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उत्तर प्रदेश के नव नियुक्त पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्णा ने की अपनी पहली समीक्षा बैठक

लखनऊ, 7 जून । उत्तर प्रदेश के नव नियुक्त पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्णा ने शुक्रवार को अपनी पहली बड़ी समीक्षा बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की। इस बैठक में उन्होंने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने, अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग को आधुनिक बनाने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए। डीजीपी ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए पुलिस बल को स्मार्ट, संवेदनशील और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष जोर दिया। बैठक में साइबर क्राइम, आर्थिक अपराध, भूमि विवाद, गैंगस्टर एक्ट के प्रभावी उपयोग, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, और आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।

कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण पर जोर

डीजीपी राजीव कृष्णा ने बैठक में स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि छोटे-बड़े सभी अपराधों, विशेष रूप से संगठित अपराधों पर कड़ी नजर रखी जाए। गैंगस्टर एक्ट का प्रभावी उपयोग करते हुए अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। डीजीपी ने जोर देकर कहा कि अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति बरकरार रहेगी, और किसी भी प्रकार की अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।उन्होंने विशेष रूप से आर्थिक अपराधों और भूमि विवादों पर ध्यान देने की बात कही, जो अक्सर कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनते हैं। डीजीपी ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई की जाए ताकि जनता का विश्वास पुलिस पर बना रहे। साथ ही, उन्होंने अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने और गंभीर अपराधों पर लक्षित कार्रवाई करने पर बल दिया।

साइबर क्राइम पर विशेष सतर्कता

बैठक में साइबर क्राइम को एक उभरती चुनौती के रूप में चिह्नित किया गया। डीजीपी ने कहा कि पोस्ट-कोविड युग में साइबर अपराधों में वृद्धि हुई है, जिसके लिए विशेष सतर्कता और आधुनिक तकनीकों की आवश्यकता है। उन्होंने साइबर क्राइम की रोकथाम और जांच को मजबूत करने के लिए विशेष प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया। डीजीपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा-आधारित पुलिसिंग मॉडल को अपनाने की बात कही, जो पुलिस की कार्यक्षमता और जवाबदेही को बढ़ाएंगे।तकनीकी नवाचार और स्मार्ट पुलिसिंगराजीव कृष्णा ने पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी नवाचारों को अपनाने पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्मार्ट तकनीकों, सीसीटीवी निगरानी, डिजिटल डेटाबेस, और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल जैसे उपकरणों का उपयोग बढ़ाया जाएगा। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश पुलिस को तकनीकी रूप से देश में अग्रणी बनाने का लक्ष्य है। इसके लिए इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशनों को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा, “AI पुलिसिंग में गेम-चेंजर साबित होगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग और अपराधों की सक्रिय रोकथाम संभव होगी।

जन शिकायतों का त्वरित निस्तारण

डीजीपी ने जन शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि हर शिकायतकर्ता की बात सुनी जाएगी और उनकी शिकायतों का समाधान संवेदनशीलता और त्वरित तरीके से किया जाएगा। साथ ही, शिकायतकर्ताओं को उनकी शिकायत की स्थिति के बारे में नियमित जानकारी दी जाएगी। उन्होंने पुलिस कर्मियों को निर्देश दिए कि थानों और चौकियों में नागरिकों के प्रति व्यवहार सौम्य, सहयोगी और संवेदनशील होना चाहिए। डीजीपी ने कहा, “पुलिस और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत करना हमारी प्राथमिकता है।

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को लेकर डीजीपी ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि छेड़खानी, सड़क पर उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसे मामलों में अपराधियों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। डीजीपी ने महिलाओं को सशक्त और सुरक्षित बनाने के लिए विशेष पहल शुरू करने की बात कही। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि महिलाओं और बच्चों से संबंधित अपराधों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जाए और पीड़ितों को त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए।

पुलिस कर्मियों का प्रशिक्षण और कल्याण

डीजीपी ने पुलिस कर्मियों के प्रशिक्षण और कल्याण को भी प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि नियमित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाएगा ताकि पुलिस बल उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहे। साथ ही, उन्होंने पुलिस कर्मियों के कल्याण और उनके कार्यस्थल पर बेहतर सुविधाएं प्रदान करने की प्रतिबद्धता जताई।

1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्णा को उनकी पारदर्शिता और नवाचारों के लिए जाना जाता है। उन्होंने यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में हाल ही में 48 लाख से अधिक आवेदकों की भर्ती परीक्षा को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आयोजित करवाया था। इसके अलावा, उन्होंने यूपी एटीएस के संस्थापक प्रमुख और सीमा सुरक्षा बल में इंस्पेक्टर जनरल (ऑपरेशंस) के रूप में भी अपनी क्षमता सिद्ध की है। उनकी नियुक्ति को उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए एक नई दिशा प्रदान करने वाली माना जा रहा है।

भविष्य की योजनाएं

डीजीपी ने अपनी दृष्टि को स्पष्ट करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस को न केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने में बल्कि जनता की सेवा और सुरक्षा में भी अग्रणी बनाना है। उन्होंने “सुरक्षा आपकी, संकल्प हमारा” के नारे को दोहराते हुए पुलिस बल को जन-केंद्रित और तकनीक-संचालित बनाने का संकल्प लिया। बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इन दिशा-निर्देशों का तत्काल और प्रभावी ढंग से पालन किया जाए।

डीजीपी राजीव कृष्णा की यह पहली समीक्षा बैठक उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है। उनकी 10-सूत्रीय रणनीति, जिसमें अपराध नियंत्रण, तकनीकी नवाचार, और जन-केंद्रित पुलिसिंग शामिल है, से उम्मीद की जा रही है कि यह राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करेगी। विशेष रूप से, महिलाओं की सुरक्षा, साइबर क्राइम की रोकथाम, और आधुनिक तकनीकों का उपयोग जैसे मुद्दे उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर हैं। यह बैठक न केवल पुलिस बल के लिए बल्कि आम जनता के लिए भी एक सकारात्मक संदेश देती है कि उत्तर प्रदेश पुलिस अब और अधिक जवाबदेह, संवेदनशील और तकनीकी रूप से उन्नत होगी।

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