पुलिस ने स्पष्ट किया कि केवल नियम तोड़ने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। इस अभियान ने उत्तर प्रदेश को सड़क सुरक्षा के मामले में देश में अग्रणी बनाया है, और अन्य राज्य अब यूपी मॉडल को अपनाने की योजना बना रहे हैं।

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