लखनऊ, 18 जून। बरेली में आज सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सुभाषनगर थाना क्षेत्र के रामगंगानगर चौकी के पास, मदर पब्लिक स्कूल के नजदीक रेलवे ट्रैक के किनारे मिट्टी की खुदाई के दौरान एक 2 फीट लंबा और 10 किलो वजनी जिंदा मोर्टार बम मिला। यह खबर जंगल की आग की तरह पूरे बरेली में फैल गई, जिससे लोगों में दहशत के साथ-साथ यह जिज्ञासा पैदा हो गई कि आखिर यह बम कहाँ से आया और इसे किसने रखा? सुबह 8:00 बजे के बाद शुरू हुई खुदाई ने जैसे ही इस विस्फोटक का पर्दाफाश किया, स्थानीय लोग हैरान रह गए। लोग इस रहस्यमयी खोज को देखने के लिए मौके पर जमा हो गए। लेकिन जैसे ही बम की सच्चाई सामने आई, दहशत ने उत्साह को पीछे छोड़ दिया।
सुभाषनगर थाना क्षेत्र में रेलवे ट्रैक के किनारे मिट्टी की खुदाई का काम सुबह 8:00 बजे के बाद शुरू हुआ। मजदूर जेसीबी मशीन से मिट्टी हटा रहे थे, तभी उनकी नजर एक संदिग्ध वस्तु पर पड़ी। पहले तो मजदूरों ने इसे कोई पुराना सामान समझा, लेकिन जब करीब से देखा, तो यह सेना द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला मोर्टार शेल निकला। यह देखते ही मजदूरों के होश उड़ गए, और उन्होंने तुरंत काम रोककर स्थानीय पुलिस को सूचना दी। खबर मिलते ही सुभाषनगर पुलिस और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अनुराग आर्य अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे। साथ ही, सेना की बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया।
बम निरोधक दस्ते का एक्शन और रहस्य का खुलासा
सेना के बम निरोधक दस्ते ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मोर्टार शेल की जाँच की। प्रारंभिक जाँच में पता चला कि यह एक पुराना मोर्टार शेल है, जो संभवतः मिसफायर होने के बाद डिस्पोजल के लिए मिट्टी में दबाया गया था। विशेषज्ञों ने बताया कि यह बम सेना द्वारा प्रशिक्षण या युद्ध अभ्यास के दौरान इस्तेमाल किया गया हो सकता है, जो किसी कारणवश निष्क्रिय नहीं हुआ और मिट्टी में दबा रह गया। बम निरोधक दस्ते ने इसे सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। एसएसपी अनुराग आर्य ने पुष्टि की कि यह मोर्टार शेल पुराना और मिसफायर था, लेकिन इसकी मौजूदगी ने इलाके में सनसनी फैला दी।
जैसे ही यह खबर फैली, सुभाषनगर और आसपास के इलाकों में लोग घरों से निकलकर घटनास्थल पर जमा हो गए। कुछ लोग इसे देखने के लिए उत्साहित थे, तो कुछ में डर का माहौल था। स्थानीय निवासियों में यह सवाल गूँज रहा था कि आखिर यह बम यहाँ कैसे पहुँचा? क्या यह किसी पुराने युद्ध का अवशेष है, या फिर कोई और रहस्य इसके पीछे छिपा है? कुछ लोगों ने अंग्रेजी हुकूमत के समय के बम होने की आशंका जताई, क्योंकि सुभाषनगर में 2022 में भी एक हैंड ग्रेनेड खुदाई के दौरान मिला था। इस घटना ने लोगों की जिज्ञासा को और बढ़ा दिया।
पुलिस और सेना की सतर्कता
पुलिस ने इलाके को घेर लिया और आसपास के क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान शुरू किया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई और विस्फोटक सामग्री मौजूद न हो। एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि मामले की गहन जाँच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह मोर्टार शेल यहाँ कैसे पहुँचा। पास ही सैन्य क्षेत्र होने के कारण यह आशंका भी जताई जा रही है कि यह सेना के पुराने अभ्यास का हिस्सा हो सकता है। फिलहाल, इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई है, और स्थानीय लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है।
बरेली में पहले भी मिल चुके हैं विस्फोटक
यह पहली बार नहीं है जब बरेली में ऐसी घटना हुई हो। 2022 में सुभाषनगर क्षेत्र में ही मिट्टी की खुदाई के दौरान एक हैंड ग्रेनेड मिला था, जिसने भी इलाके में हड़कंप मचा दिया था। स्थानीय लोग अब इस बात से चिंतित हैं कि उनके इलाके में बार-बार ऐसे विस्फोटक क्यों मिल रहे हैं। कुछ का मानना है कि यह पुराने सैन्य अभ्यासों के अवशेष हो सकते हैं, जो मिट्टी में दबे रह गए।



