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लखनऊ,26 अप्रैल। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जांच में चीन और रूस को शामिल करने की मांग की है। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। यह मांग पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने रूसी समाचार एजेंसी RIA Novosti को दिए साक्षात्कार में उठाई। उन्होंने कहा, “रूस, चीन या पश्चिमी देश इस संकट में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं। एक अंतरराष्ट्रीय जांच टीम बनाई जाए जो यह पता लगाए कि भारत या पीएम मोदी सच बोल रहे हैं या नहीं।”
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया, यह दावा करते हुए कि भारत के आरोपों के पीछे कोई ठोस सबूत नहीं है। ख्वाजा आसिफ ने कहा, “यह जानना जरूरी है कि इस घटना का असली दोषी कौन है। खाली बयानबाजी से कुछ नहीं होगा। पाकिस्तान के खिलाफ सबूत होने चाहिए कि हमले में उसका हाथ था।” पाकिस्तान के परस्पर विरोधी बयान
पाकिस्तान के इस कदम को कई विशेषज्ञों ने उसकी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना है।
मॉस्को स्थित अमेरिकी विश्लेषक एंड्रयू कोरिब्को ने पाकिस्तानी अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास को उजागर किया। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने हमलावरों को “स्वतंत्रता सेनानी” कहकर संदर्भित किया, जबकि ख्वाजा आसिफ ने हमले को भारत द्वारा प्रायोजित “झूठा ऑपरेशन” करार दिया। कोरिब्को ने लिखा, “ये परस्पर विरोधी बयान बौद्धिक रूप से अपमानजनक हैं और यह संकेत देते हैं कि पाकिस्तान अपनी संलिप्तता को छिपाने की कोशिश कर रहा है।”
भारत ने पाकिस्तान की इस मांग को “हास्यास्पद” और “बेतुका” करार देते हुए खारिज कर दिया। भारत ने हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) पर डाली, जो लश्कर-ए- तैयबा का एक छद्म संगठन है।
भारत ने जवाबी कार्रवाई में कई कड़े कदम उठाए, जिनमें भारत ने 24 अप्रैल को 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही अटारी-वाघा सीमा पर आवाजाही और व्यापार रोक दिया।भारत ने इस्लामाबाद में अपने रक्षा, नौसेना और वायु सलाहकारों को वापस बुलाया और पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारियों को तलब कर उनके सैन्य सलाहकारों को “पर्सोना नॉन ग्राटा” घोषित किया।
चीन की भूमिका और वैश्विक प्रतिक्रिया
चीन ने पाकिस्तान के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए “निष्पक्ष जांच” की वकालत की। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 27 अप्रैल को इशाक डार से फोन पर बातचीत में कहा, “चीन स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील करता है।” हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि चीन का समर्थन पाकिस्तान के प्रति उसकी रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी देखा गया है। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से “अधिकतम संयम” बरतने की अपील की, लेकिन भारत ने स्पष्ट किया कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति पर अडिग रहेगा।
भविष्य की संभावनाएं
पाकिस्तान की मांग को भारत और वैश्विक समुदाय में ज्यादा समर्थन मिलने की संभावना नहीं है, क्योंकि हमले की जिम्मेदारी TRF ने स्वीकार की थी, जिसे पाकिस्तान समर्थित माना जाता है। भारत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को जांच सौंपी है, जो हमले के पीछे की साजिश को उजागर करने के लिए काम कर रही है।
पाकिस्तान का यह कदम कूटनीतिक दबाव को कम करने और समय हासिल करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर जब भारत ने सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर आक्रामक रुख अपनाया है। दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ सकता है, और विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अगली कार्रवाई इस मामले में निर्णायक होगी।



