लखनऊ, 19 मई। लखनऊ में बिजली चोरी की जांच के दौरान बिजली कर्मचारियों पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) और प्रादेशिक सशस्त्र बल (PAC) ने संयुक्त अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। यह अभियान 21 मई 2025 से शुरू होगा और विशेष रूप से पुराने शहर के इलाकों जैसे ठाकुरगंज, चौक, अमीनाबाद, और नक्खास में लागू किया जाएगा। यह कदम हाल ही में ठाकुरगंज में चेकिंग के दौरान कर्मचारियों पर हुए हमले के बाद उठाया गया है, जैसा कि X पर हाल की पोस्ट्स में उल्लेख किया गया है।
अभियान का उद्देश्य और कार्ययोजना
बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पुराने शहर में बिजली चोरी की जांच के दौरान कर्मचारियों को अक्सर हिंसा का सामना करना पड़ता है। इस समस्या से निपटने के लिए PAC के साथ मिलकर संयुक्त चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत बिजली कर्मचारी और PAC जवान संयुक्त रूप से संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी करेंगे।चेकिंग के दौरान स्थानीय पुलिस को सूचित किया जाएगा ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो।अभियान का मुख्य उद्देश्य बिजली चोरी को रोकना और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह अभियान न केवल बिजली चोरी पर लगाम लगाएगा, बल्कि कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ाएगा।
बिजली चोरी और निजीकरण का खेल
हालांकि, कुछ सूत्रों का मानना है कि बिजली चोरी का मुद्दा जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है ताकि बिजली विभाग के निजीकरण को बढ़ावा दिया जा सके। पहले दावा किया गया था कि पुराने तारों को बदलने से बिजली चोरी पूरी तरह रुक जाएगी, लेकिन इसके बावजूद चोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं। यह संदेह जताया जा रहा है कि बिजली चोरी का “ड्रामा” निजीकरण के लिए एक आधार तैयार करने का हिस्सा हो सकता है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति और अन्य संगठनों ने निजीकरण के खिलाफ लंबे समय से विरोध प्रदर्शन किए हैं। X पर पोस्ट्स के अनुसार, कर्मचारी निजीकरण को “जनविरोधी, किसान-विरोधी, और कर्मचारी-विरोधी” मानते हैं और इसे रोकने के लिए 20 मई 2025 से 72 घंटे का कार्य बहिष्कार करने की योजना बना रहे हैं। यदि निजीकरण होता है, तो हजारों संविदा कर्मचारियों के बेरोजगार होने का खतरा है, और बिजली विभाग किसी निजी कंपनी के हाथों में जा सकता है।
सुरक्षा अभियान और कार्य बहिष्कार का अंतर
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि PAC के साथ संयुक्त चेकिंग अभियान कर्मचारियों की सुरक्षा और बिजली चोरी रोकने पर केंद्रित है, जबकि 20 मई से प्रस्तावित कार्य बहिष्कार निजीकरण और अन्य मांगों से संबंधित है। दोनों मुद्दे अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों ही बिजली विभाग की मौजूदा चुनौतियों को दर्शाते हैं।
जनता से अपील
बिजली विभाग ने जनता से इस अभियान में सहयोग करने की अपील की है ताकि बिजली व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके। साथ ही, कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाने की बात कही गई है।
लखनऊ में बिजली कर्मचारियों पर हमले रोकने के लिए शुरू होने वाला यह संयुक्त अभियान एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसके साथ ही निजीकरण और बिजली चोरी जैसे बड़े मुद्दों पर भी गंभीर विचार की जरूरत है। जनता और कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाना जरूरी है ताकि बिजली विभाग की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता बनी रहे।



