लखनऊ,3 जून। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने कंपनी की ओर से 273.5 करोड़ रुपये के जीएसटी नोटिस के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। यह निर्णय जस्टिस शेखर बी. सर्राफ और जस्टिस विपिन चंद्र दीक्षित की खंडपीठ ने 2 जून 2025 को सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जीएसटी एक्ट की धारा 122 के तहत टैक्स अथॉरिटीज पेनाल्टी लगा सकती हैं और इसके लिए किसी आपराधिक मुकदमे की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह मामला सिविल प्रकृति का है।डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (DGGST) इंटेलिजेंस ने 19 अप्रैल 2024 को पतंजलि को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें 273.5 करोड़ रुपये की पेनाल्टी प्रस्तावित थी। जांच में पाया गया कि कंपनी द्वारा आपूर्तिकर्ताओं से खरीदी गई वस्तुओं की मात्रा की तुलना में बेची गई मात्रा हमेशा अधिक थी। इसके अलावा, विवादित वस्तुओं पर प्राप्त इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को पतंजलि ने आगे स्थानांतरित कर दिया था, जो जीएसटी नियमों का उल्लंघन माना गया। हालांकि, 10 जनवरी 2025 को यह नोटिस वापस लिया गया था, लेकिन जीएसटी अधिकारियों ने धारा 122 के तहत दंडात्मक कार्रवाई जारी रखने का फैसला किया।पतंजलि ने कोर्ट में दलील दी थी कि इस तरह की पेनाल्टी केवल आपराधिक मुकदमे के बाद ही लगाई जा सकती है, लेकिन हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि जीएसटी नियमों के तहत ऐसी कार्रवाई वैध है। कोर्ट के इस फैसले से पतंजलि को अब यह भारी-भरकम जुर्माना भरना पड़ सकता है, जो कंपनी के लिए बड़ा आर्थिक झटका साबित हो सकता है।हाल ही में पतंजलि की मुश्किलें बढ़ी हैं। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने भी कंपनी के कुछ संदिग्ध लेन-देन को लेकर नोटिस जारी किया है, जिसका जवाब देने के लिए दो महीने का समय दिया गया है। यह निर्णय पतंजलि के लिए एक और चुनौती के रूप में सामने आया है, जो पहले ही भ्रामक विज्ञापनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की फटकार झेल चुकी है।



