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टेक्नोलॉजी के दौर में फर्जी खबरों पर लगाम

आज के युग में पत्रकार बनना और पत्रकारिता करना दोनों अलग-अलग बातें हैं पर फिर भी यह देखा जाता है की आम नागरिक इस बात को अच्छी तरह नहीं समझ पा रहा है ! क्योंकि पत्रकारिता जितना आसान दिखती है उतना आसान होती नहीं पत्रकारिता एक प्रकार का नशा है और जब तक आप उस नशे में सराबोर नहीं हो जाते तब तक पत्रकारिता सही ढंग से नहीं कर सकते!
एक पत्रकार जब किसी पीड़ित के बारे में लिखता है, तो दूसरी ओर से उसको धमकियां मिलनी शुरू हो जाती है,
और जब कभी कोई पत्रकार गलती से अपराधी के पक्ष में लिख देता है तो उसको हमारा समाज बिकाऊ मीडिया कहने लगता है!
इसी तरह जब पत्रकार सरकार के पक्ष में लिखता है तो उसको हमारा समाज चापलूस मीडिया बोलने लगता है और अगर सरकार के विपक्ष जाकर लिखता है तो उसको हमारा समाज देशद्रोही बोलने लगता है!
सोशल नेटवर्किंग के दौर में हर आम इंसान अपने को पत्रकार समझने लगा है और जो मर्जी होती हैं अपनी उल्टी-सीधी पत्रकारिता फेसबुक व्हाट्सएप टि्वटर इत्यादि पर लिखना शुरु कर देते हैं ,बिना यह जांचें बिना यह सोचे कि इस खबर की सत्यता क्या है, और इस तरह भ्रामक खबरों का धीरे धीरे एक जाल बन जाता है और हर कोई इस जाल की चपेट में आ जाता है
इस तरह समाज में धीरे धीरे जहर घुलने लगता है और इसका असर यह होता है की नफरत की चिंगारी बढ़ने लगती है जिससे भारतीय सभ्यता धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है और हमारा भारत देश कमजोर होता जा रहा है!
लगातार भ्रामक खबरें सोशल नेटवर्किंग के जरिए से फैलने से
समाज का चौथा स्तंभ भी कमजोर होता जा रहा है!
हमारी सरकार भ्रामक खबरों को फैलने से रोकने के लिए नई नई टेक्नोलॉजी ला रही है फिर भी फर्जी खबरों का स्तर बढ़ता ही जा रहा है,सरकार चाह कर भी एक आम इंसान को पत्रकार बनने से रोक नहीं पा रही है और 130 करोड़ की आबादी पे नजर रखना नामुमकिन सा है और हर फर्जी खबर के लिए F.I.R. करना भी सही नहीं है!
मेरे सभी पत्रकार भाइयों से यह गुजारिश है की अगर वह चाहते हैं कि उनकी पत्रकारिता और समाज का चौथा स्तंभ को बरकरार रखा जाए तो सरकार तक यह बात पहुंचाएं की एक ऐसा कानून बनाएं की कोई भी आम इंसान व्हाट्सएप फेसबुक टि्वटर पर अपनी तरफ से कोई भी न्यूज़ ना डालें चाहे वह खबर सच्ची हो या झूठी अगर कोई बात आपको सोशल नेटवर्किंग के जरिए लोगों तक पहुंचाना ही है तो कोई ना कोई न्यूज़ चैनल के लिंक के द्वारा ही शेयर करें इससे फायदा यह है कि अगर खबर फर्जी है तो आम इंसान के ऊपर कोई एफ आई आर नहीं लग सकती और कोई भी पत्रकार उस खबर को बिना जांचे परखे अपने न्यूज़ चैनल या न्यूज़ पोर्टल पर प्रसारित नहीं करेगा और टेक्नोलॉजी के दौर में हर आम इंसान को पत्रकार बनने का अवसर प्रदान होगा और सरकार को भी फर्जी खबरों को रोकने के लिए एक नया रास्ता मिल जाएगा !

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