लखनऊ,1 जून । दिल्ली विधानसभा में सत्र के दौरान तीखा हंगामा देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की दूसरी रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में दिल्ली के अस्पतालों में दवाइयों और उपकरणों की कमी, कर्मचारियों की भारी कमी, स्वास्थ्य परियोजनाओं में देरी, और केंद्रीय व राज्य प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन में खामियों का खुलासा हुआ। यह सत्र सुबह 11 बजे शुरू हुआ और दोपहर तक हंगामे में तब्दील हो गया। आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों ने इस रिपोर्ट को “राजनीति से प्रेरित” करार देते हुए सदन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।AAP विधायकों का आरोप है कि CAG रिपोर्ट में जानबूझकर AAP सरकार के कार्यकाल की कमियों को उजागर किया गया, जबकि वर्तमान भाजपा सरकार की कमजोरियों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। विपक्ष की नेता आतिशी ने कहा, “यह रिपोर्ट एक तरफा है और जनता को गुमराह करने का प्रयास है। हमारी सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए कई कदम उठाए थे।” दूसरी ओर, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि यह रिपोर्ट AAP के “काले कारनामों” का पर्दाफाश करती है। उन्होंने दावा किया कि AAP सरकार ने स्वास्थ्य बजट का सही उपयोग नहीं किया, जिसके कारण दिल्लीवासियों को खराब स्वास्थ्य सेवाएँ मिलीं।
सदन में हंगामा तब और बढ़ गया जब विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने AAP के कुछ विधायकों को नियमों का उल्लंघन करने के लिए निलंबित कर दिया। AAP विधायकों ने सदन के बाहर नारेबाजी की और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के खिलाफ “झूठी रिपोर्ट” पेश करने का आरोप लगाया। इस हंगामे के कारण सत्र को दो घंटे के लिए स्थगित करना पड़ा। इस बीच, दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने कहा कि यह रिपोर्ट जनता के सामने सच्चाई लाने के लिए जरूरी थी।यह हंगामा दिल्ली की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है, क्योंकि हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 48 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि AAP को 22 सीटें मिली थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रिपोर्ट भाजपा के लिए AAP पर हमला करने का एक हथियार बन सकती है, खासकर तब जब दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाएँ पहले से ही चर्चा का विषय रही हैं।



