लखनऊ, 18 जून । ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई ने इजरायल के खिलाफ छठे दिन भी भीषण युद्ध जारी रखा है, और इस संघर्ष ने मध्य पूर्व को एक बार फिर आग के हवाले कर दिया है। बुधवार को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक सख्त बयान जारी करते हुए इजरायल के खिलाफ जंग का औपचारिक ऐलान किया। उन्होंने कहा, “महान हैदर के नाम पर, जंग शुरू हो गई है। हम आतंकवादी यहूदी शासन को कड़ा जवाब देंगे और उन पर कोई दया नहीं दिखाएंगे।” इस बयान के कुछ ही देर बाद ईरान ने इजरायल पर 25 फतह-1 हाइपरसोनिक मिसाइलें दागीं, जिसने तेल अवीव सहित इजरायल के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।लेकिन इस युद्ध की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जहाँ इजरायल के हमले ईरान के रिहायशी इलाकों पर केंद्रित हैं, जिसके परिणामस्वरूप 600 से अधिक ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है, वहीं ईरान ने युद्ध के अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हुए इजरायल के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने से परहेज किया है। इजरायल में अब तक केवल 10 लोगों की मौत की खबर है, जो ज्यादातर सैन्य कर्मी हैं। यह साफ तौर पर इजरायल के युद्ध अपराधों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन को उजागर करता है।
युद्ध की पृष्ठभूमि और खामेनेई का बयान
ईरान और इजरायल के बीच तनाव कई दशकों से चला आ रहा है, लेकिन हाल के महीनों में यह संघर्ष एक खुले युद्ध में बदल गया। 13 जून 2025 को इजरायल ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए, जिसमें तेहरान, इस्फहान, और फोर्डो जैसे शहरों में भारी तबाही मची। इन हमलों में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडर हुसैन सलामी सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मारे गए। जवाब में, ईरान ने इजरायल के सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले शुरू किए, लेकिन उसने रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने से बचने की नीति अपनाई।अयातुल्लाह खामेनेई ने अपने बयान में इजरायल को “आतंकवादी शासन” करार देते हुए कहा, “इजरायल ने हमारे मुल्क पर हमला करके युद्ध की शुरुआत की है। वे हमारे रिहायशी इलाकों को निशाना बना रहे हैं, लेकिन हम उनके अपराधों का जवाब सैन्य ठिकानों तक सीमित रखेंगे।” खामेनेई के इस बयान ने न केवल ईरानी जनता को एकजुट किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भी इस युद्ध की असमानता की ओर खींचा।
इजरायल के हमले: रिहायशी इलाकों में तबाहीइजरायल के हमलों ने ईरान के नागरिक क्षेत्रों को भारी नुकसान पहुँचाया है। तेहरान में रिहायशी इमारतें ध्वस्त हो गईं, और कई स्कूल, अस्पताल, और मस्जिदें मलबे में तब्दील हो चुकी हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, इन हमलों में 600 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इजरायली हमले बिना किसी चेतावनी के रात के समय किए गए, जिससे नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर जाने का मौका भी नहीं मिला।ईरान के एक स्थानीय निवासी, अहमद रज़ाई ने बताया, “हम सो रहे थे जब अचानक धमाकों की आवाज़ आई। मेरे पड़ोस की एक इमारत पूरी तरह ढह गई, और मेरे दोस्त का पूरा परिवार मलबे में दब गया। यह युद्ध नहीं, नरसंहार है।” अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी इजरायल के इन हमलों की निंदा की है, और इसे युद्ध अपराध करार देने की माँग की है।
ईरान की रणनीति: युद्ध नियमों का पालन
दूसरी ओर, ईरान ने अपनी मिसाइलों को इजरायल के सैन्य ठिकानों, जैसे हवाई अड्डों, रडार स्टेशनों, और मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स तक सीमित रखा है। ईरान की फतह-1 हाइपरसोनिक मिसाइल, जो ध्वनि की गति से पाँच गुना तेज़ है, ने तेल अवीव के सैन्य ठिकानों को सटीक निशाना बनाया। इसके बावजूद, इजरायल में नागरिक हताहतों की संख्या बेहद कम रही, क्योंकि ईरान ने जानबूझकर रिहायशी इलाकों को निशाना नहीं बनाया।ईरानी सैन्य विशेषज्ञ मोहम्मद हसन ने कहा, “हमारा उद्देश्य इजरायल के सैन्य ढांचे को कमजोर करना है, न कि निर्दोष नागरिकों को नुकसान पहुँचाना। हम युद्ध के अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान करते हैं, लेकिन इजरायल ऐसा नहीं कर रहा।” यह रणनीति न केवल ईरान की नैतिकता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि ईरान इस युद्ध में सैन्य नैतिकता को प्राथमिकता दे रहा है।
इजरायल का युद्ध अपराध और अंतरराष्ट्रीय चुप्पी
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि उनके हमले “आत्मरक्षा” में हैं और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए जरूरी हैं। लेकिन रिहायशी इलाकों पर हमले और नागरिकों की मौत ने उनके दावों पर सवाल उठाए हैं। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि खामेनेई की हत्या से यह युद्ध खत्म हो सकता है, जिसे ईरान ने “युद्ध का सीधा ऐलान” करार दिया।अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी इस युद्ध में एक बड़ा सवाल है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवाधिकार संगठनों ने इजरायल के हमलों की आलोचना तो की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अमेरिका ने इजरायल को मिसाइल डिफेंस सिस्टम में सहायता दी, लेकिन खामेनेई को निशाना बनाने की इजरायली योजना को रोक दिया। यह दोहरा रवैया मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा रहा है।
ईरान की जनता का हौसला
इजरायल के हमलों के बावजूद, ईरानी जनता ने अपने सुप्रीम लीडर के साथ एकजुटता दिखाई है। तेहरान की सड़कों पर हजारों लोग खामेनेई के समर्थन में रैलियाँ निकाल रहे हैं। एक युवा प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम अपने मुल्क की हिफाजत करेंगे। इजरायल हमें डरा नहीं सकता।” खामेनेई ने भी जनता को भरोसा दिलाया कि ईरानी सेना इजरायल को “सबक सिखाएगी”।
यह युद्ध अब एक निर्णायक मोड़ पर है। अगर इजरायल रिहायशी इलाकों पर हमले जारी रखता है, तो ईरान भी अपनी रणनीति बदल सकता है। लेकिन फिलहाल, ईरान की सैन्य कार्रवाइयाँ युद्ध के नियमों के दायरे में हैं, जबकि इजरायल के हमले नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। यह असमानता न केवल युद्ध के नैतिक पहलुओं को उजागर करती है, बल्कि इजरायल के युद्ध अपराधों पर सवाल भी उठाती है।
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई का जंग का ऐलान मध्य पूर्व में एक नए युग की शुरुआत हो सकता है। लेकिन इस युद्ध में ईरान की नैतिकता और इजरायल के युद्ध अपराधों के बीच का अंतर साफ दिख रहा है। इजरायल के रिहायशी इलाकों पर हमले और 600 से अधिक ईरानी नागरिकों की मौत इस युद्ध की क्रूरता को दर्शाती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब इस युद्ध को रोकने और इजरायल के युद्ध अपराधों की जाँच करने की जरूरत है, वरना मध्य पूर्व एक और बड़े संकट की ओर बढ़ सकता है।



