लखनऊ, 16 मई। लखनऊ की मशहूर और मारूफ शख्सियत, शिया डिग्री कॉलेज के केमिस्ट्री प्रोफेसर और खुशमिजाज इंसान प्रोफेसर (डॉ.) सैयद जमाल हैदर जैदी के अचानक दिल का दौरा पड़ने से निधन ने उनके चाहने वालों को गहरे सदमे में डाल दिया। मरहूम के इसाले सवाब के लिए 18 मई 2025 को सुबह 9:45 बजे लखनऊ के इमामबाड़ा गुफरान माब में मजलिस-ए-चहलुम का आयोजन किया जा रहा है, जिसको मौलाना एजाज़ फररुख साहब हैदराबादी खिताब करेंगे। जबकि मस्तूरात की मजलिस इसी रोज इमाम बाड़ा आगा बाकर में सुबह 9:45 बजे मुनअक्किद होगी ,जिसे हदीस खान सुबूही जैदी खिताब करेंगी।
डॉ. जैदी एक ऐसी शख्सियत थे, जिनकी मिसाल देना मुश्किल है।मायावती सरकार में दो मर्तबा हायर एजुकेशन कमिशन में राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त करने के बावजूद उनकी सादगी और नेकदिली बेमिसाल थी। जब उनके लिए सरकारी गाड़ी और सिक्योरिटी फोर्स भेजी गई, तो उन्होंने विनम्रता से मना करते हुए कहा, “मुझे भव्यता का शौक नहीं। मैं अपनी बाइक या कार से ही आऊंगा-जाऊंगा। न मेरा कोई दुश्मन है, न मैं सरकार का पैसा बर्बाद करना चाहता हूँ।” यह वाकया उनकी सादगी और नैतिकता को आज भी याद कराता हैं।वह गरीबों और जरूरतमंदों की चुपके से मदद करते थे। एक वाकये में, एक लड़की की शादी के लिए ग्रुप में अकाउंट डिटेल्स शेयर किए गए। डॉ. जैदी ने बिना नाम उजागर किए मदद भेजी और कहा, “मेरा नाम न लें, बस मदद पहुंचा दें।” ऐसे नेक कामों से उनकी शख्सियत और ऊँची हो जाती थी।
धार्मिक और सामाजिक कार्यों में भी लेते थे बढ़-चढ़कर हिस्सा
लखनऊ में होने वाली तंजीम-ए- पैग़ाम ए ग़दीर की महफिल में वह रातभर मौजूद रहते और सुबह महफिल खत्म होने पर ही घर लौटते। मजलिसों और अन्य धार्मिक संगोष्ठियों में उनकी शिरकत उनकी आध्यात्मिक गहराई को दर्शाती थी।उनके निधन से लखनऊ का हर शख्स गमजदा है। लोग उनकी सादगी, उदारता और नेकी को याद कर आंसू बहा रहे हैं। काश, वह और कुछ वक्त तक हमारे बीच रहते।
मरहूम के छोटे भाई अब्बास जैदी ने मोमेनीन व मोमिनात से मजलिस में कसीर तादाद में शिरकत किये जाने की इल्तेमास की है।



