लखनऊ,20 मई । लखनऊ में एक ऐसी खबर ने सुर्खियाँ वटोरीं, जिसने आम जनता से लेकर उद्योगपतियों तक को सोच में डाल दिया। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के समक्ष बिजली दरों में 30% तक की वृद्धि का प्रस्ताव रखा। यह प्रस्ताव दोपहर 3:00 बजे के बाद सामने आया और शाम तक शहर में चर्चा का विषय बन गया। इस प्रस्ताव का उद्देश्य ₹19,600 करोड़ के भारी-भरकम राजस्व घाटे को पूरा करना बताया गया है, लेकिन यह खबर उपभोक्ताओं के लिए चिंता का कारण बन रही है।UPPCL के अनुसार, यह वृद्धि बिजली उत्पादन, वितरण और रखरखाव की बढ़ती लागत को देखते हुए जरूरी है। कॉरपोरेशन ने दावा किया कि कोयले की कीमतों में वृद्धि, बिजली उत्पादन इकाइयों की मरम्मत और नए बुनियादी ढांचे के विकास ने उनके वित्तीय बोझ को बढ़ा दिया है। प्रस्ताव में घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग दरों में वृद्धि का उल्लेख है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट दर में 20-30% की वृद्धि का अनुमान है, जबकि वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए यह 25-30% तक हो सकती है।लखनऊ के निवासियों ने इस प्रस्ताव पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। एक स्थानीय व्यापारी, संजय गुप्ता, ने कहा, “पहले ही बिजली बिल बोझ बन रहे हैं। अगर 30% की वृद्धि होती है, तो छोटे व्यापारियों का क्या होगा?” वहीं, एक गृहिणी, शालिनी वर्मा, ने चिंता जताते हुए कहा, “हम पहले ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं। बिजली बिल में वृद्धि हमारी जेब पर और बोझ डालेगी।” दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता सुधारने और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हो सकती है।UPPCL ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले नियामक आयोग सार्वजनिक सुनवाई करेगा, जिसमें उपभोक्ताओं और हितधारकों के सुझाव लिए जाएंगे। यह सुनवाई जून के पहले सप्ताह में होने की संभावना है। आयोग के एक अधिकारी ने कहा, “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखा जाए और कोई भी निर्णय संतुलित हो।” इसके बावजूद, विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव की आलोचना शुरू कर दी है। समाजवादी पार्टी के एक नेता ने ट्वीट किया, “भाजपा सरकार जनता पर और बोझ डाल रही है। यह प्रस्ताव गरीबों और मध्यम वर्ग के खिलाफ है।”लखनऊ में इस खबर ने सोशल मीडिया पर भी हलचल मचा दी। X पर कई यूजर्स ने #UPPowerHike हैशटैग के साथ अपनी नाराजगी जाहिर की। एक यूजर ने लिखा, “बिजली दरों में 30% वृद्धि? क्या सरकार चाहती है कि हम मोमबत्ती जलाएँ?” इस प्रस्ताव का असर न केवल लखनऊ, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। यदि यह लागू होता है, तो यह न केवल घरेलू बजट, बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों पर भी भारी पड़ सकता है।



